लखनऊ . खुन खुन जी गर्ल्स पी.जी. कॉलेज Khun Khun ji Girls PG College, Lucknow के उर्दू विभाग एवं आकाशवाणी लखनऊ की कैम्पस डायरी कार्यक्रम के तहत एक नई पहल खुन खुन जी गर्ल्स पी.जी. कॉलेज में को आकाशवाणी के उर्दू कार्यक्रम के तहत “कैम्पस डायरी” शीर्षक के अंतर्गत आकाशवाणी उर्दू की टीम ने दौरा किया। इसमें उर्दू कार्यक्रम इंचार्ज आसिफ इकबाल, सुश्री अनाहिद और सुश्री शाजिया खान शामिल थे। आकाशवाणी की टीम ने छात्राओं के स्वरचित काव्य (ग़ज़ल) और कहानी की रिकॉर्डिंग की।
इस कार्यक्रम में सबसे पहले बी.ए. तृतीय वर्ष की छात्रा अदीबा खान ने “कहानी क्या है, उसका आरंभ कैसे हुआ और कहानी लेखन में किस तरह बदलाव आते रहे” विषय पर अपना लेख प्रस्तुत किया। उनके बाद बी.ए. तृतीय वर्ष की छात्रा समीरा मलिक ने अपनी कहानी “नूरजाद” सुनाई। इसमें उन्होंने समाज की उस रस्म पर कटाक्ष किया कि लोग केवल शक्ल देखकर इंसान की ज़िंदगी का फैसला करने लगते हैं और उसकी खूबियों को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। बी.ए. प्रथम वर्ष की छात्रा सुश्री फलक अंसारी ने “ग़ज़ल क्या है” शीर्षक के अंतर्गत बहुत सादी और असरदार भाषा में ग़ज़ल की खूबियों को समझाया। उनके लेख को सबने बहुत पसंद किया। इसके बाद बी.ए. प्रथम वर्ष की छात्रा इरम फातिमा ने अपनी स्वरचित ग़ज़लें पेश कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
आकाशवाणी की टीम ने छात्राओं से रैपिड फायर के अंतर्गत कई प्रश्न भी किए। छात्राओं ने आत्मविश्वास के साथ जवाब देकर टीम को आश्चर्यचकित कर दिया। उर्दू कार्यक्रम इंचार्ज श्री आसिफ इकबाल साहब ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि कैम्पस डायरी के तहत हम शहर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाकर कार्यक्रम करते हैं, ताकि छात्र-छात्राओं से सीधे मिल सकें, उनकी समस्याएँ सुन सकें और व्यक्तित्व विकास के लिए उचित मार्गदर्शन देकर जीवन में सफल होने में मदद कर सकें।
कॉलेज ( Khun Khun ji Girls PG College, Lucknow ) की प्रधानाचार्या प्रो. अंशु केडिया ने आकाशवाणी उर्दू कार्यक्रम की टीम का हृदय से स्वागत किया और कैम्पस आगमन को छात्राओं के व्यक्तित्व विकास के लिए बहुत अहम बताया। पूरा कार्यक्रम खुन खुन जी गर्ल्स पी.जी. कॉलेज के उर्दू विभाग की अध्यक्षा प्रो. रेशमा परवीन के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। उन्होंने बताया कि छात्राओं ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए कड़ी मेहनत की है और उनकी कामयाबी पर उन्हें बधाई दी।
कार्यक्रम के अंत में आकाशवाणी की टीम, छात्राएँ, प्रधानाचार्या प्रो. अंशु केडिया और प्रो. रेशमा परवीन सबका एक ही मत था कि कार्यक्रम इतने सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ कि पता ही नहीं चला कि यह आकाशवाणी का उर्दू कार्यक्रम था या एक पारिवारिक मिलन।
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