लखनऊ , 22 मई , लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ प्रशासन ने आज ग्रीष्मावकाश घोषित कर दिया है लेकिन लुआक्टा की मांगों पर ध्यान ही नहीं दिया गया. संगठन के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर मनोज पाण्डेय और महामंत्री प्रोफ़ेसर अंशु केडिया की ओर से कुलपति को एक महत्वपूर्ण पत्र भेजा गया था .
लुआक्टा द्वारा कुलपति प्रोफ़ेसर जेपी सैनी को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि ग्रीष्म अवकाश एवम एवं अवकाश अवधि में परीक्षा कार्य करने पर प्रतिकर अवकाश दिये जाने के संबंध में दिनांक 14/05/26 एवम 18/05/26 प्रेषित पत्र किया गया था, जिसके क्रम में दिनांक 19/05/26 को आपसे ( कुलपति प्रोफ़ेसर जेपी सैनी ) विस्तृत वार्ता हुई,संघ इसके लिये आपका ( कुलपति प्रोफ़ेसर जेपी सैनी ) आभार व्यक्त करता है l वार्ता के क्रम मे 45 दिन का ग्रीष्मावकाश एवं अवकाश 1 जून से घोषित किया जायेगा, पर सहमति हुई l संगठन द्वारा ग्रीष्मावकाश अवधि में पूर्व की भाँति परीक्षा ड्यूटी करने पर 1 कार्य दिवस के बदले 1 प्रतिकर अवकाश यथावत रखते हुए आदेश जारी करने का आग्रह किया गया, आप ( कुलपति प्रोफ़ेसर जेपी सैनी ) द्वारा अवगत कराया गया कि प्रतिकर अवकाश की कोई व्यवस्था परिनियम में नही है, तथा प्रतिकर अवकाश का उपभोग एक वर्ष के अंदर ही करना होता है, एवं परिनियम में अर्जित अवकाश की व्यवस्था है और इसके उपभोग पर कोई समय सीमा नही है और शिक्षकों द्वारा इसका उपभोग पूरे सेवा काल में अपने सुविधानुसार कर सकता हैं, और यह वार्षिक रूप से अर्जित 12 अवकाश के अतिरिक्त होगा l

लुआक्टा नेताओं के अनुसार आप ( कुलपति प्रोफ़ेसर जेपी सैनी ) द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि अवकाश की अवधि में परीक्षा ड्यूटी करने के लिए शिक्षक से उसकी सहमति प्राप्त की जाएगी और वह जितने दिनों की सहमति देता है तदनुसार सहमति के पूरे कार्यदिवस को जोड़कर उसका आधा अर्जित अवकाश प्रदान किया जाएगा l कार्यदिवस की गणना में अवकाश अवधि भी सम्मलित रहेगी, तथा शिक्षकों को ड्यूटी पर तभी बुलाया जायेगा जब शिक्षक की ड्यूटी हो, अर्थात ड्यूटी न होने पर उसे महाविद्यालय में नहीं उपस्थित होना होगा l इसके साथ ही संगठन द्वारा अवगत कराया गया कि इससे प्राचार्यो द्वारा मनमानी भी की जा सकती हैं, तथा अपने करीबी को कम ड्यूटी देकर अधिक अर्जित अवकाश एवं विरोधी को अधिक ड्यूटी लगाए जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता हैं l आप द्वारा अवगत कराया गया कि इस विसंगति को दूर करने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा अवकाश अवधि में ड्यूटी के संबंध में दिशा निर्देश जारी कर दिया जायेगा, जिससे प्राचार्य मनमानी न कर सके l
संगठन द्वारा आपको ( कुलपति प्रोफ़ेसर जेपी सैनी ) अवगत कराया गया था कि यह फार्मूला बेहद जटिल है इसको सरलीकृत करते हुए अवकाश के दिनों मे परीक्षा ड्यूटी करने पर पूर्व की भाँति एक पर एक अवकाश किया जाए, जिससे किसी शिक्षक साथी के साथ अन्याय न हो l
पुन: संगठन द्वारा अवगत कराया गया कि आपके प्रस्ताव एवं फार्मूले पर लुआक्टा कार्यकारणी की आहूत बैठक दिनांक 20/05/26 मे सदस्यों को अवगत कराया जाएगा, बैठक मे लिए गए निर्णय के बाद आपको अवगत कराया जायेगा एवं तद्नुसार आपसे निर्णय लिये जाने का आग्रह किया जायेगा, बैठक मे निम्न निर्णय लिए गए है:
A- ग्रीष्म अवकाश घोषित किये जाने हेतु अतिशीघ्र आदेश जारी किया गया l
B- आप अवगत है कि भीषण गर्मी से छात्र/ छात्राओं के बेहोश होने की सूचना जगह जगह से आ रही है, जिसके दृष्टिगत न मुख्यमंत्री जी के निर्देश है कि 15 मई तक परीक्षा संपन्न हो जाए, इसका पालन किया जाना चाहिए था l छात्र/ छात्राओं के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी भी विश्वविद्यालय की है, अगर एक बार स्टूडेंट बीमार पड़ता है उसकी आगे की परीक्षाएं भी प्रभावित हो जाएंगी l अत: समस्त द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षाओं का संचालन ग्रीष्मावकाश के बाद किया जाय, क्योकि इन छात्र/ छात्राओं की विलंब परीक्षा से अभी इनके कॅरिअर पर दुष्प्रभाव नही पड़ेगा l
C–अगर परीक्षाएं कराना अपरिहार्य है तो समस्त परीक्षाएं किसी भी दशा मे 12 बजे तक पूरी तरह संपन्न हो जाएं l
D– अर्जित अवकाश के फार्मूले की प्राचार्यगण अपनी मनमानी व्याख्या करेंगे, कतिपय महाविद्यालयों मे कम शिक्षक स्टाफ होने के कारण पूर्ण अवकाश पर जाने वाले शिक्षकों को रोका जाएगा l
E– अर्जित अवकाश का फार्मूला प्रायोगिक एवम मूल्यांकन परीक्षा पर भी लागू किया जाय l
F– जटिलताओं को दूर करने के लिए एक पर एक अर्जित अवकाश दिया जाये l
पत्र में ग्रीष्मावकाश घोषित करने एवं अवकाश अवधि में ड्यूटी करने वाले शिक्षकों के लिए अर्जित अवकाश नियम सरल एवं स्पष्ट बनाये जाए, एवं इसे 1 कार्यदिवस के बदले 1 अर्जित अवकाश प्रदान किया जाय लेकिन आज घोषित ग्रीष्म कालीन अवकाश में मागों के अनुरूप व्यवस्था नही दिखी .
