- तदर्थ शिक्षकों को नियमित किये जाने में सक्षम शिक्षा अधिकारियों की हठधर्मिता पर शिक्षकों में नाराज़गी , मुख्यमंत्री करें तत्काल हस्तक्षेप
- तदर्थ शिक्षकों के विनियतमितीकरण मामले में सक्षम शिक्षा अधिकारियों की संवेदन हीनता की पराकाष्ठा : ओम प्रकाश त्रिपाठी
लखनऊ । राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के गैर सरकारी सहायता प्राप्त मा विद्यालयों मे पिछले 30 दिसंबर 2000 के पूर्व से नियुक्त लगभग 2300 तदर्थ शिक्षकों को अब तक नियमित न किये जाने उ प्र माध्यमिक शिक्षक संघ पांडेय गुट ने गहरी नाराज़गी व्यक्त की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ जितेंद्र सिंह पटेल, प्रदेश प्रवक्ता ओम प्रकाश त्रिपाठी , महामंत्री आशीष कुमार सिंह एवं संयुक्त मंत्री मिथिलेश कुमार पांडेय ने आज यहाँ जारी अपने बयान मे बताया कि लखनऊ मंडल सहित अनेक मंडलों में विनियमन के मामले लबित पड़े हुए हैं जिनपर शिक्षा निदेशक मा के स्पष्ट अदेश के बाद भी लंबित प्रकरण ज्यो के त्यों पड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा निदेशक इस मामले में गत दिनों जारी अपने गाइड लाइन मे साफ तौर पर निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समय, निरंतरता के साथ शिक्षक की अर्हता को ही ध्यान मे रख कर इतने लंबी अवधि से सेवा करने वाले तदर्थ शिक्षकों को नियमित किये जाने की कार्यवाई के आदेश जारी किया है। जिसका कोई अनु पालन नहीं किया गया है। सूबे के सभी तदर्थ २३०० तदर्थ शिक्षकों का भविष्य अधर मे लटका हुआ है। इसके चलते जहाँ उन्हें चयन और प्रो न्नत वेतनमान नियमानुसार मिल रहा है। वही २८ से ३० वर्धो की लंबी सेवा के बाद रिटायर होने पर पेंशन का भुगतान तक नहीं हो पा रहा है जबकि उन्हें जी पी एफ और ग्रुप एल आई सी का भुगतान मिल रहा है। शिक्ष क नेताओ ने बताया कि पेंशन, जी पी एफ और ग्रुप एल आई सी तीनों मिल कर लाभ त्रयी सेवा निवृति क लाभ एक साथ प्राप्त होता है। उन्होंने इन बातों की ओर शासन एवं शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कर तत्काल हस्तक्षेप किये जाने की मांग की है।
तदर्थ शिक्षकों के विनियमितीकरण के लिए उ प्र माध्य मिक शिक्षा सेवा अधिनियम २०१६ की धारा ३३- ( छ) के अंतर्गत ७ अगस्त १९९३ से ३० दिसंबर २००० की निर्धारित सीमा अवधि तक नियुक्त सभी को विनियमित करने का निर्देश प्रदान किया गया है। संगठन यही मांग लंबी अवधि से करता चला आ रहा है।
शिक्षा निदेशक द्वारा जारी निर्देश में मात्र अधिनियम मे वर्णित समय एवं निरंतरता को विशेष रूप से ध्यान में रखे जाने की ओर ध्यान दिये जाने को कहा गया है। वेतन भुगतान पर ध्यान न देकर अन्य वर्णित विंदुओ पर परीक्षण करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। शिक्षक नेताओ ने लगातार संगठन की मांग पर जारी स्पष्ट निर्देश के अनुसार ही लभभग तीस तीस सालों से कार्यरत सभी तदर्थ शिक्षकों को नियमित कर प्रदेश के माध्य मिक शिक्षा जगत से तदर्थवाद को हमेशा के लिए खतम किये जाने की संगठन के मांग को शिक्षा विभाग के उच्च शिक्षा अधिकारियों के समक्ष जोरदार दंग से उठाया है।
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