- सीटू ने राज्य सरकार द्वारा जारी न्यूनतम वेतन अधिसूचना को अस्वीकार किया है कहा है कि न्यूनतम वेतन रू 26 हजार से कम नहीं होना चाहिए, राज्य सरकार की पूरी प्रक्रिया मजदूरों के साथ धोखा है।
लखनऊ, 21 अप्रैल। सेण्टर आफ इण्डियन ट्रेड यूनियन उत्तर प्रदेश राज्य कमेटी प्रदेश सरकार द्वारा 17 अर्प्रल 2026 को न्यूनतम वेतन के सम्बन्ध में जारी अधिसूचना को अस्वीकार करती है और सरकार में माॅग करती है कि उत्तर प्रदेश में न्यूनतम वेतन रू0 26,000 से कम नहीं होना चाहिए। सीटू ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना मजदूरों के साथ धोखा है।
अधिसूचना द्वारा उत्तर प्रदेश में तीन तरह का वेतन तय किया गया है।
प्रथम श्रेणी में गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद जिले के लिये अकुशल रू0 13690, अर्धकुशल रू0 15059, कुशल रू016868 द्वितीय श्रेणी में नगर निगम में आने वाले जिलों के लिये (गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद को छोड़कर) अकुशल रू0 13006 अर्धकुशल रू0 14306 तथा कुशल रू0 16025, तथा तृतीय श्रेणी में प्रदेश के शेष जिलों ( प्रथम व द्वितीय श्रेणी के जिलो को छोड़कर )ं के लिये अकुशल रू0 12356 अर्धकुशल रू0 13590 कुशल रू0 15224 । यह वेतन 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। यह उचित वैधानिक प्रक्रिया का पालन किये बगैर एकतरफा तरह से की गई है।
इस अधिसूचना में दावा किया गया है कि यह एक उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों पर आधारित है। उच्च स्तरीय समिति का यह दावा कि प्रस्तावियत वेतन मजदूरों के प्रतिनिधियों के साथ परामर्श पर आधारित है ,पूरी तरह से दिखावा है। क्योंकि किसी भी केन्द्रीय श्रम संगठन के प्रतिनिधि या आन्दोलनरत श्रमिकों के प्रतिनिघियों के साथ ऐसा कोई परामर्श नहीं किया गया । इसके आलावा उच्च स्तरीय समिति का गठन स्वयं ृ13 अप्रैल 2026 को किया गया था। और तथा कथित दावा किया गया है कि इसमें पाॅच श्रमिक प्रतिनिधियों और तीन सेवायोजक प्रतिनिधियों को शामिल किया गया था। लेकिन इन श्रमिक और सेवायोजक प्रतिनिधियों का विवरण न तो आम जनता को पता है और न ही श्रमिकों को।
न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 के तहत यह अनिवार्य है कि धारा 7 के अन्र्तगत एक त्रिपक्षीय ‘राज्य न्यूनतम वेतन सलााहकार बोर्ड’ का गठन किया जाय तथा धरा 5 (1) (ं ) के अन्र्तगत एक विशिष्ट त्रिपक्षीय समिति का गठन किया जाय, जिसमें उत्तर प्रदेश के सभी 87 अनुसूचित रोजगारों के लिये एक समान न्यूनतम वेतन तय करने हेतु सभी पक्षों को समान प्रतिनिधित्व प्राप्त हो अथवा धारा (1) ( इ ) के अन्र्तगत प्रत्येक अनुसूचित रोजगार के लिये अलग अलग समितियाॅ गठित की जाय। लेकिन इस प्रक्रिया में इन दोनों मे से किसी भी कानूनी प्रावधान का पालन नहीं किया गया, क्योंकि जब से राज्य में भाजपा सरकार सत्ता में आई है, तब से राज्य न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड का कठन ही नहीं किया गया है।
नतीजतन, पिछले 10 वर्षों से न्यूनतम वेतन में बिल्कुल भी संशोधन नहीं किया गया है। जबकि कानून के अनुसार पाॅच साल में एक बार वेतन संशोधित किया जाना अनिवार्य है। अधिसूचना में ‘कोड आन वेजेस 2019 के लागू होने का दावा , राज्य सरकार को न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 को दर किनार करके न्यूनतम वेतन तय करने का अधिकार नहीं देता है। जब तक कि इस संहिता के तहत नियम बनाकर राज्य में अधिसूचित न कर दिया जाय। उत्तर प्रदेेश औद्योगि विवाद अधिनियम 1947 की धारा 19 की आड़ लेकर जारी की गई यह न्यूनतम वेतन अधिसूचना, नियोक्ताओं को खुश करने और श्रमिकों को उनके कानूनी अधिकार – यानि समय संशोधित होने वाले अनिवार्य न्यूनतम वेतन – सं वंचित करने के उद्देश्य से की गई है। यदि कानून के अनुसार न्यूनतम वेतन में नियमित रूप से संशोधन किया गया होता , तो अब तक केन्द्रीय श्रम संगठनों की रू0 26000 की माॅग पूरी हो चुकी होती ।
उक्त अधिनियम न केवल ‘न्यूनतम वेतन अधिनियम’का उल्लंघन करती है , बल्कि आवश्यक वस्तुओं की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण जीवन-यापन की बढ़ती लागत को भी इसमें कोई स्थान नहीं दिया गया है। कानूनी न्यूनतम वेतन का निर्धारण 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन मे बनी आम सहमति और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के ‘रैप्टाकोस फैसले’ के आधार पर किया जाना चाहिए। लेकिन वर्तमान अधिसूचना इन सभी बातों की अनदेखी करते हुये, एकतरफा और अवैज्ञानिक ढंग से बेहद कम न्यूनतम वेतन तय किया है, जो श्रमिकों को स्वीकार्य नहीं है।
सीटू उत्तर प्रदेश राज्य कमेटी इस अधिसूचित न्यूनतम वेतन को पूरी तरह से खारिज करता है और मजदूरों से भी इसे पूरी तरह खारिज करने की अपील करता है। साथ ही संगठन माॅग करता है कि धारा 7 के तहत तत्काल ‘राज्य न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड’ का गठन किया जाय। धारा 5 (1) (ं ं) के तहत समिति बनाई जाय और कानूनी प्राविधानों के अनुरूप वैज्ञानिक तरीके से राज्य स्तरीय न्यूनतम वेतन निर्धारित किया जाय। उक्त जानकारी सीटू के प्रदेश अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह और महामंत्री प्रेम नाथ राय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में दी है।
