
समस्त सिद्धियों के प्रदाता, प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी के आशीर्वाद से प्रत्येक जीवन में शुभ-लाभ का संचार हो,
हमारा राष्ट्र निरंतर उन्नति के मार्ग पर गतिमान रहे, गौरीसुत श्री गणेश जी से यह प्रार्थना है।
ॐ गं गणपतये नमः।“
°°° विनायक चतुर्थी की ढ़ेर सारी बधाई????????°°°
●▬▬ஜ۩ सुप्रभातम्۩ஜ▬▬●
गजाननं भूतगणाधिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्।
उमासुतं शोकविनाशकारकम्
नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥
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अर्थात्…
गज मुख वाले, भूत-गणों के द्वारा सेवित, कैथ एवं जामुन का चाव से भक्षण करने वाले, शोक (दुःख या कष्ट) के नाशकर्ता, उमा-पुत्र को मैं नमन करता हूं, विघ्नों के नियंता श्री गणेश के चरण-कमलों के प्रति हमारा प्रणाम ।
जय श्रीगणेश????????
अंग्रेजों को धूल चटाने के बाल गंगाधर तिलक ने शुरू किया था गणपति उत्सव, गणेश चतुर्थी के बाद दस दिनों तक लगातार गणेशोत्सव की धूम देखने को मिलती है, गणेश चतुर्थी आस्था से तो जुड़ा ही हुआ है लेकिन स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में भी इसकी खास अहमियत रही है…आइए आज आपको बताते हैं गणेशोत्सव का बाल गंगाधर तिलक और देश की आजादी की लड़ाई से जुड़े इतिहास के बारे में…
????अंग्रेजों के खिलाफ शुरू की बगावत-
आज से करीब 100 से पहले लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने ही गणेशोत्सव की नींव रखी थी,इस त्योहार को मनाने के पीछे का उद्देशय अंग्रेजों के खिलाफ भारतीयों को एकजुट करना था, आज जिस गणेशोत्सव को लोग इतनी धूम-धाम से मनाते हैं, उस पर्व को शुरू करने में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था..!
????कैसे हुई विसर्जन की शुरुआत-
1890 के दशक में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान तिलक अक्सर चौपाटी पर समुद्र के किनारे बैठते थे और वे इसी सोच में डूबे रहते थे कि आखिर लोगों जोड़ा कैसे जाए, अंग्रेजों के खिलाफ एकजुटता बनाने के लिए..?
उन्होंने धार्मिक मार्ग चुना, तिलक ने सोचा कि क्यों न गणेशोत्सव को घरों से निकालकर सार्वजनिक स्थल पर मनाया जाए, ताकि इसमें हर जाति के लोग शिरकत कर सकें..!
????गणेश मूर्ति विसर्जन की पौराणिक कथा-
धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार श्री वेद व्यास ने गणेश चतुर्थी से महाभारत कथा श्री गणेश को लगातार 10 दिन तक सुनाई थी जिसे श्री गणेश जी ने अक्षरश: लिखा था, 10 दिन बाद जब वेद व्यास जी ने आंखें खोली तो पाया कि 10 दिन की अथक मेहनत के बाद गणेश जी का तापमान बहुत बढ़ गया है, तुरंत वेद व्यास जी ने गणेश जी को निकट के सरोवर में ले जाकर ठंडे पानी से स्नान कराया था, इसलिए गणेश स्थापना कर चतुर्दशी को उनको शीतल किया जाता है..!
????क्या कहती है वेद व्यास की कथा-
इसी कथा में यह भी वर्णित है कि श्री गणपति जी के शरीर का तापमान ना बढ़े इसलिए वेद व्यास जी ने उनके शरीर पर सुगंधित सौंधी माटी का लेप किया, यह लेप सूखने पर गणेश जी के शरीर में अकड़न आ गई, माटी झरने भी लगी…तब उन्हें शीतल सरोवर में ले जाकर पानी में उतारा, इस बीच वेदव्यास जी ने 10 दिनों तक श्री गणेश को मनपसंद आहार अर्पित किए तभी से प्रतीकात्मक रूप से श्री गणेश प्रतिमा का स्थापन और विसर्जन किया जाता है और 10 दिनों तक उन्हें सुस्वादु आहार चढ़ाने की भी प्रथा है..!
????ये भी है मान्यता-
मान्यता है कि गणपति उत्सव के दौरान लोग अपनी जिस इच्छा की पूर्ति करना चाहते हैं, वे भगवान गणपति के कानों में कह देते हैं, गणेश स्थापना के बाद से 10 दिनों तक भगवान गणपति लोगों की इच्छाएं सुन-सुनकर इतना गर्म हो जाते हैं कि चतुर्दशी को बहते जल में विसर्जित कर उन्हें शीतल किया जाता है..!
????क्यों लगाते हैं गणपति बप्पा मोरया का जयकारा-
गणपति बप्पा से जुड़े मोरया नाम के पीछे गणपति जी का मयूरेश्वर स्वरूप माना जाता है, गणेश-पुराण के अनुसार सिंधु नामक दानव के अत्याचार से बचने के लिए देवगणों ने गणपति जी का आह्वान किया… सिंधु का संहार करने के लिए गणेश जी ने मयूर को वाहन चुना और छह भुजाओं का अवतार धारण किया, इस अवतार की पूजा भक्त गणपति बप्पा मोरया के जयकारे के साथ करते हैं..!
हे गणपति महाराज इस वर्ष समस्त मानवो को संबल प्रदान करे, सभी मे इतना सामर्थ्य अवश्य दीजिये जिससे वो इस कठिन समय का सामना कर सके…
देश-समाज-परिवार के सभी मंगलकारी कार्य निर्विघ्न हों,
आप सभी भक्तों को गणेश चतुर्थी की मंगलकामनाएं..!!
प्रस्तुति :
ललित अग्रवाल, बिलासपुर

