- बालिका विद्यालय में रक्षाबंधन के अवसर पर विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन
लखनऊ . बालिका विद्यालय इंटरमीडिएट कॉलेज, मोती नगर, लखनऊ ( Balika Vidyalaya Inter College in Moti Nagar,Lucknow ) में छात्राओं में भारतीय पर्व-परंपराओं, पारिवारिक एवं सामाजिक मूल्यों, सृजनात्मकता तथा पारस्परिक स्नेह की भावना विकसित करने के उद्देश्य से समय-समय पर विभिन्न सांस्कृतिक एवं रचनात्मक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में पवित्र रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर विद्यालय में मेहंदी एवं राखी निर्माण प्रतियोगिताओं का आयोजन उत्साह और उल्लास के साथ किया गया।
कार्यक्रम का निर्देशन शिक्षिका रागिनी यादव ने किया। रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है जो भाई-बहन के स्नेह, विश्वास, आत्मीयता और पारस्परिक उत्तरदायित्व की भावना को अभिव्यक्त करता है। विद्यालय में आयोजित इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्राओं को इस पर्व के सांस्कृतिक एवं भावनात्मक पक्ष से जोड़ने के साथ-साथ उनकी रचनात्मक प्रतिभा को अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान किया गया। प्रतियोगिताओं में छात्राओं ने अत्यंत उत्साह के साथ प्रतिभाग किया और अपनी कलात्मक दक्षता, कल्पनाशीलता तथा सौंदर्यबोध का परिचय दिया। मेहंदी प्रतियोगिता में छात्राओं ने अपनी शिक्षिकाओं एवं सहपाठी छात्राओं के हाथों पर आकर्षक और कलात्मक मेहंदी डिजाइनों का अंकन किया। पारंपरिक बेल-बूटों, पुष्पाकृतियों, ज्यामितीय संरचनाओं तथा अन्य मनोहारी पैटर्न के माध्यम से छात्राओं ने अपनी सृजनात्मक क्षमता का परिचय दिया।
मेहंदी के बारीक और सुंदर डिजाइनों में छात्राओं की एकाग्रता, धैर्य और कलात्मक अभिरुचि स्पष्ट दिखाई दी। मेहंदी प्रतियोगिता के जूनियर वर्ग में कक्षा 8 की वैष्णवी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि कक्षा 6 की माही द्वितीय तथा कक्षा 8 की अर्चना तृतीय स्थान पर रहीं। सीनियर वर्ग में कक्षा 12 की युशरा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, कहकशां ने द्वितीय तथा कक्षा 10 की दिव्यांशी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। राखी निर्माण प्रतियोगिता में भी छात्राओं ने अपनी कल्पनाशीलता और हस्तकौशल का सुंदर परिचय दिया। छात्राओं ने भाइयों की कलाइयों पर सजाने के लिए रंग-बिरंगी, आकर्षक एवं कलात्मक राखियां तैयार कीं। विशेष रूप से छात्राओं द्वारा निर्मित कुछ राखियां पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से तैयार की गईं जिससे रचनात्मकता के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी सामने आया। पारंपरिक धागों, सजावटी सामग्री और प्राकृतिक तथा पुनः उपयोग योग्य वस्तुओं के प्रयोग से तैयार की गई राखियों ने प्रतियोगिता को विशेष आकर्षण प्रदान किया।
राखी निर्माण प्रतियोगिता के जूनियर वर्ग में कक्षा 8 की अर्चना ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, कक्षा 7 की आयुषी शुक्ला द्वितीय तथा कक्षा 8 की अलीशा तृतीय स्थान पर रहीं। सीनियर वर्ग में कक्षा 12 की दुर्गा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया जबकि कक्षा 11 की शुभी द्वितीय तथा कक्षा 12 की आराधना निषाद तृतीय स्थान पर रहीं। दोनों प्रतियोगिताओं का मूल्यांकन सीमा आलोक वार्ष्णेय एवं अनीता श्रीवास्तव ने किया। निर्णायकों ने छात्राओं की कलात्मक अभिव्यक्ति, मौलिकता, सृजनात्मकता, सौंदर्यबोध, विषयानुकूलता तथा प्रस्तुति की गुणवत्ता के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया। उन्होंने छात्राओं की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों में छिपी रचनात्मक क्षमताओं को सामने लाने के साथ-साथ उनमें धैर्य, एकाग्रता और आत्मविश्वास का विकास करती हैं। विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ. लीना मिश्र ने कहा कि भारतीय पर्व केवल धार्मिक अथवा पारंपरिक अनुष्ठान नहीं हैं, उनमें जीवन-मूल्यों और मानवीय संबंधों की गहरी संवेदना निहित है। रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का पर्व होने के साथ-साथ परिवार एवं समाज में पारस्परिक सम्मान, सहयोग और उत्तरदायित्व की भावना को भी सुदृढ़ करता है।
विद्यालय में इस प्रकार के आयोजनों का उद्देश्य छात्राओं को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ते हुए उनकी रचनात्मक प्रतिभा को उचित मंच प्रदान करना है। उन्होंने पर्यावरण-अनुकूल राखियों के निर्माण को विशेष रूप से सराहनीय बताते हुए कहा कि परंपरा और पर्यावरण-संरक्षण का यह समन्वय वर्तमान समय में अत्यंत आवश्यक है। प्रतियोगिताओं में विजयी छात्राओं को पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित छात्राओं को खाद्य सामग्री का वितरण भी किया गया। छात्राओं ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की और रक्षाबंधन के अवसर पर विद्यालय परिसर में स्नेह, सृजन और सांस्कृतिक चेतना का सुंदर वातावरण निर्मित हुआ। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि पर्व-त्योहारों की सार्थकता तभी अधिक गहरी होती है जब वे नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ मानवीय मूल्यों, रचनात्मकता, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का संस्कार भी प्रदान करें। बालिका विद्यालय का यह आयोजन इसी सांस्कृतिक एवं शैक्षिक दृष्टि को सार्थक करने की दिशा में एक सुंदर प्रयास रहा।

