देश की सियासी राजनीति में अब सीधे-सीधे भारतीय जनता पार्टी और विपक्ष की लड़ाई सड़क से लेकर अदालत तक जारी है | विपक्ष जहां अदालत में एसआईआर , मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने सहित कई मुद्दों को लेकर सत्तारूद्ग दल को घेरने में लगा हुआ है , वहीं सड़क पर भी उतर कर कथित वोट चोरी और भ्रष्टाचार के मामले में सत्तारूद्ग दल को सीधे-सीधे चुनौती दे रहा है| तो दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी भी कम नहीं है | भाजपा नेतृत्व में इंडी गठबंधन के आरोपों और उनकी सियासी चालों को मांकूल जवाब देना शुरू कर दिया है |
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!Open Challenge To PM Modi : कल तक बचाव की मुद्रा में दिख रही भाजपा अब इतना आक्रामक हो गई है कि इंडी गठबंधन को बचाव की मुद्रा में ला दिया है | दिल्ली से लेकर गोरखपुर, पटना और दक्षिण भारत तक के कई राज्यों में लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ अभियान में भाजपा के बड़े राष्ट्रीय नेता सड़क पर उतरे जबकि इस पूरे अभियान का जवाब देने के लिए इंडी गठबंधन के पास कोई कारगर हथियार नहीं दिखाई पड़ रहा है| इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे-सीधे बहस के लिए ललकार कर अपनी आफत बढ़ा ली है |
भाजपा का सवाल – कितने दिन संसद में रहे राहुल गांधी
campussamachar.com : भाजपा को घेरने के चक्कर में राहुल गांधी की देखा देखी उनके सहयोगी दलों ने भी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को बहस करने की चुनौती देना शुरू कर दिया है, लेकिन मामला तब बिगड़ जब भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने राहुल गांधी के संसद में उपस्थित रहने, बहस में हिस्सा न लेने , भाषण देकर चले जाने जैसे आंकड़े प्रस्तुत कर दिए | लोकसभा सदन में उनकी उपस्थिति कितने प्रतिशत रही और गंभीर मुद्दों प्रस्ताव और चर्चा में उनकी भागीदारी की स्थिति क्या रही ? जैसे आंकड़े प्रस्तुत कर कांग्रेस को पीछे धकेल दिया | बची खुची कसर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सीधे चुनौती देकर पूरी कर दी | साथ ही राष्ट्रीय प्रवक्ताओं ने भी कांग्रेस को सीधे ललकार दिया कि अगर वे बहस ही करना चाहते हैं तो इसके लिए सबसे मुकम्मल संसद ही है और संसद में आकर मुद्दों और निर्धारित समय में अपनी बात रखें तो उन्हें उचित जवाब दिया जाएगा|

चैलेन्ज देकर राहुल गांधी ने क्या हासिल किया है ?
campussamachar.com : अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रधानमंत्री मोदी को चैलेंज देकर राहुल गांधी ने क्या हासिल किया है ? क्या उनके राजनीतिक कद में वृद्धि हो गई है या वे विपक्ष के सर्वमान्य नेता के रूप में स्थापित हो गए हैं ? इन दोनों सवालों का जवाब तलाशने के लिए हमें उनकी रामलीला मैदान की रैली और रैली के बाद पंजाब में आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान पर किया गया हमला | देखें तो दिल्ली की रामलीला मैदान में सिर्फ वही दल कांग्रेस के साथ दिखाई दिए जो विधानसभा और लोकसभा चुनाव में पराजित हुए हैं | मसलन ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव | इस रैली में आम आदमी पार्टी का न तो समर्थन था और ना उसके नेता रामलीला मैदान में दिखे |
राहुल गाँधी ने आप के सीएम को बनाया क्यों निशाना
CampusNews : दिल्ली रैली में आम आदमी पार्टी का न आना एक बड़ा कारण था जो राहुल गांधी को अखर गया और उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को निशाना बनाने के बजाय पंजाब में आम आदमी पार्टी को निशाना बनाया | उन्होंने जनसभा में सीधे-सीधे पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग प्रयोग किया जिन्हें राजनीतिक मर्यादा के दायरे में नहीं देखा जा सकता है | राहुल गांधी ने एक मुख्यमंत्री पर शराब पीने तक के गंभीर आरोप लगाए | इतना ही नहीं उन्होंने अपने बगल में बैठने को लेकर के भी कुछ चीज ऐसी कहीं , जिससे आम आदमी पार्टी के नेता तिलमिला गए|
भाजपा नहीं , लड़ाई अब कांग्रेस बनाम आम आदमी पार्टी की
महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी बनाम कांग्रेस की लड़ाई अब धीरे-धीरे कांग्रेस बनाम आम आदमी पार्टी की होती जा रही है और भारतीय जनता पार्टी दूर से तमाशा देख रही है | भाजपा अपने कार्यक्रमों के जरिए कांग्रेस को कमजोर करने के साथ ही साथ विधानसभा चुनाव की तैयारी में भी लगी हुई है | ऐसे में यह सवाल वाजिब बन जाता है कि प्रधानमंत्री को चैलेंज देकर राहुल गांधी ने क्या हासिल किया ? क्या वे अपने बुने हुए जाल में खुद ही फंस गए हैं | यह सामान्य सी बात है कि लोकसभा नेता प्रतिपक्ष देश के प्रधानमंत्री को चौक चौराहे पर या स्टेडियम में बहस के लिए ललकारे ? लोकतांत्रिक व्यवस्था में बहस का स्थान विधानसभा विधान परिषद लोकसभा और राज्यसभा जैसी लोकतांत्रिक संस्थाएं हैं और जहां चुने हुए प्रतिनिधि निर्धारित मुद्दों विषयों पर अपनी राय रखते हैं | बहस करते हैं और देश के कल्याण और विकास की योजनाओं को अंतिम रूप देते हैं लेकिन राहुल गांधी ने इन विषयों से हटकर चैलेंज करने का एक ऐसा शिगूफा छोड़ दिया है जो उन्हें सुर्खियां तो दिला सकता है लेकिन राजनीति में आगे बढ़ते में मदद नहीं कर सकता है |
national news : संविधान की किताब लेकर चलने वाले राहुल गांधी यह भूल गए इस संविधान में दिए गए अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी निर्वहन बहुत जरूरी होता है | देश के लोकसभा सदस्यों की जिम्मेदारी है कि वह संविधान द्वारा प्रदत अधिकारों कर्तव्यों के साथ अपनी जिम्मेदारी को निभाएं | इनमें एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी यह भी है वे अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों की भी बातें सुन, उनके दिल दुख सुख को साझा करने के साथ उनके जीवन स्तर को उठाने और विकास की योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद करें | सवाल लाजिमी है कि क्या नेता प्रतिपक्ष अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली के विकास के लिए उतना ही प्रतिबद्ध हैं , जितना देश में कांग्रेस का राज लाने के लिए|
राहुल गांधी की यह भी जिम्मेदारी
Rahul Gandhi : सांसद राहुल गांधी रायबरेली के विकास में कमियां राज्य सरकार की कमियां बात कर खारिज नहीं किया जा सकते | कई ऐसे मुद्दे होते हैं जब सरकारों और अवसरशाही को यह बताना जरूरी हो जाता है कि विकास क्यों जरूरी है और भ्रष्टाचार दूर करके सामान्य व्यक्ति को राहत दिलाने के लिए क्या उपाय सुनिश्चित करने चाहिए ? इन प्रयासों को राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी की ओर से कब कितना किया गया है ? रायबरेली वासियों के लिए चिंता के साथ ही साथ सोचने और समझने का भी समय है
कुल मिला करके महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रधानमंत्री को सीधे चैलेंज कर राहुल गांधी ने कुछ हासिल नहीं किया बल्कि अपनी और अपनी पार्टी के लिए मुश्किलें ही पैदा करती हैं और आने वाले दिनों में कांग्रेस के लिए और अधिक मुश्किलें आएंगी|
