नई दिल्ली| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सोमवार सुबह महर्षि वाल्मीकि की जयंती के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि के सद्विचार भारतीय संस्कृति और विरासत के मूल तत्व रहे हैं, जो हर युग में राष्ट्र को पुष्पित-पल्लवित करते रहेंगे।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुबह सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘आप सभी को महर्षि वाल्मीकि जयंती की असीम शुभकामनाएं। उनके सद्विचार भारतीय संस्कृति और विरासत के मूल तत्व रहे हैं, जो हर युग में राष्ट्र को पुष्पित-पल्लवित करते रहेंगे। मानवता के लिए उनके अनमोल संदेश देशवासियों के लिए सदैव पथ-प्रदर्शक बने रहेंगे।’
पीएम मोदी ने संस्कृत सुभाषितम भी साझा किया
आज ही सुबह ही प्रधानमंत्री मोदी ने एक दूसरी एक्स पर की पोस्ट में ‘संस्कृत सुभाषितम’ भी शेयर किया, जिसमें लिखा, ‘तामभ्यगच्छद्रुदितप्रवादात्कविः कुशेध्माहरणाय यातः। निषादविद्धाण्डजदर्शनोत्थः श्लोकत्वमापद्यत यस्य शोकः॥’ यह श्लोक महाकवि कालिदास की ओर से रचित महाकाव्य ‘रघुवंशम्’ के चौदहवें सर्ग (सर्ग 14, श्लोक 70) से लिया गया है।
इसमें कहा गया है कुश (पवित्र घास) और समिधा (यज्ञ की लकड़ी) लेने के लिए गए हुए वे कवि (महर्षि वाल्मीकि), सीता जी के रोने की आवाज़ सुनकर उनके पास पहुँचे। ये वही वाल्मीकि थे, जिनका व्याध (शिकारी/निषाद) द्वारा बाण से मारे गए क्रौंच पक्षी को देखकर उपजा शोक (दुःख), श्लोक के रूप में बदल गया था।”
