बिलासपुर . छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा एक ही परिसर में संचालित कई शालाओं को आपस में विलय करने के बाद स्थितियों में सुधार नहीं हो पा रहा है . इनमें सबसे बड़ी समस्या प्रतिवर्ष मिलने वाले सालाना अनुदान समय से न मिलने की है . इस राशि से विद्यालय में आवश्यक अध्यापन सामग्री सहित विभिन्न प्रकार के कार्य किए जाते थे और यह कार्य बेहद जरूरी व महत्व पूर्ण होते थे लेकिन लम्बे समय से शाला अनुदान न मिलने के कारण स्थिति बिगड़ती जा रही है .
बिलासपुर के एक शासकीय प्राथमिक शाला के शिक्षक ने बताया कि उन्हें 2 साल से शाला अनुदान नहीं मिला है और यह जरूरी कार्य कैसे करें उनकी समझ में नहीं आ रहा है ? वरिष्ठ अधिकारियों से कई बार मार्गदर्शन भी मांगा गया है और शिकायतें भी की गई हैं लेकिन अभी तक समाधान नहीं निकला है. उन्होंने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है कि मर्ज करने के बाद विद्यालयों के सामने उत्पन्न परिस्थितियों का अध्ययन करें समस्याओं को देखें सुने और उन्हें दूर करने की पहल करें तभी हम शैक्षिक गुणवत्ता की ओर आगे बढ़ सकते हैं
मर्ज शालाओं को समग्र शिक्षा से शाला अनुदान की राशि नहीं मिलने के कारण शाला संचालन करने में दिक्कतो का सामना करना पड़ रहा है। विगत वर्ष एक ही केम्पस में संचालित सभी शालाओं को मर्ज कर दिया गया अब प्राचार्य हाई, हायर सेकंडरी स्कूल के द्वारा सभी मर्ज स्कूल संचालित हो रही है। स्कूलों को मिलने वाला राशि शाला अनुदान, मरम्मत आदि का राशि समय से नहीं आ रहा है जिससे प्रधान पाठकों को बहुत कठिनाई हो रही है आवश्यक अध्यापन सामाग्री विभिन्न कार्यक्रम के लिए राशि रंग रोगन प्रिंट रिच लाइट, शौचालय स्वछता आदि के लिए राशि की आवश्यकता होती है शिक्षक अपने पाकेट से पैसा लगा रहे हैं कई शिक्षक उधारी सामान लेकर शाला संचालित कर रहे हैं।
जिस स्कूल में मर्ज हुआ है उन शालाओं में राशि आया है और जो मर्ज हुए हैं वो स्कूल के दर्ज के अनुसार राशि नहीं आया है जोकि बहुत ही अन्याय पूर्ण हैं। मिडिल प्राथमिक शाला के दर्ज के अनुसार राशि प्राचार्य के समग्र शिक्षा के खाते में जमा करना था और प्राचार्य दर्ज के अनुसार सभी स्कूलों को राशि आहरण करते या स्वयं आवश्यकता अनुसार स्कूलों में खर्च करते।
