लखनऊ . काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रौद्योगिकी संस्थान के माइनिंग विभाग में प्रोफेसर तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र संघचालक, रीवा, राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन खुला विश्वविद्यालय और लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति रहे प्रोफेसर देवेंद्र प्रताप सिंह (प्रो. डीपी सिंह) का निधन हो गया है । डॉ डी पी सिंह जी मूल रूप से जौनपुर के मडियाहू तहसील के रहने वाले थे। वे अत्यंत सरल और बहुत ही विनम्र व्यक्तित्व के स्वामी थे।
लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर देवेंद्र प्रताप सिंह (प्रो. डीपी सिंह) के निधन पर शिक्षा जगत में अशोक व्याप्त है. लखनऊ विश्वविद्यालय समेत विभिन्न विश्वविद्यालययों और छात्र संगठनों ने प्रोफेसर सिंह के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है . प्रोफेसर सिंह ( Prof. DP Singh ) को एक प्रख्यात शिक्षाविद् एवं सुलझे हुए प्रशासक बताया है . लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (LUTA ) के अध्यक्ष अनित्य गौरव, महामंत्री प्रोफ़ेसर राम मिलन , लखनऊ विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक संघ (LUACTA ) के अध्यक्ष प्रोफेसर मनोज पांडेय, महामंत्री प्रोफेसर अंशु केडिया, लखनऊ विश्वविद्यालय कर्मचारी परिषद् के अध्यक्ष राकेश यादव और महामंत्री डाक्टर संजय शुक्ल , माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट के प्रांतीय उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता डॉ आर पी मिश्रा , माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट ) के प्रवक्ता ओम प्रकाश त्रिपाठी, लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व प्राक्टर प्रोफेसर एन सिंह, जौनपुर के पूर्व भाजपा विधायक सुरेन्द्र प्रताप सिंह, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के विभिन्न छात्र नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है.
प्रोफेसर सिंह ( Prof. DP Singh ) के लखनऊ विश्वविद्यालय के कार्यकाल को याद करते हुए कई वरिष्ठ शिक्षकों ने बताया कि उनके कार्यकाल में लखनऊ विश्वविद्यालय में कभी किसी प्रकार का आंदोलन नहीं हुआ. वे स्वयं छात्रों और शिक्षकों से सीधा संवाद स्थापित करते थे. विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए उनकी हर समय उपलब्धता रहती थी और वह विभिन्न मुद्दों पर सीधे निर्णय लेने के बजाय आपसी संवाद और आपसी सहमत से ही बड़े फैसला लिया करते थे. यही कारण रहा कि उनके कार्यकाल में लखनऊ विश्वविद्यालय में पूर्ण तरीके से अनुशासन और शैक्षिक माहौल रहा, इसका फायदा विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को मिला.
प्रोफेसर सिंह ( Prof. DP Singh ) के लखनऊ विश्वविद्यालय के पहले भी कई प्रमुख विश्वविद्यालय में कुलपति के रूप में कार्य कर चुके थे. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS ) के वरिष्ठ पदाधिकारी होने के नाते उनके जीवन में राष्ट्र प्रथम का भाव रहा . लखनऊ में 17 सितंबर की शाम को जैसे ही प्रोफेसर सिंह के निधन का समाचार लोगों को मिला वैसे ही उनके साथ काम कर चुके लोगों और शुभ चिंतकों की आँखें नम हो गयीं . प्रोफेसर सिंह के सुपुत्र प्रोफेसर संजय सिंह वर्तमान में डॉक्टर शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ के कुलपति के रूप में कार्यरत हैं.
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