- सौंदर्य एवं सांस्कृतिक विकास कार्यक्रम 2026–27 के अंतर्गत विद्यार्थियों को भारतीय कला की समृद्ध परंपरा और सृजनात्मक अभिव्यक्ति से जोड़ने की अभिनव पहल।
लखनऊ,03 अगस्त, लखनऊ पब्लिक स्कूल, आनंद नगर शाखा में सौंदर्य एवं सांस्कृतिक विकास कार्यक्रम 2026–27 के अंतर्गत भारत के सुप्रसिद्ध समकालीन चित्रकार मनजीत बावा (1941–2008) की कला पर आधारित छह दिवसीय चित्रकला कार्यशाला का भव्य शुभारम्भ हुआ। लखनऊ पब्लिक स्कूल्स एंड कॉलेजेज तथा फ्लोरेसेंस आर्ट गैलरी, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को मनजीत बावा की विशिष्ट चित्रशैली, सौंदर्यबोध, रंग-दृष्टि तथा उनकी कलात्मक एवं दार्शनिक चेतना से परिचित कराना है। अपनी चटख रंग-संयोजना, सरल किंतु प्रभावशाली आकृतियों, आध्यात्मिक प्रतीकों तथा भारतीय पौराणिक कथाओं, प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं के अद्भुत समन्वय के कारण मनजीत बावा भारतीय समकालीन कला के सबसे विशिष्ट कलाकारों में गिने जाते हैं।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. मीनाक्षी खेमका (सहायक निदेशक,राज्य संग्रहालय,लखनऊ) ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कला केवल चित्र बनाने का माध्यम नहीं, बल्कि रचनात्मक चिंतन, सांस्कृतिक चेतना और आत्म-अभिव्यक्ति का सशक्त साधन है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे जिज्ञासा, अनुशासन और समर्पण के साथ कला का अभ्यास करें तथा अपनी कल्पनाशीलता को सकारात्मक दिशा दें।

इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती मीना तिवारी तथा श्रीमती सुनंदा माथुर ने कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ विद्यार्थियों में सौंदर्यबोध, आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और सृजनात्मक दृष्टि का विकास करती हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को निरंतर अभ्यास और मौलिक प्रयोग के माध्यम से अपनी कलात्मक प्रतिभा को निखारने के लिए प्रेरित किया।
फ्लोरेसेंस आर्ट गैलरी, लखनऊ की संस्थापक एवं निदेशक तथा लखनऊ पब्लिक स्कूल्स एंड कॉलेजेज की निदेशक (अकादमिक एवं नवाचार) सुश्री नेहा सिंह ने अपने संदेश में कहा कि महान भारतीय कलाकारों की कृतियों से विद्यार्थियों का परिचय कराना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मनजीत बावा के जीवन, दर्शन और कला-दृष्टि को समझने से विद्यार्थियों में भारतीय कला एवं संस्कृति के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और अपनी मौलिक रचनात्मक पहचान विकसित होती है।
गैलरी क्यूरेटर एवं कला समीक्षक भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने अपने प्रेरक वक्तव्य में मनजीत बावा की कलादृष्टि, विशिष्ट दृश्य-भाषा तथा रंग, संरचना और प्रतीकों के अभिनव प्रयोग पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनजीत बावा ने भारतीय मिथकों, आध्यात्मिक चिंतन और लोकसंस्कृति को आधुनिक चित्रभाषा में रूपायित कर भारतीय समकालीन कला को वैश्विक पहचान दिलाई। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि प्रत्येक बच्चे के भीतर एक कलाकार छिपा होता है। जब वे रंगों से संवाद करते हैं और अपनी कल्पना को कागज़ पर उतारते हैं, तभी उनकी मौलिक सृजनात्मकता विकसित होती है। उन्होंने बच्चों को संदेश दिया कि चित्र अच्छा या बुरा नहीं होता, बल्कि वह कलाकार के मन, भावनाओं और कल्पना का सच्चा प्रतिबिंब होता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से नए रंगों और नए प्रयोगों से न डरने तथा भारतीय कला-संस्कृति की जड़ों से जुड़े रहते हुए अपनी रचनात्मक उड़ान को विस्तार देने का आह्वान किया। कला व कलाकार के बारे में जागरूक करने के लिए एकमात्र संस्था लखनऊ पब्लिक स्कूल और फ्लोरेसेंस आर्ट गैलरी है जो इस प्रकार का महत्त्वपूर्ण कार्य काफी समय से कर रही है।
युवा कलाकार ऋषभ गौतम ने कार्यशाला के दौरान मनजीत बावा की चित्रण तकनीकों का सजीव प्रदर्शन किया।

उन्होंने विद्यार्थियों को उनके विशिष्ट रंग-संयोजन, सरल आकृतियों, अभिव्यंजक रूपों तथा संतुलित संरचना की बारीकियों से अवगत कराया और भारतीय कलात्मक मूल्यों के साथ रचनात्मक प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला का समन्वयन विद्यालय की कला शिक्षिका श्रीमती नीलांजना कांजीलाल द्वारा किया जा रहा है। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थी अवलोकन, प्रयोग, संवाद तथा व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से मनजीत बावा की कलाभाषा और सृजन प्रक्रिया को समझ रहे हैं।

वरिष्ठ कला अध्यापक राजेश कुमार ने बताया कि इस छह दिवसीय कार्यशाला में विद्यालय के 35 विद्यार्थी उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। व्याख्यान, प्रदर्शन, संवाद तथा स्टूडियो अभ्यास के माध्यम से प्रतिभागियों को मनजीत बावा की चित्रण तकनीकों और कलादर्शन की गहन समझ प्राप्त होगी, साथ ही उनकी कलात्मक दक्षता, सौंदर्यबोध, सृजनात्मक सोच और आत्मविश्वास का भी विकास होगा। कार्यक्रम का समापन इस विश्वास के साथ हुआ कि यह कार्यशाला विद्यार्थियों को भारतीय कला की समृद्ध परंपरा से जोड़ते हुए उनके भीतर सृजनशीलता, सांस्कृतिक चेतना और सौंदर्यपरक दृष्टि का विकास करेगी। यह पहल कला शिक्षा को प्रोत्साहित करने, भारत की समृद्ध कलात्मक विरासत के संरक्षण तथा नई पीढ़ी में नवाचार, रचनात्मकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
