लखनऊ | समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 12 दिसंबर को अयोध्या में रामलला के दर्शन करेंगे | इस घोषणा के बाद में न केवल राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी ने करारा हमला भी बोला है| यह हमला खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज अयोध्या में दीपोत्सव के अवसर पर आयोजित समारोह में बोला | उन्होंने कहा कि वे अयोध्या आ सकते हैं , लेकिन अयोध्या को रक्त रंजित करने वालों को माफी मांगनी चाहिए |
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सीएम योगी ने क्या दी प्रतिक्रया
मुख्यमंत्री योगी के अलावा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी कुछ ऐसे ही तीखे शब्दों में अखिलेश यादव पर हमला बोला है, लेकिन सब सियासी आरोप प्रत्यारोप के बीच यह समझना थोड़ा मुश्किल होगा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव आखिर विधानसभा चुनाव के तीन माह पहले रामलाल के दर्शन करने के लिए क्यों जाना चाह रहे हैं ?
खास कर जब हाल ही में समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक और फैजाबाद के नेता पवन पांडेय के यहां आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे लेकिन तब उन्होंने राम लला के दर्शन नहीं किए थे | महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी जिस प्रकार से अखिलेश यादव पर सनातन विरोधी होने का ठप्पा लगाकर अपने वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश में है | अब अखिलेश यादव भी इस रणनीति के तहत भाजपा को मान देने के लिए यही रणनीति अपनाई है |
सब जानते हैं कि समाजवादी पार्टी शुरू से ही एक विशेष वोट बैंक को लेकर सतर्क रही है और ऐसे बयानों से दूर रहती है, जिससे उसके बैंक वोट बैंक खिसकने का खतरा हो , लेकिन जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टीअखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी को सनातन विरोधी बताने पर उतारू है , अब समाजवादी पार्टी की राजनीतिक मजबूरी है कि वह खुलकर भाजपा के आरोपों का जवाब दें और खुद को सनातन विरोधी होने आरोपों से बचाए|
अगले साल हो रहें विधानसभा चुनाव
शायद यही बड़ा कारण है कि अब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने खुद अयोध्या जाने का फैसला किया है | वह 12 दिसंबर को खुद सांसद पत्नी डिंपल यादव के साथ अयोध्या के राम लला के दर्शन करेंगे | महत्वपूर्ण बात यह भी है कि उत्तर प्रदेश के अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी में सीधी टक्कर है | भारतीय जनता पार्टी जहां अपने सहयोगी दलों के साथ चुनावी रणनीति बना रही है , वहीं समाजवादी पार्टी कांग्रेस के गठबंधन के साथ चुनाव में मैदान में उतरने जा रही है जबकि बहुजन समाज पार्टी एकला चलो की रणनीति पर काम करते हुए खुद सभी 403 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी |
वोट बैंक मजबूत कर रहे भाजपा सपा
उत्तर प्रदेश के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर नजर दौड़ायें तो भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी लगातार अपना वोट बैंक मजबूत करने में जुटे हुए हैं | भाजपा जहां अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए बूथ प्रबंधन पर जोर दे रही है, वहीं समाजवादी पार्टी भी पीडी ए , प्रहरी, चौपाल सहित विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से अपने वोट बैंक को मजबूत कर रही है | यह नहीं भारतीय जनता पार्टी के कई बड़े नेता भी समाजवादी पार्टी में शामिल हो चुके हैं | प्रदेश में बयार ऐसी बह रही है कि प्रदेश में आया राम गया राम जैसी स्थिति बनती दिख रही है | आने वाले दिनों में विभिन्न राजनीतिक दलों के विधायक और बड़े नेता भी एक दूसरे दल में अपना भविष्य तलाशने के लिए सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं |
क्या है प्रदेश का परिद्रश्य
ऐसे में यह महत्वपूर्ण है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव तक उत्तर प्रदेश का परिदृश्य क्या होगा ? हालांकि यह कहना अभी मुश्किल है कि समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी में कौन भारी पड़ेगा ? लेकिन इतना तो तय है कि दोनों दलों की तैयारी अपने-अपने स्तर से तेज हो रही है| भारतीय जनता पार्टी जहां उत्तर प्रदेश में तीसरी बार विधानसभा चुनाव जीत कर हैट्रिक बनाने की कोशिश में है वहीं समाजवादी पार्टी दो बार की हार का बदला लेकर सत्ता पर काबिज होने का ख्वाब देख रही है |
यही कारण है कि अखिलेश यादव लगातार में केवल प्रदेश के दौरे कर रहे हैं बल्कि वे कार्यकर्ताओं , पदाधिकारियों के घर जाकर भी भेंट मुलाकात कर रहे हैं | हाल ही में उन्होंने वाराणसी का दौरा कर अलग अलग कारणों से कार्यकर्ताओं के घरों पर गए थे | अब देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीतिक दिशा किस करवट बदलती है और यही चुनाव परिणाम में दिखाई भी देगा ?
