- अकेले शिक्षक ने रचा इतिहास: बिलासपुर के कलेश्वर साहू ने बनाए रिकॉर्ड 3 लाख ‘सीड बॉल’, पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल
बिलासपुर, 11 जुलाई , वैश्विक स्तर पर बढ़ते कंक्रीट के जंगलों और ग्लोबल वार्मिंग के दौर में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से पर्यावरण संरक्षण की एक अभूतपूर्व और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। जनपद प्राथमिक शाला बिल्हा में पदस्थ शासकीय शिक्षक कलेश्वर साहू ने अपने दृढ़ संकल्प के बल पर अकेले ही तीन लाख ‘सीड बॉल’ (बीज गेंद) तैयार कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कलेश्वर साहू को लोग छत्तीसगढ़ के “सीड बॉल मैन” के नाम से प्रसिद्ध है।

शिक्षक कलेश्वर साहू को इस नवोन्मेषी कार्य की प्रेरणा मार्च 2025 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई में आयोजित राष्ट्रीय आविष्कार प्रशिक्षण के दौरान मिली थी। समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ के तत्वाधान में आयोजित इस प्रशिक्षण में राज्य कार्यालय के प्रशिक्षण प्रभारी के मार्गदर्शन से प्रेरित होकर उन्होंने 20 अप्रैल 2026 से इस महती कार्य की शुरुआत की थी।
कलेश्वर साहू ने अद्वितीय कार्यक्षमता का परिचय देते हुए शुरुआती मात्र तीस दिनों के भीतर ही 1.52 लाख सीड बॉल तैयार कर लिए थे, जिसके बाद निरंतर प्रयास करते हुए उन्होंने आज 10 जुलाई 2026 तक तीन लाख सीड बॉल बनाने का विशाल लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया। यह व्यक्तिगत स्तर पर सबसे अधिक सीड बॉल बनाने का एक नया रिकॉर्ड बन गया है। इस सराहनीय उपलब्धि के लिए बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल, जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर जायसवाल, विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र कौशिक, बीआरसीसी देवी प्रसाद चंद्राकर, सीएसी बिल्हा केशव वर्मा, सीएसी सुनील पाण्डेय, सीएसी डॉ. डी. एन. यादव, प्रधान पाठक साधराम मरकाम, संदीप दुबे, केदार दुबे और राजेश यादव सहित जिले के तमाम अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों तथा गणमान्य नागरिकों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसके लिए पर्यावरण प्रेमी कलेश्वर साहू को स्थानीय समुदाय से भरपूर सहयोग और बीज प्राप्त हुए, जिससे उन्हें बाजार से बहुत कम बीज खरीदने पड़े। उन्होंने अपने परिवार के सहयोग और स्थानीय लोगों की मदद से बड़ी मात्रा में मिट्टी, गोबर और विभिन्न प्रकार के बीज एकत्र किए। इन बीजों में मुख्य रूप से क्षेत्र की जलवायु के अनुकूल स्थानीय प्रजातियों जैसे इमली, चार (चिरौंजी), तेंदू, गंगा इमली, सतावर, नीम, खमहार, करंज, अमरूद और गुलमोहर को प्राथमिकता दी गई है। वर्तमान में वे इन सीड बॉल्स को केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ अरुण साव, बिल्हा विधायक धरम लाल कौशिक, बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, क्रेडा अध्यक्ष छत्तीसगढ़ भूपेन्द्र सवन्नी, महापौर पूजा विधानी, तथा कलेक्टर से लेकर आम जनमानस तक को वितरित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रसारित कर रहे हैं।

सीड बॉल एक बेहद प्रभावी और आधुनिक तकनीक है जिसके तहत बीजों को मिट्टी और गोबर जैसी जैविक खाद के विशेष मिश्रण में लपेटकर छोटी गेंदों का आकार दिया जाता है। यह सुरक्षात्मक आवरण बीजों को तेज धूप, अत्यधिक बारिश, पक्षियों और जानवरों से सुरक्षित रखता है। केन्या जैसे देशों और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में अत्यधिक लोकप्रिय इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसके जरिए बेहद कम समय में एक बड़े और कठिन इलाके में पौधरोपण किया जा सकता है। जिन पथरीले या पहाड़ी रास्तों पर इंसानों का पहुँचना मुमकिन नहीं होता, वहाँ इन सीड बॉल्स को गुलेल या हाथों की सहायता से दूर से फेंक दिया जाता है। बरसात की पहली फुहार पड़ते ही मिट्टी और खाद की नमी पाकर इन बॉल्स के भीतर मौजूद बीज अंकुरित होकर पौधों के रूप में विकसित होने लगते हैं। शिक्षक कलेश्वर साहू अपनी यात्राओं के दौरान भी खाली और बंजर जमीनों पर इन्हें फेंकते चलते हैं ताकि आने वाले समय में वे क्षेत्र घने और हरे-भरे जंगलों में तब्दील हो सकें।
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