

- बालिका विद्यालय में भारत विकास परिषद् के सौजन्य से गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस के अवसर पर विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन
लखनऊ, 24 नवम्बर , सिख इतिहास ही नहीं, भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत में भी गुरु तेग बहादुर जी का स्थान अद्वितीय है। उनका जीवन त्याग, निडरता, मानवाधिकारों की रक्षा और सत्य की स्थापना के लिए समर्पित रहा। प्रत्येक वर्ष आयोजित होने वाला गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस हमें उनके सर्वोच्च बलिदान और धर्म–निरपेक्ष मूल्यों की याद दिलाता है। गुरु तेग बहादुर जी सिखों के नौवें गुरु थे। उनका जीवन संदेश देता है कि किसी भी प्रकार का अत्याचार, चाहे वह धर्म के नाम पर हो या सत्ता के, उसका डटकर विरोध करना चाहिए। गुरु तेग बहादुर जी का व्यक्तित्व अत्यंत संतुलित और शांत था।
Guru Tegh Bahadur Shaheedi Diwas: वे आत्मचिंतन, ध्यान और निःस्वार्थ सेवा को जीवन का आधार मानते थे। उन्होंने समाज में नैतिक मूल्यों, मानवता और समानता को स्थापित करने का प्रयास किया। उनका उपदेश था कि सच्चा मनुष्य वही है जो दूसरों के दुख को अपना समझे। 17वीं शताब्दी में जब कश्मीरी पंडितों को जबरन धर्मांतरण का सामना करना पड़ा, तब वे सहायता के लिए गुरु तेग बहादुर जी के पास आए। गुरु जी ने बिना हिचक धर्म की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए आगे कदम बढ़ाया।
उन्होंने औरंगज़ेब के आदेशों के विरुद्ध आवाज़ उठाई और अंततः दिल्ली के चांदनी चौक में 1675 में शहीद हो गए। इस बलिदान ने यह सिद्ध किया कि धर्म कोई भी हो—उसे मानने की स्वतंत्रता हर व्यक्ति का अधिकार है। गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान केवल सिख समुदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा है। उन्होंने सिखाया कि सत्य और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए कठिन से कठिन संघर्ष करना चाहिए। स्पष्टवादिता और मानवाधिकारों के लिए खड़े होने में जीवन का बलिदान भी छोटा है। धर्म मानवता से बड़ा नहीं; बल्कि मानवता ही सच्चा धर्म है। आज जब दुनिया कई सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है, गुरु तेग बहादुर जी का आदर्श और प्रदत्त शिक्षा और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती हैं। उनका जीवन हमें सहनशीलता, धर्मनिरपेक्षता, मानवीय मूल्य, और निडरता का मार्ग दिखाता है। गुरु तेग बहादुर जी का शहीदी दिवस केवल एक ऐतिहासिक घटना का स्मरण नहीं है, बल्कि यह हमें अपने समाज में स्वतंत्रता, भाईचारे और मानवाधिकारों की रक्षा का संकल्प लेने का अवसर देता है। उनका बलिदान आने वाली अनगिनत पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

बालिका विद्यालय इंटरमीडिएट कॉलेज मोतीनगर लखनऊ ( Balika Vidyalaya Inter College lucknow) में आज गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस के अवसर पर भारत विकास परिषद महिला शाखा चौक लखनऊ द्वारा विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। भारत विकास परिषद महिला शाखा चौक से शाखा गतिविधि संयोजिका ‘संस्कार’, संगीता अग्रवाल, भारत विकास परिषद की सदस्य मीना अग्रवाल और संगीता चौरसिया उपस्थित थीं। राज्य सरकार द्वारा 25 नवम्बर को सार्वजानिक अवकाश घोषित करने के कारण पूर्व संध्या पर बालिका विद्यालय इंटरमीडिएट कॉलेज में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर स्लोगन, पोस्टर और निबंध प्रतियोगिताओं का आयोजन पूनम यादव, उत्तरा सिंह, माधवी सिंह एवं प्रतिभा रानी के निर्देशन में हुआ। छात्राओं ने गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, मूल्यों और आदर्शों को आधार बनाकर स्लोगन, पोस्टर बनाए, निबंध लिखे और अपने विचार व्यक्त किए। माधवी सिंह ने भी उनके जीवन एवं आदर्शों के विषय में छात्राओं को विस्तार से बताया।

पोस्टर प्रतियोगिता में काजल तिवारी, अनुराधा, रिया और सफ़ीना बानो, स्लोगन प्रतियोगिता में शालिनी पाल, मानसी, अफरोज अंसारी और शिल्पी तथा निबंध प्रतियोगिता में सृष्टि सिंह, आराधना निषाद, सलोनी और दुर्गा विजयी रहीं। इन सभी को पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के आयोजन में उमा रानी यादव, अनीता श्रीवास्तव, रागिनी यादव और मीनाक्षी गौतम उपस्थित रहीं और सभी ने छात्राओं का उत्साहवर्धन किया।
