- सपा प्रत्याशी सुशील कुमार को छह हजार से अधिक मतों से हराया, उमेश द्विवेदी को 12508 मत मिले।
लखनऊ | उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लखनऊ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव परिणाम आ गए हैं | उमेश द्विवेदी (Umesh Dwivedi MLC ) चुनाव जीत गए हैं | उन्होने सपा प्रत्याशी सुशील कुमार को छह हजार से अधिक मतों से हराया। उमेश द्विवेदी (Umesh Dwivedi MLC ) को 12508 मत मिले। उमेश द्विवेदी (Umesh Dwivedi MLC ) वर्तमान विधान परिषद सदस्य हैं| भारतीय जनता पार्टी के बूथ मैनेजमेंट का सहारा लेते हुए जीत दर्ज की है .उधर सपा प्रत्याशी सुशील सिंह व समर्थकों ने धांधली का आरोप लगा कर हंगामा किया। इससे लगभग दो घंटे परिणाम घोषित नहीं हो सका। विरोध शांत होने पर रात सवा दो बजे परिणाम घोषित किया गया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!समाजवादी पार्टी ने शिक्षक क्षेत्र से सुशील सिंह को उम्मीदवार घोषित किया था | सुशील सिंह लखनऊ पब्लिक स्कूल के प्रबंधन में प्रभावी भूमिका निभाते हैं| स्कूल के संस्थापक प्रबंधक एसपी सिंह के जेल जाने के समय स्कूल का अधिकांश प्रबंधन प्रबंधन कार्य सुशील कुमार सिंह के ही जिम्मे था | शायद यही कारण है कि इस बार उन्हें शिक्षक विधायक बनाने के लिए लखनऊ पब्लिक स्कूल का प्रबंधन पूरी ताकत से जुटा लेकिन जिता नहीं हो सके | इसके अलावा लखनऊ शिक्षक सीट से शर्मा गुट के जगजीवन प्रसाद शुक्ल और पांडे गुट के आशीष कुमार सिंह, माध्यमिक शिक्षक संघ ( एक्जुट ) के प्रदेश अध्यक्ष सोहनलाल वर्मा ने भी चुनावी किस्मत आजमाई लेकिन इन तीनों संगठनों के उम्मीदवार बुरी तरह से हार गए |
इनमें सबसे खराब स्थिति शर्मा गुट के जगजीवन प्रसाद शुक्ल की रही है , क्योंकि इसी सीट से शर्मा गुट के प्रत्याशी कई बार विधान परिषद के सदस्य चुने गए लेकिन पिछले कई चुनाव से शर्मा गुट के प्रत्याशी चुनाव हार रहे हैं, जगजीवन प्रसाद शुक्ल कई साल पहले रिटायर हुए थे लेकिन टिकट पा गये थे | पांडेय गुट के प्रत्याशी आशीष कुमार सिंह युवा प्रत्याशी होने के कारण माना जा रहा था कि वह कुछ अधिक बेहतर चुनाव परिणाम ला सकते हैं लेकिन भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी की सीधी टक्कर में वे भी अपना कोई खास मुकाम नहीं बना सके हैं | वहीं एकजुट के प्रदेश अध्यक्ष सोहनलाल वर्मा की स्थानीय राजनीति के कारण ही उन्हें मत मिले हैं | ऐसे में शिक्षक लखनऊ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से शिक्षक संगठनों की राजनीति का पूरी तरीके से सूपड़ा साफ हो गया है | अब शिक्षक संगठनों को अपनी हार की समीक्षा करनी चाहिए और देखना चाहिए कि बार-बार उनकी हार क्यों हो रही है और वे शिक्षक राजनीति कितना प्रासंगिक रह गए हैं ?
