

- ‘कला दीर्घा’ अंतरराष्ट्रीय दृश्यकला पत्रिका एवं ‘कला स्रोत’ कला वीथिका, लखनऊ का सहआयोजन
- बेटियों के चित्रों ने दर्शकों का मन मोहा
लखनऊ, 06 सितम्बर 2025 शिवानी वर्मा डॉ शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ की मास्टर ऑफ़ विजुअल आर्ट की छात्रा हैं। प्रकृति ने उसको देने में कुछ कंजूसी की है। वह सुन और बोल नहीं सकती थी पर माता-पिता ने दुनिया की सारी खुशियां देने के लिए हर संभव प्रयास किया और जो भी अत्याधुनिक उपकरण सुनाई देने में सहायक हो सकते हैं सब कुछ करवाने का प्रयत्न किया है। ‘नैवेद्य’ अखिल भारतीय चित्रकला प्रदर्शनी है जो शिक्षक-दिवस के अवसर पर गुरुओं के सम्मान में ‘कला दीर्घा’ अंतरराष्ट्रीय दृश्य कला पत्रिका एवं कला स्रोत कला वीथिका, अलीगंज, लखनऊ द्वारा संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई है।
शिवानी वर्मा इस प्रदर्शनी में सहभागी है। वह चित्र बनाती है। उसके चित्रों में सपनों की उड़ान है। वह कहीं से भी अपने को कमजोर नहीं होने देना चाहती। उसने कल्पना किया है कि आज की सशक्त महिलाओं की तरह वह भी स्कूटर ही न चलाए बल्कि अनंत में उड़े। वह अपने माता-पिता का संघर्ष देखती है, अपने चित्रण विषय के रूप में वही सोचती भी है। शिवानी वर्मा ने अपने चित्र में कल्पना की है कि मैं भी स्कूटर चलाऊँ। ‘नैवेद्य’ कला प्रदर्शनी जो गुरुओं को समर्पित प्रदर्शनी है के उद्घाटन अवसर पर शिवानी ने अपने गुरु डॉ अवधेश मिश्र को कुछ विशेष भेंट करने के लिए उनका पोर्ट्रेट बनाया और उन्हें भेंट किया। यही नैवेद्य है। प्रदर्शनी का शीर्षक सार्थक हुआ।

इस प्रदर्शनी की क्यूरेटर डॉ लीना मिश्र, प्रकाशक, कलादीर्घा, अंतर्राष्ट्रीय दृश्य कला पत्रिका और समन्वयकत्रय डॉ अनीता वर्मा, प्रशांत चौधरी और सुमित कुमार युवा कलाकार हैं जो इस प्रदर्शनी के सहभागी भी हैं। प्रदर्शनी में देश के विभिन्न प्रदेशों के 41 कलाकार शामिल हैं जिनमें स्थानीय स्तर पर आचार्य रतन कुमार, आचार्य आलोक कुमार, आचार्य रविकांत पांडेय कला एवं शिल्प महाविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ और डॉ अवधेश मिश्र, डॉ फौजदार, डॉ रीना गौतम और श्रद्धा तिवारी डॉ शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ से सम्मिलित हैं। शामिल सहभागियों में सबसे युवा कलाकार अर्चिता मिश्र हैं जो हाई स्कूल, लोरेटो कॉन्वेंट लखनऊ की छात्रा हैं। बचपन से उसमें रेखांकन और चित्रण की ओर रुझान था जो अब फोटोग्राफी की तरफ मुड़ गया है। अब वह रचनात्मक छायांकन करती हैं। उसका चित्र ‘लाइट’ प्रदर्शित किया गया है।
इसी तरह सुमित कुमार का चित्र नॉस्टैल्जिया, प्रशांत चौधरी के चित्र में बनी फाइलों पर जोंक, डॉ अनीता वर्मा का कपडे की कतरनों से बना निसर्ग नाद, अभिषेक कुमार के चित्र में फल तोड़ती युवती, अंजली यादव की अध्यात्म में लीन महिला, अनुराग गौतम के वनमानुष, अनुरंजिका द्विवेदी का राजनीतिक कटाक्ष, अर्पिता द्विवेदी का धनलोलुपता पर कटाक्ष, डॉ फौजदार का मोर के साथ खड़ी युवती का वाश चित्र, गणेश शंकर मिश्रा का छायाचित्र गांव की ओर, ज्ञानचंद का अपने संस्कारों से जुड़े रहने का संदेश, हिमांशु शर्मा की धर्मयात्रा, इंद्रपाल का दृश्यचित्र, कमलेश्वर का अमूर्तचित्र, मयंक वैश्य का मयखाना, मयंक सिंह यादव का रेखांकन, डॉ मिठाई लाल का प्रकृति और पशु प्रेम, निलेश इंगले का अध्यात्म, ओम प्रकाश गुप्ता का बनारसी रंग, पंकज यादव का युगल, प्राची यादव का चित्र ग्राम्य संस्कृति, प्रिया मिश्रा का छविचित्र, राजेश्वर का लोकचित्र, रश्मि सिंह का पढ़ते बच्चे, रीना गौतम का छाप, सपना यादव का नवजात शिशुओं पर अभिभावकों द्वारा की जाने वाली अपेक्षाओं का प्रतीकात्मक चित्रण, सचिन सैनी का रोटी पर चित्र, सचिन गौतम के वाशचित्र में अंकित युवती, सौरवी सिंह का चित्र समय की कठपुतली, श्रद्धा तिवारी का बहुरंगी काष्ठछाप, श्रीयांशी सिंह का गांव, सुमित कश्यप का पशु प्रेम, उमाशंकर का अमूर्त चित्र और वैभव पांडेय का बालआनंद दर्शनीय है। प्रदर्शनी के समापन समारोह में 8 सितंबर 2025 के मुख्य अतिथि प्रख्यात लेखक महेंद्र भीष्म होंगे।
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