लखनऊ. उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ( शर्मा गुट ) के नव नियुक्त प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष डॉ प्रमोद मिश्रा के लिए उत्तर प्रदेश में शिक्षक संगठन को मजबूती से खड़ा करना सिर्फ एक चुनौती ही नहीं बल्कि उनके शिक्षक नेतृत्व की कसौटी भी है, क्योंकि वह ओम प्रकाश शर्मा जैसे कद्दावर शिक्षक नेता के सानिध्य में MLC रह चुके हैं उनके नेतृत्व में ही शिक्षक राजनीति के गुण सीखे हैं .
ऐसे में डॉक्टर प्रमोद मिश्रा को यह बात बखूबी पता है कि उत्तर प्रदेश की शिक्षक राजनीति में ओम प्रकाश शर्मा क्या थे ? राजनीति में उनका कद कितना बड़ा था ? और शिक्षा विभाग के अधिकारी किस प्रकार से ओम प्रकाश शर्मा के आगे नतमस्तक रहते थे ? केवल शिक्षा विभाग के अधिकारी नहीं 4 दशकों से अधिक समय तक विधान परिषद सदस्य होने के नाते विभिन्न राजनीतिक दलों में उनकी पकड़ थी और हर बड़ा नेता उनको सम्मान के नजरिए से देखता था. कारण सिर्फ यह था कि उनका व्यक्तिगत राजनीति से ऊपर उठकर शिक्षक राजनीति के लिए सर्वस्व न्योछावर कर देना . यही उनकी सबसे बड़ी पूंजी रही है जो आज शर्मा गुट को पुनः वापस प्राप्त करनी है.
वर्तमान में शिक्षक राजनीति में कई धड़े हैं , लेकिन ओमप्रकाश शर्मा ने अपने नेतृत्व क्षमता की वजह से अपने संगठन से न केवल विधान परिषद में शिक्षक नेताओं की संख्या बढ़ाई बल्कि उत्तर प्रदेश में एकछत्र शिक्षक राजनीति के सिरमौर के रूप में भी काम किया . अब उनके न रहने के बाद ओमप्रकाश शर्मा गुट की धीरे-धीरे ताकत कम होती गई आज स्थिति यह है कि उत्तर प्रदेश विधान परिषद में सिर्फ एक मात्र सदस्य ध्रुव त्रिपाठी हैं और कोई भी शिक्षक सदस्य नहीं है. ऐसे में आगामी विधान परिषद चुनाव में शर्मा गुट के लिए अपना प्रतिनिधित्व बढ़ाना तो है ही साथ में वर्तमान प्रतिनिधित्व को बरकरार रखने के लिए बड़ी चुनौती है .
प्रमोद मिश्रा के लिए उत्तर प्रदेश की शिक्षक राजनीति में कई तरह की चुनौतियां हैं , उन्हें सबसे बड़ी चुनौती शर्मा गुट को एकजुट रखने की है, क्योंकि सुरेश त्रिपाठी के चुनाव हारने के बाद से संगठन की क्षमता धीरे-धीरे कम हो रही है और अलग-अलग मंडलों में अलग-अलग क्षेत्र नेताओं ने अपनी राजनीति शुरू कर दी है. शिक्षकों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं . वेतन विसंगति, प्रमोशन और शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण आम शिक्षक बुरी तरीके से परेशान हैं . अनावश्यक शिक्षकों के वेतन रोकना, शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस देना, उनकी बर्खास्तगी से लेकर के शिक्षक संगठनों को उपेक्षित नजरिए से देखना सबसे अहम है.
अब यह चुनौती है कि डॉक्टर प्रमोद कुमार मिश्रा किस प्रकार संगठन को एकजुट रखते हुए अपने नेतृत्व में संगठन को ओम प्रकाश शर्मा वाली ऊंचाइयां दे पाएंगे या नहीं . अभी आने वाले समय में उनके द्वारा लिए जाने वाले फैसले और शर्मा गुट के शिक्षक नेताओं की सक्रियता से ही पता चलेगा कि आने वाले दिनों में शर्मा गुट की राजनीति किस दिशा और दिशा की ओर बढ़ेगी ?
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