लखनऊ . उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट ) की आपसी उठापटक और गुटबाजी बढ़ती ही जा रही है. इसकी वजह यह है पहले सुरेश त्रिपाठी का प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्य करने से इनकार करना , इनके हटने के बाद कार्यकारी अध्यक्ष बने प्रमोद मिश्रा का भारतीय जनता पार्टी के वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार बन जाने के बाद त्यागपत्र देना, इनके साथ ही विधान परिषद सदस्य ध्रुव कुमार त्रिपाठी का संगठन से त्यागपत्र देना .
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इन तीन बड़े नेताओं की राजनीति को शर्मा गुट से जुड़े सभी शिक्षक जानते हैं , पहले बात सुरेश कुमार त्रिपाठी की .वे प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए भारतीय जनता पार्टी के संपर्क में थे . समीकरण बनाने के लिए उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष पद पर कार्य करने में अनिच्छा जाहिर की थी. उसके बाद प्रदेश कार्य समिति की बैठक में वाराणसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रमोद मिश्र को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया . प्रमोद मिश्रा ने कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद लखनऊ से लेकर वाराणसी तक स्वागत सत्कार कराया और कार्य शुरू किया लेकिन उनका भी भारतीय जनता पार्टी से संपर्क बना रहा . यह बात संगठन के नेता पहले से जानते थे लेकिन इसके बावजूद उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया गया .
इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रमोद मिश्र को उम्मीदवार घोषित कर दिया. उम्मीदवार घोषित होने के बाद प्रमोद मिश्रा ने माध्यमिक शिक्षक ( शर्मा गुट ) से त्यागपत्र दे दिया . इसी सूची में ध्रुव कुमार त्रिपाठी को गोरखपुर निर्वाचन शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार घोषित किया गया था और उन्होंने भी संगठन से त्यागपत्र दे दिया.
शिक्षक नेताओं सुरेश त्रिपाठी के पद से हट जाने, प्रमोद मिश्रा और ध्रुव कुमार त्रिपाठी द्वारा संगठन छोड़ देने से संगठन की स्थिति बेहद कमजोर हो गई. अब हालात फिर तेजी से बदले और प्रमोद मिश्रा के त्यागपत्र देने के बाद सुरेश त्रिपाठी पुनः सक्रिय हो गए हैं, उनके समर्थकों का तर्क है कि वह उन्होंने त्यागपत्र नहीं दिया था, इसलिए उन्हें अध्यक्ष के रूप में स्वीकार किया जाए और संगठन के पदाधिकारियों की मीटिंग में उनका यह तर्क को मान लिया गया और वह पहले की तरह अध्यक्ष के रूप में कार्य करने लगे हैं .
आज 13 अक्टूबर को सुरेश त्रिपाठी ने लखनऊ के विभिन्न विद्यालयों में पहुंचकर संगठन के लखनऊ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार जगजीवन प्रसाद शुक्ल का चुनाव प्रचार किया और इसके साथ ही लखनऊ के वरिष्ठ शिक्षक नेताओं से भेंट मुलाकात की . संगठन की इस उठापटक का सीधा असर न केवल उत्तर प्रदेश शिक्षक- स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव पर पड़ रहा है बल्कि संगठन स्तर पर काफी कमजोर स्थिति बनती दिख रही है.
हालांकि अधिकृत तौर पर संगठन का कोई भी पदाधिकारी इन मुद्दों पर बात करने के लिए तैयार नहीं है, लेकिन वर्तमान हालात खुद ब खुद बयां हो रहे हैं कि सुरेश कुमार त्रिपाठी और उनके समर्थकों के अलावा संगठन के ही अन्य बड़े नेताओं के बीच रिश्ते से सौहार्दपूर्ण नहीं है . और वह एक दूसरे की संगठन निष्ठा को लेकर आशंकित हैं की कब नेता जी टिकट के चक्कर में सगठन छोड़ कर चले जाएँ. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में शर्मा गुट के संगठन और पदाधिकारी को लेकर फेरबदल हो सकता है .
