रायपुर . छत्तीसगढ़ प्रधान पाठक कल्याण संघ के पूर्व प्रांत अध्यक्ष , वर्तमान संघ के संरक्षक सी के महिलांगे ने आज कहा है कि प्रदेश में जब से एक प्रांगण मे संचालित शालाओं को मर्ज ( Chhattisgarh merged schools ) किया गया है, तब से लेकर अब तक कोई भी राशि नहीं मिलने के कारण शाला भवन जर्जर होते जा रहा है . कोई मेंटनेंस राशि जारी नहीं होने के कारण अच्छा भवन भी टूट फूट रहा है. इस बार के बारिश में और खराब स्थिति में आ गया है . लिपाई पुताई के अभाव, मरम्मत का अभाव से स्कूल भवन स्कूल जैसा नहीं लग रहा है और भवन में कई दरार दिखना शुरू हो गया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षक आवश्यक उपयोगी सामान नहीं ले पा रहे हैं. कुर्सी टेबल टुट रहा है . वृक्षों का सुरक्षा नहीं करा पा रहे हैं मरम्मत कार्य सब बंद पड़ा है। उन्होंने चिंता जताई और कहा कि मर्ज शाला तो हो गया है फिर भी सभी कार्य पूर्ववत जैसा चल रहा था , वैसा ही चल रहा है . आनलाइन छात्रवृत्ति, प्रशस्त यू डाईस अपार आदि। उन्होंने कहा कि नियमानुसार मर्ज शाला में कार्य संपादित होना चाहिए . सभी जिम्मेदारी प्राचार्य को दिया गया है तब सभी कार्य उनके आदेश निर्देश से होना चाहिए और मर्ज हुए शालाओं का समस्त आवश्यक सामग्री लिपाई पुताई रजिस्टर, कुर्सी टेबल कागज चार्ट आदि सब की व्यवस्था करना चाहिए पर ऐसा नहीं हो रहा है और मर्ज हुए शालाओं के प्रधान पाठक दो साल से स्वयं का राशि लगा रहे हैं। बड़े काम हो नहीं पा रहे, जिससे शालाओं की स्थिति बहुत खराब होते जा रही है। शाला अनुदान मरम्मत की राशि आवंटन जल्द से जल्द जारी करना चाहिए जिससे कुछ सुधार कार्य कराया जा सके। यही हाल रहा तो पढ़ाई लिखाई भी बाधित हो सकता है। क्योंकि साफ सफाई रंग रोदन से ही स्कूल हो या घर अच्छा लगता है।
छत्तीसगढ़ प्रधान पाठक कल्याण संघ के पूर्व प्रांत अध्यक्ष सी के महिलांगे ने छत्तीसगढ़ शासन से और शिक्षा विभाग से मांग की है कि मर्ज हुए प्राथमिक और मिडिल स्कूलों को अलग से शाला अनुदान भवन मरम्मत आदि की राशि पूर्व की भांति शासन के द्वारा जारी किया जाए जिससे शाला भवन की लिपाई पुताई रखरखाव और स्कूलों में चाक और कागज स्टेशनरी सामग्री अन्य सामग्री खरीदा जा सके. वर्तमान समय में प्रधान पाठक अपने जेब से राशि खर्च कर रहे हैं . उन्हें अपने वेतन से स्टेशनरी और अन्य सामग्री खरीदना पड़ रहा है, जो एक गंभीर विषय है . इस पर छत्तीसगढ़ शासन और शिक्षा विभाग को विशेष ध्यान देने की जरूरत है.
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