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रेलखनऊ . उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव ( UP MLC Election lucknow khand ) में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र लखनऊ खंड से नामांकन वापसी के बाद अब तस्वीर साफ हो गई है .विधान परिषद जाने के लिए आतुर प्रत्याशियों ने अपना प्रचार और संपर्क अभियान तेज कर दिया है . शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का यह चुनाव आम चुनाव से अलग हटकर होता है और इसमें रैलियां , जुलूस से ज्यादा महत्व डोर टू डोर और विद्यालय-विद्यालय संपर्क का बेहद महत्वपूर्ण भूमिका रहती है .
यही कारण है कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवार विद्यालयों में जाकर न केवल शिक्षकों से मुलाकात कर रहे हैं बल्कि संगठनात्मक बैठकर करके भी उन्हें मत और समर्थन के लिए तैयार कर रहे हैं .
लखनऊ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की बात करें तो समाजवादी पार्टी ने यहां पर सुशील कुमार सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है . सुशील कुमार सिंह लंबे अरसे से लखनऊ के प्रतिष्ठित लखनऊ पब्लिक स्कूल शिक्षण संस्थान में जिम्मेदार पद पर हैं . शिक्षकों से उनका संपर्क और संबंध है इसके साथ ही उनके अपने स्कूल का शिक्षकों और अभिभावकों का नेटवर्क उन्हें एक मजबूती प्रदान करता है.
भारतीय जनता पार्टी ने अपने निवर्तमान विधान परिषद सदस्य उमेश द्विवेदी को चुनाव मैदान में चुनाव उतारा है . द्विवेदी ने विधान परिषद सदस्य के रूप में शिक्षकों से जुड़ी समस्याओं को लेकर अपने स्तर से उठाया है और उनके समाधान की कोशिश भी की है. द्विवेदी को जिताने के लिए भारतीय जनता पार्टी का पूरा संगठन सक्रिय है और बूथ स्तर पर बैठकें हो रही है . यही नहीं भारतीय जनता पार्टी ने बूथ अध्यक्षों की बैठक लेकर इस चुनाव को अधिक महत्वपूर्ण और गंभीर बना दिया है.
इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव जीतने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है . इसके लिए विभिन्न सामाजिक संगठनों और विभिन्न दलों के नेताओं का समर्थन जुटाने की कवायत भी तेज कर दी है .एक प्रधानाचार्य ने अपने स्तर पर कल 14 अक्टूबर को लखनऊ में विभिन्न शिक्षक संगठन की बैठक एक दावत जैसी आहूत की है .इस दावत में उम्मीदवार के रहने की संभावना व्यक्त की गई है.
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कभी सबसे ताकतवर रहे शर्मा गुट के उम्मीदवार जगजीवन प्रसाद शुक्ला चुनाव लड़ रहे हैं . वह रिटायर्ड प्रधानाचार्य हैं और रायबरेली के रहने वाले हैं उनका संपर्क अभियान जिला इकाइयों के माध्यम से चल रहा है और वह से भी विद्यालयों में जाकर शिक्षकों से संपर्क कर रहे हैं. मोटे तौर पर यह माना जा रहा है कि शर्मा गुट का संगठनात्मक ढांचा कमजोर होने के कारण चुनाव में उन्हें उसे तरह का समर्थन नहीं मिल रहा है जैसा पूर्व में कभी देवी दयाल शास्त्री के समय मिलता रहा है . यह बात उम्मीदवार जगजीवन प्रसाद शुक्ला खुद स्वीकार कर चुके हैं .
माध्यमिक शिक्षक पाण्डेय गुट के प्रत्याशी आशीष कुमार सिंह लगातार जोर लगाकर चुनाव लड़ रहे हैं. युवा और सेवारत शिक्षक होने के कारण आशीष कुमार सिंह का एक अपना अलग व्यक्तित्व है और उनके साथ पांडे गुट के कई दिग्गज नेता दिन-रात मेहनत कर रहे हैं . अपने गुट के जिला और मंडल के पदाधिकारी बैठकों के माध्यम से शिक्षकों को अपने पाले में ला रहे हैं और पुरानी पेंशन स्कीम का समर्थन करते हुए शिक्षकों से मत एवं सहयोग मांग रहे हैं.
राजधानी की शिक्षक समस्याओं को लेकर के भी पांडेय गुट मुखर रहा है, गुट के नेताओं का मानना है कि शिक्षकों के मुद्दों को उठाने के कारण इस चुनाव में उन्हें अच्छा समर्थन और मत मिलेगा. इसके अलावा भी विभिन्न संगठनों के निर्दलीय उम्मीदवार भी अपने-अपने स्तर से चुनाव प्रचार कर रहे हैं , लेकिन मोटे तौर पर देखा जाए तो यह चुनाव अभी प्रारंभिक स्थिति में है . इसलिए किसी प्रकार का आकलन और संभावनाएं व्यक्त करना उपयुक्त नहीं होगा . वैसे भी राजनीति में समीकरणों के हिसाब से ही हार जीत होती है और अभी चुनाव के लिए होने वाले मतदान में समय शेष है , इसलिए आने वाले दिनों में समीकरणों में भारी उलट फिर भी देखने को मिल सकता है. और यही उलटफेर प्रत्याशी को जीत की संभावनाओं को आगे बढ़ाएगा .
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