लखनऊ, महाकवि जयशंकर प्रसाद साहित्य-संस्कृति महोत्सव 2026 के चतुर्दिवसीय आयोजन का शुभारम्भ आज लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय पार्क में चित्रकला शिविर एवं प्रदर्शनी के साथ हुआ। 25 से 28 फरवरी तक चलने वाले इस महोत्सव में कला, नाटक, संगीत और साहित्यिक गोष्ठी आदि के कार्यक्रम हो रहे हैं। आयोजक समूह में महाकवि जयशंकर प्रसाद ट्रस्ट, राज्य ललित कला अकादमी, संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश सरकार, संस्कार भारती अवध प्रान्त के साथ हिन्दी तथा आधुनिक भारतीय भाषा विभाग एवं ललित कला संकाय, लखनऊ विश्वविद्यालय सम्मिलित हैं।

आज के कार्यक्रम की अतिथियों में डॉ. विभा सिंह (उपाध्यक्ष, राज्य संगीत नाटक अकादमी) ने प्रसाद जी के गीत ‘हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती’ का सस्वर पाठ किया। प्रो. रतन कुमार (अधिष्ठाता ललित कला संकाय, लखनऊ विश्वविद्यालय) ने चित्रकला, साहित्य, रंगमंच आदि विभिन्न विधाओं के अन्तर्सम्बन्धों पर बात रखी। मंच पर प्रो. अवधेश मिश्र (ललित कला विभाग, डॉ॰ शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ), श्री कमलेश पाठक (कार्यक्रम अधिकारी, ललित कला अकादमी), प्रो. पवन अग्रवाल (विभागाध्यक्ष, हिन्दी विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय) तथा प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह (हिन्दी विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय) की महनीय उपस्थिति रही।

महाकवि जयशंकर प्रसाद ट्रस्ट के न्यासी श्री अवधेश गुप्त ने कहा कि जयशंकर प्रसाद जी के साहित्य में दर्शन, ललित कला और संगीत की त्रिवेणी प्रवाहित होती है। डॉ. कविता प्रसाद ने बताया कि यह संस्था 2009 से सक्रिय थी लेकिन ट्रस्ट के रूप में इसका पंजीकरण 2024 में हुआ। उन्होंने कहा कि महोत्सव की इस शृंखला में अभी अनेक शहरों की संस्थाओं में ऐसे होने हैंकार्यक्रम। अवधेश जी ने कार्यक्रम के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी का शुभकामना संदेश भी पढ़ा जिसमें उन्होंने लिखा है, ”महाकवि प्रसाद जी का रचनात्मक अवदान केवल साहित्य तक सीमित नहीं है, बल्कि वह राष्ट्रचेतना, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय मूल्यों को सशक्त स्वर प्रदान करता है। उनके विचार और कृतियां आज भी युवाओं, साहित्यकारों और शोधार्थियों के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत बनी हुई हैं। मेरा विश्वास है कि यह महोत्सव महाकवि जयशंकर प्रसाद जी के साहित्यिक अवदान को व्यापक समाज तक पहुंचाने के साथ-साथ हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति जागरूकता को और अधिक सुदृढ़ करेगा तथा सांस्कृतिक चेतना के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”

सम्माननीय अतिथियों द्वारा कार्यक्रम में आए हुए कलाकारों प्रो. सुनील सक्सेना जी, प्रो. अवधेश मिश्र, रश्मि श्रीवास्तव, अमनदीप, सौरभ सुरेश, मोहन मावा, मैनाज़ बानो, कुमारी नेहा, अश्विनी कुमार प्रजापति, धर्मेन्द्र सिंह, निशांत राय, सिद्धार्थ देव, आराधना कांति, जितेन्द्र राम और उपासना त्रिपाठी का अभिनंदन किया गया।

चित्रकला शिविर एवं प्रदर्शनी में स्वागत वक्तव्य कार्यक्रम संयोजक प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह तथा अतिथि परिचय हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. पवन अग्रवाल ने किया। कार्यक्रम में हिन्दी विभाग एवं ललित कला संकाय के आचार्यगण और छात्र-छात्राओं की सक्रिय उपस्थिति रही।
