लखनऊ। बीएसएनवी पीजी कॉलेज (Bappa Sri Narain Vocational P.G College (KKV)), लखनऊ के रसायन विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डॉ. अभिषेक उपाध्याय एवं डॉ. गोविंद कृष्ण मिश्रा को उनके संयुक्त नवाचार “ADVANCED APPARATUS FOR MEDICINAL CHEMISTRY AND DRUG SYNTHESIS” (औषधीय रसायन विज्ञान एवं औषधि संश्लेषण हेतु उन्नत उपकरण) के लिए भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा भारतीय डिजाइन पेटेंट प्रदान किया गया है। इस डिजाइन का पंजीकरण संख्या 514952-001 है।

यह उपलब्धि औषधीय रसायन विज्ञान, औषधि संश्लेषण तथा प्रयोगशाला उपकरणों के क्षेत्र में नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे महाविद्यालय में शोध एवं अनुसंधान की गतिविधियों को नई प्रेरणा मिलेगी तथा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार की भावना विकसित होगी।
डॉ. अभिषेक उपाध्याय रसायन विज्ञान के क्षेत्र में हरित रसायन, नैनोविज्ञान तथा कार्बनिक यौगिकों के संश्लेषण जैसे विषयों पर शोध कार्य कर रहे हैं। उनके शैक्षणिक योगदान में शोध-पत्रों के प्रकाशन, पुस्तक लेखन एवं पेटेंट संबंधी कार्य शामिल हैं। डॉ. गोविंद कृष्ण मिश्रा के साथ यह उपलब्धि दोनों शिक्षकों की शोधपरक दृष्टि, वैज्ञानिक प्रतिभा और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

प्राचार्य प्रोफेसर संजय मिश्रा ने दी बधाई
इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर संजय मिश्रा ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह बीएसएनवी पीजी कॉलेज, लखनऊ के लिए अत्यंत हर्ष एवं गौरव का विषय है। हमारे शिक्षकों को भारतीय डिजाइन पेटेंट प्राप्त होना महाविद्यालय में विकसित हो रही शोध एवं नवाचार की संस्कृति तथा गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता का परिचायक है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान तकनीकी युग में अनुसंधान, सृजनात्मकता और नवाचार राष्ट्र की प्रगति के प्रमुख आधार हैं। शिक्षकों की ऐसी उपलब्धियाँ विद्यार्थियों एवं युवा शोधार्थियों को वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में नए विचारों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने दोनों शिक्षकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए आशा व्यक्त की कि वे भविष्य में भी अपने शोध और नवाचार से महाविद्यालय तथा राष्ट्र का गौरव बढ़ाते रहेंगे।
इस उपलब्धि से महाविद्यालय परिवार में हर्ष का वातावरण है। यह सफलता उच्च शिक्षा संस्थानों में शोधपरक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत वैज्ञानिक एवं तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में प्रेरणादायक है।
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