नई दिल्ली, 30 जुलाई , नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के त्यागपत्र के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी कॉकरोच जनता पार्टी ( Cockroach Janata Party Protest) का आंदोलन भ्रम, भय और असमंजस की स्थिति में पहुँच गया लगता है . केंद्र सरकार द्वारा सभी मांगे मान लेने के बाद उनके पास आंदोलन खत्म करने के अलावा कोई चारा नहीं था और उन्होंने आंदोलन खत्म भी किया , लेकिन इस कॉकरोच जनता पार्टी ( Cockroach Janata Party Protest) के समर्थन में उतरे विपक्ष के कई नेता अब उसे पुनः आंदोलन के लिए उत्साहित रहे हैं ,
आंदोलन खत्म करने की घोषणा के दो दिन बाद से ही कॉकरोच जनता पार्टी ( Cockroach Janata Party Protest) के नेतृत्व से अब तरह-तरह की धमकियां मिलने लगी है कि वह आंदोलन फिर से शुरू कर सकते हैं, सड़क पर फिर से उतर सकते हैं और उनका तर्क यह है कि केंद्र सरकार के प्रतिनिधिमंडल में शामिल केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉक्टर जितेंद्र सिंह द्वारा दिए गए आश्वासन को पूरा नहीं किया जा रहा है. कॉकरोच जनता पार्टी ( Cockroach Janata Party) प्रवक्ता सौरव दास के अनुसार दोनों मंत्रियों ने उनसे वादा किया था कि आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ किसी भी प्रकार की पुलिस कार्यवाही नहीं होगी अगर हुई है तो उसे तत्काल वापस किया जाएगा और इसके लिए अंतिम तारीख 28 जुलाई निर्धारित की गई थी लेकिन सौरव दास के अनुसार असम, बिहार सहित कई राज्यों में आंदोलन में शामिल छात्रों और लोगों के खिलाफ न केवल एफआईआर दर्ज हो रही है बल्कि उन्हें चिन्हित किया जा रहा है उनकी गिरफ्तारियां तक हो रही है .
सामान्य सी बात यह है कि अगर इस आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो यह मिसाल बन जाएगी और जंतर मंतर एक लोकतांत्रिक आवाज उठाने का स्थान नहीं बल्कि गुंडागर्दी और अराजकता और देश को अपमानित करने वाले केंद्र के रूप में चिन्हित होगा . सौरव दास का यह तर्क अपनी जगह सही है कि उनके आंदोलन को सफल बनाने के लिए युवाओं , छात्रों ने अपना समर्थन दिया. नेताओं ने वहां पहुंचकर उनका उत्साह बढ़ाया लेकिन अब ऐसे ही नेता उसे आंदोलन के लिए बार-बार प्रेरित कर रहे हैं .
कॉकरोच जनता पार्टी की आड़ में बचना चाह रहे उपद्रवी
यह आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि आने वाले दिनों में आंदोलन शुरू हो सकता है. ऐसे में अब कॉकरोच जनता पार्टी ( Cockroach Janata Party) भ्रम की स्थिति में है कि उसे आंदोलन शुरू करना चाहिए या नहीं ? एक तरफ तो कॉकरोच जनता पार्टी ( Cockroach Janata Party ) पर उन युवाओं का दबाव है, जिन्होंने समर्थन दिया लेकिन कुछ युवाओं ने फैलाई और अब कॉकरोच जनता पार्टी की आड़ में खुद बचने की कोशिश कर रहे हैं और सरकार उन्हें पकड़ने के लिए पुलिसिया कार्रवाई कर रही है. दूसरा इस आंदोलन में अपना भविष्य तलाशने वाले विपक्षी दल भी जैसे तैसे आंदोलन को फिर से खड़ा करने की कोशिश में है . उनका प्रयास यह है कि लोकसभा 2029 के चुनाव तक यह माहौल बना रहे. इसके लिए जरूरी है कि छात्र सड़क पर उतरें. इसलिए 29 जुलाई को दिल्ली का घटनाक्रम देखाना होगा जिसमें विपक्षी नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस भारतीय जनता पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस दोनों एक दूसरे के उलट है, यही नहीं कुछ युवा धरना देने भी पहुँच गए ,
भाजपा कांग्रेस एक दूसरे पर लगा रहे आरोप
भारतीय जनता पार्टी जहां आरोप लगा रही है कि राहुल गांधी लोकसभा में निर्धारित मान्यताओं का उल्लंघन करते हुए अपना भाषण जारी रखना चाहते थे , तो वही राहुल गांधी का आरोप है कि भाजपा उन्हें बोलने नहीं देना चाहती है और अध्यक्ष पर भी उन्होंने भेदभाव करने के आरोप लगाए हैं . स्थिति ऐसी बन रही है कि एक ओर कॉकरोच जनता पार्टी ( Cockroach Janata Party) जहां विपक्ष के साथ आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर है, वहीं केंद्र सरकार छात्रों- युवाओं से जुड़े मुद्दे पर संवेदनशील है . शिक्षा मंत्री के त्यागपत्र के साथ ही उन्होंने पेपर लीक से जुड़े संशोधन बिल को भी लोकसभा में पारित कराने में सफलता पा ली है जिसमें नकल या पेपर लीक कराने वालों के खिलाफ अधिक कठोरता से कार्रवाई हो सके . साथ ही फास्ट ट्रैक कौर्ट बनाकर जल्दी से जल्दी फैसला सुनाने का भी आधार बनाया दिया है,
विपक्ष को रास नहीं आ रहे फैसले
इसलिए केंद्र सरकार अपने स्तर से सभी प्रयास कर रही है लेकिन यह प्रयास विपक्ष को रास नहीं आ रहे हैं , इसलिए विपक्ष का एक भी सदस्य भारतीय एनडीए की सरकार द्वारा उठाए गए फैसलों से सहमत नहीं है बल्कि वह तो दूसरे शिक्षा मंत्री के खिलाफ भी आंदोलन शुरू करके उनके खिलाफ टिप्पणियां कर रहा है और संशोधन बिल को लेकर के तर्क दे रहा है कि 2024 में जब यह बना था 2026 तक कुछ नहीं कर पाया तो अब इस बिल के संशोधित होने से भी पेपर लीक रुकने वाला नहीं है,
