बिलासपुर , 22 मई , आज जहां पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और कंक्रीट के बढ़ते जंगलों से चिंतित है, वहीं छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से पर्यावरण संरक्षण की एक बेहद अनोखी और मिसाल कायम करने वाली खबर सामने आई है।
जनपद प्राथमिक शाला बिल्हा के शासकीय शिक्षक कलेश्वर साहू ने अकेले ही महज एक महीने की कड़ी मेहनत से 1 लाख 52 हजार ‘सीड बॉल’ तैयार कर डाले हैं। व्यक्तिगत स्तर पर एक ही सत्र में इतनी बड़ी संख्या में सीड बॉल बनाने वाले वे छत्तीसगढ़ के पहले शिक्षक बन गए हैं। शिक्षक कलेश्वर साहू को इस नवोन्मेषी कार्य की प्रेरणा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई में मार्च 2025 में आयोजित राष्ट्रीय आविष्कार प्रशिक्षण के दौरान मिली थी। समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ के तत्वाधान में आयोजित इस प्रशिक्षण में राज्य कार्यालय के प्रशिक्षण प्रभारी के मार्गदर्शन से प्रेरित होकर उन्होंने 20 अप्रैल 2026 से इस पर काम शुरू किया और दृढ़ संकल्प के साथ महज एक माह में इस विशाल लक्ष्य को हासिल कर दिखाया।
इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। कलेश्वर साहू ने अपने परिवार के सहयोग से स्थानीय लोगों के माध्यम से बड़ी मात्रा में मिट्टी, गोबर और विभिन्न प्रकार के बीज एकत्र किए। इन बीजों में मुख्य रूप से इमली, चार (चिरौंजी), तेंदू, गंगा इमली, सतावर, नीम, अमरूद और गुलमोहर जैसी स्थानीय प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई है, जो क्षेत्र की जलवायु के अनुकूल हैं।
सीड बॉल तकनीक के तहत बीजों को मिट्टी और गोबर के विशेष मिश्रण में लपेटकर छोटी गेंदों का आकार दिया जाता है। यह आवरण बीजों को तेज धूप, अत्यधिक बारिश, पक्षियों और जानवरों से सुरक्षित रखता है। केन्या जैसे देशों और पहाड़ी क्षेत्रों में अत्यधिक लोकप्रिय इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके जरिए बेहद कम समय में एक बड़े और दुर्गम इलाके में पौधरोपण किया जा सकता है। जिन पथरीले या पहाड़ी रास्तों पर इंसानों का पहुँचना मुश्किल होता है, वहाँ इन सीड बॉल्स को गुलेल, हाथों की सहायता से दूर से फेंक दिया जाता है। जैसे ही बरसात शुरू होगी, मिट्टी और खाद की नमी पाकर इन बॉल्स के भीतर मौजूद बीज अंकुरित होकर पौधों के रूप में विकसित होने लगेंगे।
