रायपुर | छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग अंतर्गत नारायणपुर जिले की ग्रामीण महिलाओं ने अपनी मेहनत और इच्छाशक्ति से सफलता की एक नई इबारत लिखी है। जिला प्रशासन के विशेष प्रयासों से यहां की ग्रामीण महिलाएं अब रेशम कीट पालन, मल्बरी ककून उत्पादन के जरिए आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन रही हैं। शासकीय रेशम केंद्र में संचालित इस पहल से महिला स्व-सहायता समूहों की न केवल आमदनी बढ़ी है, बल्कि उनके जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव आया है।
1,775 कृमि अंडों से मिला 733 किलो से अधिक ककून
वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान शासकीय रेशम केंद्र में मल्बरी (शहतूत) कृमिपालन योजना के तहत महिला स्व-सहायता समूह की 12 महिलाओं ने सक्रिय रूप से यह कार्य संभाला है। इस अवधि में कुल 1,775 कृमि अंडों के बैच का पालन किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 733.495 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाले मल्बरी ककून का बंपर उत्पादन हुआ। उत्पादित ककून के विक्रय से समूह को 2 लाख 12 हजार 713 रुपये की ठोस आमदनी प्राप्त हुई है। इतनी बड़ी अतिरिक्त आय मिलने से समूह की महिलाओं के परिवारों की आर्थिक स्थिति खासी मजबूत हुई है।

वर्षभर रोजगार और आगे की तैयारी
रेशम केंद्र में महिलाओं को सिर्फ ककून उत्पादन तक ही सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उन्हें केंद्र के संधारण और कृषि कार्यों (जैसे निंदाई-गुड़ाई) में भी जोड़ा गया है। इससे महिलाओं को वर्षभर नियमित रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। रेशम विभाग की आगामी कार्ययोजना के तहत जनवरी-फरवरी 2027 में भी मल्बरी ककून उत्पादन का अगला चरण प्रस्तावित है, जिससे महिलाओं को भविष्य में भी निरंतर आर्थिक लाभ मिलता रहेगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की मिसाल
यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण और मजबूत स्थानीय अर्थव्यवस्था का बेहतरीन उदाहरण बन रही है। विभागीय सहयोग और महिलाओं की सामूहिक भागीदारी यह साबित कर रही है कि ग्रामीण अंचल में भी संसाधनों का सही उपयोग कर स्वरोजगार के बेहतरीन विकल्प खड़े किए जा सकते हैं, जिससे महिलाओं को पलायन या अन्य जगहों पर निर्भर रहने की आवश्यकता न पड़े।
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