गोरखपुर. 06 अगस्त , उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी की अध्यक्षता में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय का 45वाँ दीक्षोत्सव संपन्न हुआ (Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University (DDUGU) held its 45th Convocation on August 6, 2026 ) । दीक्षोत्सव में कुल 74,481 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं, जिनमें 51,193 छात्राएँ (68.73 प्रतिशत) तथा 23,288 छात्र (31.27 प्रतिशत) शामिल रहे। समारोह में 85 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 172 पदक प्रदान किए गए। इनमें 63 छात्राएँ (74.12 प्रतिशत) एवं 22 छात्र (25.88 प्रतिशत) रहे। प्रदान किए गए पदकों में 80 विश्वविद्यालय पदक तथा 92 डोनर्स पदक शामिल थे। सभी उपाधियों एवं अंकपत्रों को डिजीलॉकर पर अपलोड किया गया।
राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों द्वारा लिखित पुस्तकों एवं दीक्षोत्सव (Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University (DDUGU) held its 45th Convocation on August 6, 2026 ) स्मारिका का विमोचन किया तथा अकादमिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया।

राज्यपाल जी की प्रेरणा से संचालित एचपीवी टीकाकरण अभियान के अंतर्गत जनपद कुशीनगर की 300 तथा जनपद गोरखपुर की 2500 बेटियों का एचपीवी टीकाकरण कराया गया, जिनमें पुलिस कर्मियों की बेटियाँ भी शामिल रहीं। उल्लेखनीय है कि इस अभियान के अंतर्गत प्रदेश में अब तक 5,91,759 बालिकाओं का टीकाकरण कराया जा चुका है। राज्यपाल जी ने कहा कि एचपीवी वैक्सीन से एक भी बेटी वंचित नहीं रहनी चाहिए। 17 सितंबर को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के जन्मदिवस के अवसर पर सभी राज्य विश्वविद्यालयों एवं जिला प्रशासन के सहयोग से एक ही दिन में एक करोड़ बेटियों को एचपीवी वैक्सीन उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
राज्यपाल जी द्वारा संचालित अभियान (Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University (DDUGU) held its 45th Convocation on August 6, 2026 ) के अंतर्गत जनपद गोरखपुर के 300 तथा जनपद कुशीनगर के 200 आंगनबाड़ी केन्द्रों को आंगनबाड़ी किट वितरित की गई। इस अभियान के तहत प्रदेश में अब तक 72,793 आंगनबाड़ी केन्द्रों को सुविधासंपन्न बनाया जा चुका है। बेहतर संसाधनों के कारण आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ी है तथा समय पर आना, बैठना, भोजन करना, खेलना और सीखना जैसी गतिविधियों में सकारात्मक परिवर्तन आया है। राज्यपाल जी ने कहा कि उन्होंने स्वयं इन केन्द्रों का निरीक्षण किया है और देखा है कि बेहतर वातावरण मिलने से बच्चे अत्यंत प्रसन्न रहते हैं।
दीक्षोत्सव को संबोधित करते हुए राज्यपाल जी ने (Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University (DDUGU) held its 45th Convocation on August 6, 2026 ) विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ एवं हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल, सफल, समृद्ध एवं सार्थक भविष्य की मंगलकामना की। उन्होंने कहा कि गोरखपुर की पुण्यभूमि भगवान बुद्ध की करुणा और मानवता के संदेश से अनुप्राणित है। यह महान योगी गुरु गोरखनाथ की तपोभूमि है, जिन्होंने योग, साधना और लोककल्याण की परंपरा को नई दिशा दी। संत कबीर की निर्भीक वाणी और सामाजिक समरसता का संदेश भी इसी क्षेत्र की सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न अंग है। हिंदी-उर्दू साहित्य के अमर कथाकार मुंशी प्रेमचंद ने इसी क्षेत्र में रहकर समाज की वास्तविकताओं को अपनी लेखनी से अमर बनाया, जबकि अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल का बलिदान इस क्षेत्र की राष्ट्रभक्ति और स्वतंत्रता चेतना का गौरवपूर्ण प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय (Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University (DDUGU) held its 45th Convocation on August 6, 2026 ) का नाम एकात्म मानववाद के प्रणेता, महान चिंतक एवं राष्ट्रनिष्ठ विचारक पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के नाम पर रखा गया है। उनके एकात्म मानववाद एवं अंत्योदय के सिद्धांत व्यक्ति, समाज, प्रकृति और राष्ट्र के समन्वित विकास की अवधारणा प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर अपने ज्ञान, कौशल और चरित्र का उपयोग राष्ट्र निर्माण तथा समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े वंचित एवं जरूरतमंद लोगों के उत्थान के लिए करें।
राज्यपाल जी ने कहा कि छात्रों (Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University (DDUGU) held its 45th Convocation on August 6, 2026 ) की अपेक्षा छात्राओं को अधिक उपाधियाँ एवं पदक प्राप्त हुए हैं, जो उच्च शिक्षा में बेटियों की बढ़ती भागीदारी, उनकी प्रतिभा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प का सशक्त प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह पूरे समाज के लिए गर्व का विषय है कि हमारी बेटियाँ शिक्षा, शोध, नवाचार और नेतृत्व के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ स्थापित करते हुए विकसित भारत के निर्माण की सशक्त आधारशिला बन रही हैं।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि हमें एक महत्वपूर्ण प्रश्न पर भी विचार करने के लिए प्रेरित करती है कि जब शिक्षा (Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University (DDUGU) held its 45th Convocation on August 6, 2026 ) के क्षेत्र में बेटों और बेटियों दोनों को लगभग समान अवसर उपलब्ध हैं, तो छात्रों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कम क्यों दिखाई दे रहा है। यह तुलना का नहीं, बल्कि गंभीर अध्ययन और आत्ममंथन का विषय है। हमें सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, शैक्षणिक एवं व्यवहारगत कारणों का विश्लेषण कर इस अंतर को समझना और दूर करने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।
राज्यपाल जी ने कहा कि उन्होंने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों का भ्रमण किया है। उनके अनुभव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बेटियाँ शारीरिक रूप से अपेक्षाकृत अधिक स्वस्थ दिखाई देती हैं, जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश की बेटियों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यद्यपि शारीरिक रूप से सुधार की आवश्यकता है, फिर भी यहाँ की बेटियों ने अपनी प्रतिभा, परिश्रम और उत्कृष्ट प्रदर्शन से यह सिद्ध कर दिया है कि वे मानसिक रूप से अत्यंत सशक्त हैं तथा शिक्षा प्राप्त करने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने कहा कि बेटियों को शिक्षित करने के लिए माता-पिता भी निरंतर परिश्रम कर रहे हैं। आज का दीक्षोत्सव इसका सशक्त प्रमाण है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि वे निरंतर आगे बढ़ें, स्वस्थ एवं प्रसन्न रहें तथा राष्ट्र सेवा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें।
राज्यपाल जी ने कहा कि आज के इस दीक्षोत्सव (Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University (DDUGU) held its 45th Convocation on August 6, 2026 ) में देश के प्रख्यात वैज्ञानिक, दूरदर्शी चिंतक एवं नीति-निर्माता पद्मभूषण डॉ. विजय कुमार सारस्वत जी की उपस्थिति विश्वविद्यालय परिवार एवं विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी है। डॉ. सारस्वत जी ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में चार दशकों से अधिक समय तक अपनी विशिष्ट सेवाएँ प्रदान करते हुए पृथ्वी, धनुष तथा बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है, जिससे भारत की सामरिक आत्मनिर्भरता को नई ऊँचाइयाँ मिली हैं। वर्तमान में नीति आयोग के सदस्य के रूप में वे विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार एवं विकसित भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। पद्मश्री एवं पद्मभूषण जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत उनका व्यक्तित्व ज्ञान, नवाचार, राष्ट्रसेवा एवं उत्कृष्टता का प्रेरणास्रोत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनके प्रेरक विचार उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करेंगे।
राज्यपाल जी ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि विश्वविद्यालय ने प्रवेश परीक्षाओं का सफल एवं पारदर्शी आयोजन करने के साथ-साथ अत्यंत कम समय में लगभग 80 प्रतिशत प्रवेश पूर्ण कर लिए, जो उसकी सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था, कार्यकुशलता एवं विद्यार्थी-केंद्रित दृष्टिकोण का उत्कृष्ट उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के शोध कार्यक्रमों में देश के 18 से अधिक राज्यों तथा पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त होना उसकी बढ़ती राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा, गुणवत्तापूर्ण शोध वातावरण तथा अकादमिक विश्वसनीयता का प्रमाण है। उन्होंने नए तकनीकी, इंजीनियरिंग एवं रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों के संचालन की भी सराहना की।
राज्यपाल जी ने कहा कि डिजिटल इंडिया अभियान के अनुरूप विश्वविद्यालय द्वारा केंद्रीय पुस्तकालय का आधुनिकीकरण तथा डिजिटल लाइब्रेरी का विस्तार कर विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए ज्ञान-संसाधनों को अधिक सुलभ बनाया गया है। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक पाठ्यक्रमों से जोड़ते हुए शोध एवं अध्ययन का अभिनव मॉडल विकसित किया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री उषा योजना के अंतर्गत विश्वविद्यालय परिसर में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण तथा एप्पल आई-मैक जैसी अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना की सराहना करते हुए कहा कि यह विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षण एवं अनुसंधान का वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इन सभी उपलब्धियों के लिए उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार को हार्दिक बधाई दी।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि आज विश्व भारत को केवल एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे राष्ट्र के रूप में देख रहा है जिसके युवा अपने परिश्रम से इतिहास रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल-2026 ने यह संदेश पूरी दुनिया को दिया है कि भारत को आगे बढ़ने से कोई परिस्थिति रोक नहीं सकती।
उन्होंने कहा कि भारत ने 39 पदक, जिनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत एवं 9 कांस्य पदक शामिल हैं, जीतकर विश्व में चौथा स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि इसलिए और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत केवल 122 खिलाड़ियों के छोटे दल के साथ प्रतियोगिता में उतरा था। निशानेबाजी, कुश्ती, बैडमिंटन, हॉकी तथा टेबल टेनिस जैसे परंपरागत पदक दिलाने वाले खेल इस बार प्रतियोगिता का हिस्सा भी नहीं थे। इसके बावजूद भारत ने अपनी पदक सफलता दर 31 प्रतिशत तक पहुँचा दी। उन्होंने कहा कि यह केवल आँकड़ा नहीं, बल्कि भारतीय खिलाड़ियों के आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प और अदम्य इच्छाशक्ति का प्रतीक है।
राज्यपाल जी ने कहा कि समापन समारोह (Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University (DDUGU) held its 45th Convocation on August 6, 2026 ) में भारत ने केवल तिरंगा ही नहीं लहराया, बल्कि वर्ष 2030 के ऐतिहासिक शताब्दी राष्ट्रमंडल खेलों की मेज़बानी का दायित्व भी प्राप्त किया। अब पूरी दुनिया की निगाहें अहमदाबाद पर होंगी। उन्होंने कहा कि यह केवल खेलों का आयोजन नहीं, बल्कि नए भारत की क्षमता, संस्कृति, संगठन और आत्मविश्वास का वैश्विक प्रदर्शन होगा।
उन्होंने कहा कि ग्लासगो की धरती पर भारत ने मुक्केबाजी में 10 पदक, जिनमें 7 स्वर्ण पदक शामिल हैं, जीतकर एक राष्ट्रमंडल खेल में किसी भी देश द्वारा मुक्केबाजी में सर्वाधिक स्वर्ण पदक प्राप्त करने का नया कीर्तिमान स्थापित किया। उन्होंने विशेष रूप से बेटियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय बेटियों ने 8 स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है।
Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University (DDUGU) held its 45th Convocation on August 6, 2026 : राज्यपाल जी ने कहा कि मीराबाई चानू ने लगातार तीसरे राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा है। अस्मिता डे एवं हर्ष सिंह जूडो में भारत के पहले राष्ट्रमंडल स्वर्ण पदक विजेता बने, जबकि तेजस्विन शंकर डेकाथलॉन में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। गुलवीर सिंह ने दो पदक जीतकर भारतीय एथलेटिक्स का गौरव बढ़ाया तथा नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक में वापसी करते हुए रजत पदक जीतकर एक बार फिर करोड़ों देशवासियों को गौरवान्वित किया।

राज्यपाल जी ने कहा कि राष्ट्रमंडल खेल-2026 का सबसे भावुक और प्रेरणादायक अध्याय भारत के पैरा खिलाड़ियों ने लिखा। उन्होंने कहा कि 7 पदकों के साथ भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ पैरा अभियान दर्ज किया है। यह उपलब्धि दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और अदम्य इच्छाशक्ति का प्रेरक उदाहरण है।
राज्यपाल जी ने कहा कि प्रकृति का अटल सत्य है कि जो वृक्ष अपनी जड़ों में जितनी गहराई से धँसा होता है, वह उतनी ही ऊँचाई तक आकाश को स्पर्श करता है। यही सिद्धांत व्यक्ति, समाज और राष्ट्र पर भी समान रूप से लागू होता है। जो अपनी संस्कृति, परंपरा, मूल्यों और संस्कारों से जुड़ा रहता है, वही विश्व पटल पर स्थायी सम्मान प्राप्त करता है।
उन्होंने कहा कि आज वैश्वीकरण के युग में सच्चा वैश्विक नागरिक वही है, जो अपनी मातृभाषा, संस्कृति, सभ्यता और विरासत पर गर्व करते हुए उसे पूरे विश्व के समक्ष आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करे। भारत ने सदैव वसुधैव कुटुम्बकम् का संदेश दिया है और इस संदेश की शक्ति हमारी सांस्कृतिक जड़ों से ही प्राप्त होती है।
राज्यपाल जी ने विद्यार्थियों (Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University (DDUGU) held its 45th Convocation on August 6, 2026 ) से कहा कि आज दुनिया को उनकी डिग्रियों, तकनीकी दक्षता और नवाचारों की आवश्यकता है, किंतु उससे भी अधिक आवश्यकता नैतिक मूल्यों, मानवीय संवेदनशीलता और सुदृढ़ चरित्र की है। ज्ञान तभी सार्थक होता है, जब उसके साथ चरित्र जुड़ा हो और सफलता तभी स्थायी होती है, जब उसके साथ संस्कार जुड़े हों। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी मातृभाषा पर गर्व करने, भारतीय संस्कृति का सम्मान करने, माता-पिता, गुरुजनों एवं राष्ट्र के प्रति कृतज्ञ रहने तथा अपनी सांस्कृतिक जड़ों से सदैव जुड़े रहने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि एक समय था जब भारतीय विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए विदेशों की ओर देखते थे, लेकिन आज परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं। अब पूरी दुनिया भारतीय शिक्षा व्यवस्था की ओर आशा और विश्वास के साथ देख रही है तथा भारत विश्वगुरु बनने की दिशा में निरंतर अग्रसर है।
राज्यपाल जी ने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान आईआईएम बेंगलुरु द्वारा इंडोनेशिया में अपना परिसर स्थापित करने की घोषणा की गई। इससे पूर्व आईआईएम अहमदाबाद ने दुबई में, आईआईटी दिल्ली ने अबू धाबी में तथा आईआईटी मद्रास ने जंजीबार में अपने परिसरों की स्थापना कर भारतीय शिक्षा की वैश्विक प्रतिष्ठा को नई पहचान दी है। यह भारतीय शिक्षा की गुणवत्ता और विश्वसनीयता का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि विश्व बदल रहा है, अवसर बदल रहे हैं और भारत भी तेज़ी से बदल रहा है। अब समय आ गया है कि हम केवल अपने गौरवशाली इतिहास पर ही गर्व न करें, बल्कि ऐसा भविष्य भी निर्मित करें जिस पर आने वाली पीढ़ियाँ गर्व कर सकें।
राज्यपाल जी ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी सीखने, श्रेष्ठ विचारों को स्वीकार करने तथा स्वयं को निरंतर परिष्कृत करने की क्षमता रही है। भारत ने विश्व को योग, आयुर्वेद, शून्य और दर्शन जैसे अमूल्य ज्ञान दिए हैं तथा विश्व के श्रेष्ठ विचारों को भी खुले मन से स्वीकार कर अपनी सांस्कृतिक धारा में समाहित किया है। यही कारण है कि भारतीय सभ्यता समय की प्रत्येक अग्निपरीक्षा में और अधिक सशक्त होकर उभरी है।

उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक विरासत को नई चेतना, नई ऊर्जा और नई दिशा प्राप्त हुई है। विरासत भी, विकास भी आज केवल एक नारा नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का जीवंत दर्शन बन चुका है। विकास तभी स्थायी होता है, जब उसकी नींव संस्कृति और परंपरा के सुदृढ़ आधार पर रखी जाए।
राज्यपाल जी ने कहा कि आज विश्व के विभिन्न देशों से भारत की अमूल्य पुरातात्विक धरोहरें सम्मानपूर्वक अपनी मातृभूमि लौट रही हैं। सदियों पूर्व विदेशों में पहुँची मूर्तियाँ, प्रतिमाएँ एवं अन्य सांस्कृतिक धरोहरें पुनः भारत लौट रही हैं। यह केवल कलाकृतियों की वापसी नहीं, बल्कि भारत के सांस्कृतिक स्वाभिमान और आत्मगौरव की पुनर्प्रतिष्ठा है। उन्होंने कहा कि पूर्व में इन धरोहरों की वापसी के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं हुए, जबकि पिछले 10 वर्षों में 500 से अधिक अमूल्य सांस्कृतिक धरोहरें माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रयासों से भारत वापस लाई गई हैं। उन्होंने कहा कि काशी से केदार, अयोध्या से उज्जैन तथा महाकाल से सोमनाथ तक मंदिरों, तीर्थस्थलों और आध्यात्मिक केंद्रों का समग्र विकास भारतीय संस्कृति को नई शक्ति प्रदान कर रहा है। यह केवल भवनों का निर्माण नहीं, बल्कि आस्था, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय आत्मविश्वास का पुनर्जागरण है।
राज्यपाल जी ने कहा कि जो राष्ट्र अपनी संस्कृति का सम्मान करता है, वही विश्व का सम्मान प्राप्त करता है। जिसकी स्मृतियाँ सुरक्षित रहती हैं, उसका भविष्य भी सुरक्षित रहता है। जब विरासत और विकास साथ-साथ चलते हैं, तब इतिहास गौरव बनता है, वर्तमान शक्ति बनता है और भविष्य विश्वास बन जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे आधुनिकता और विज्ञान को अपनाते हुए भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहें। प्रगति करें, लेकिन अपनी पहचान और संस्कारों को कभी न छोड़ें तथा भारत की आत्मा को सदैव अपने हृदय में जीवित रखें।
राज्यपाल जी ने कहा कि जीवन में सफलता अवश्य प्राप्त करें, लेकिन सफलता के साथ विनम्रता भी बनाए रखें। डिग्री व्यक्ति को पहचान दिलाती है, जबकि उसका चरित्र उसे सम्मान दिलाता है। ज्ञान तभी सार्थक है, जब उसके साथ संवेदनशीलता, सेवा और संस्कार जुड़े हों। उन्होंने विद्यार्थियों से ईमानदारी, निष्ठा, अनुशासन, पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा के मूल्यों के प्रति सदैव समर्पित रहने का आह्वान करते हुए कहा कि अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत उन्नति के लिए नहीं, बल्कि समाज, राष्ट्र और समस्त मानवता के कल्याण के लिए भी करें। यही एक सच्चे शिक्षित नागरिक का दायित्व है।
राज्यपाल जी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा इस वर्ष सभी उपाधियों एवं अंकतालिकाओं को डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने बताया कि अब तक 83 प्रतिशत विद्यार्थियों ने अपनी उपाधियाँ एवं अंकतालिकाएँ डिजिलॉकर से डाउनलोड कर ली हैं। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए विश्वविद्यालय परिवार को बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश के किसी अन्य विश्वविद्यालय में अभी तक इतनी अधिक संख्या में विद्यार्थियों द्वारा डिजिलॉकर से उपाधियाँ डाउनलोड नहीं की गई हैं।
राज्यपाल जी ने बताया कि आज के दीक्षोत्सव में ग्रामीण क्षेत्र के 46 विद्यार्थियों तथा शहरी क्षेत्र के 39 विद्यार्थियों को पदक प्राप्त हुए हैं। यह आँकड़ा इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाएँ निरंतर आगे बढ़ रही हैं और उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। यह परिवर्तन प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में शिक्षा की बढ़ती गुणवत्ता तथा विद्यार्थियों की मेहनत का परिणाम है।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा प्रारंभ किए गए नशा मुक्त युवा, विकसित भारत संकल्प अभियान का उल्लेख करते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि देश के युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराई से दूर रखने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया गया है। यह अत्यंत चिंता का विषय है कि इस प्रकार का अभियान चलाने की आवश्यकता पड़ी। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे संकल्प लें कि अगले एक वर्ष के भीतर स्वयं भी नशामुक्त होंगे और दूसरों को भी नशामुक्त बनाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि सभी लोग नशे के दुष्परिणाम जानते हैं, फिर भी उससे मुक्त नहीं हो पा रहे हैं। युवाओं को यह स्थिति बदलनी होगी।
राज्यपाल जी ने कहा कि प्रदेश के अधिकांश विश्वविद्यालयों के निरीक्षण के दौरान परिसर से नशे से संबंधित सामग्री प्राप्त हुई, जिसके फोटोग्राफ भी उनके पास उपलब्ध हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि उन्हें किसी नशे का संकल्प लेना है, तो वह केवल विकसित भारत के निर्माण का नशा होना चाहिए। युवाओं का लक्ष्य केवल अपने जीवन में सफल होना नहीं, बल्कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में सक्रिय योगदान देना होना चाहिए।
राज्यपाल जी ने बताया कि उन्होंने सभी राज्य विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि जिन पाँच गाँवों को विश्वविद्यालयों ने गोद लिया है, उन्हें नशामुक्त बनाने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाए। इस अभियान की शुरुआत प्रत्येक व्यक्ति स्वयं से और अपने परिवार से करे। जब परिवार नशामुक्त होंगे, तभी समाज और गाँव भी नशामुक्त बन सकेंगे। उन्होंने कहा कि बच्चे अपने परिवार से ही संस्कार एवं व्यवहार सीखते हैं। यदि परिवार का वातावरण नशामुक्त होगा तो आने वाली पीढ़ी भी स्वस्थ, संस्कारित और जागरूक बनेगी। इसलिए समाज के उज्ज्वल भविष्य और बच्चों के बेहतर जीवन के लिए नशामुक्त वातावरण का निर्माण अत्यंत आवश्यक है।
विश्वविद्यालय परिसर के निरीक्षण के दौरान जन भवन की टीम द्वारा छात्रावासों, शैक्षणिक भवनों, विभागों एवं अन्य सुविधाओं का जायजा लिया। निरीक्षण में भोजन व्यवस्था, स्वच्छता, वाई-फाई, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, खेल मैदान, सड़कों, अग्नि सुरक्षा तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं से संबंधित विभिन्न कमियाँ पाई गईं। राज्यपाल जी ने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने, परिसर की सभी कमियों को दूर करने तथा निर्माण एवं मरम्मत कार्यों को निर्धारित समय में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की संयुक्त समिति गठित कर पूरे परिसर की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने तथा चिन्हित सभी कमियों को तीन माह के भीतर दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधूरे निर्माण कार्यों की समीक्षा के लिए बैठक आयोजित की जाएगी तथा तीन माह बाद पुनः प्रगति की समीक्षा की जाएगी। राज्यपाल जी ने संबद्ध महाविद्यालयों की कार्यप्रणाली पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कई एडेड कॉलेज विद्यार्थियों से परीक्षा शुल्क तो ले लेते हैं, लेकिन समय पर विश्वविद्यालय में जमा नहीं करते। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी महाविद्यालयों के विद्यार्थियों की परीक्षा फीस सीधे विश्वविद्यालय के खाते में जमा कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

राज्यपाल जी ने कहा कि (Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University (DDUGU) held its 45th Convocation on August 6, 2026 ) एडेड महाविद्यालयों का संचालन पूरी जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। यदि कोई संस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालन नहीं कर सकती, तो उसे सरकार को वापस कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुजरात में भी उन्होंने इसी प्रकार का निर्णय लागू कराया था। हमारा उद्देश्य कम शुल्क में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना तथा जनसहयोग के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है, जिससे सरकार पर अनावश्यक वित्तीय भार भी कम हो।
उन्होंने बताया कि उन्होंने जन भवन में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों से संबद्ध महाविद्यालयों की समीक्षा बैठक की है, जिसमें पाया गया कि अनेक संस्थान अपेक्षित दायित्वों का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी महाविद्यालयों में कई स्थानों पर विद्यार्थियों की संख्या कम तथा शिक्षकों की संख्या अधिक है। इस संबंध में उन्होंने शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए नीति बनाने के निर्देश भी दिए।
