- यह आयोजन केवल एक स्मृति समारोह नहीं, बल्कि शिक्षा, सेवा, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय मूल्यों के प्रति यशःशेष पं. मनमोहन तिवारी जी के जीवन-दर्शन को जन-जन तक पहुँचाने का एक प्रेरणादायी प्रयास सिद्ध हुआ।
- डी.ए.वी. शिक्षण समूह में किये गए आयोजन
लखनऊ, 27 जून, यशःशेष पं. मनमोहन तिवारी जी की 81वीं जयंती के अवसर पर डी.ए.वी. शिक्षण समूह, लखनऊ द्वारा एक गरिमामय स्मृति समारोह एवं पर्यावरण संरक्षण को समर्पित कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक हवन से हुआ, जिसके उपरांत उनके व्यक्तित्व, कृतित्व तथा शिक्षा एवं समाज सेवा के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान का स्मरण किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व शिक्षा मंत्री एवं पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक वाजपेयी ने अपने उद्बोधन में यशःशेष पं. मनमोहन तिवारी जी के साथ अपने दशकों पुराने आत्मीय संबंधों का स्मरण करते हुए कहा कि वे शिक्षा, संस्कार, सादगी और निस्वार्थ सेवा के पर्याय थे। उन्होंने कहा कि पं. मनमोहन तिवारी जी ने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण शिक्षा और समाज के उत्थान के लिए समर्पित किया तथा डी.ए.वी. शिक्षण समूह को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

डी.ए.वी. महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. मनीन्द्र तिवारी के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में विकसित “यशःशेष पं. मनमोहन तिवारी स्मृति नवग्रह वाटिका” एवं “यशःशेष पं. मनमोहन तिवारी स्मृति नक्षत्र वाटिका” का लोकार्पण पूर्व महापौर श्रीमती संयुक्ता भाटिया द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि पं. मनमोहन तिवारी जी का जीवन शिक्षा, समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित था तथा उनके नाम पर स्थापित ये वाटिकाएँ आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति संरक्षण और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा देती रहेंगी। उपस्थित अतिथियों ने डॉ. मनीन्द्र तिवारी द्वारा इस पर्यावरणीय पहल को मूर्त रूप देने के लिए किए गए विशेष प्रयासों की भी मुक्तकंठ से सराहना की।

इस अवसर पर डी.ए.वी. शिक्षण समूह के प्रबंधक एवं आर्य समाज गणेशगंज, लखनऊ के मंत्री आनंद मोहन तिवारी ने अपने संबोधन में अपने पूज्य पिता यशःशेष पं. मनमोहन तिवारी जी को भावभीनी श्रद्धा के साथ स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर शिक्षा, सेवा, संस्कार और मानवीय रिश्तों को सर्वोच्च स्थान दिया। उन्होंने कहा कि उनके पिता का मानना था कि व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके पद या संपत्ति से नहीं, बल्कि उसके द्वारा समाज के लिए किए गए कार्यों और लोगों के हृदय में छोड़ी गई अमिट छाप से होती है। आनंद मोहन तिवारी ने कहा कि उनके पिता के प्रकृति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से उनके नाम पर नवग्रह वाटिका एवं नक्षत्र वाटिका की स्थापना की गई है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, शिक्षाविदों एवं नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में आर्य समाज गणेशगंज, लखनऊ के अध्यक्ष डॉ. सत्यकाम आर्य, LUACTA के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय, डी.ए.वी. शिक्षण समूह के विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्यगण, शिक्षकगण एवं कर्मचारी, विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्रबंधक एवं प्राचार्य तथा नगर के अनेक गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यशःशेष पं. मनमोहन तिवारी जी ने लगभग पाँच दशकों तक डी.ए.वी. शिक्षण समूह के विकास, विस्तार एवं शैक्षिक उन्नयन में अविस्मरणीय योगदान दिया। उनका सादगीपूर्ण जीवन, निस्वार्थ सेवा, शिक्षा के प्रति समर्पण तथा मानवीय मूल्यों के प्रति अटूट आस्था आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।
कार्यक्रम के समापन पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए उपस्थित सभी लोगों को पौधों एवं कपड़े के पर्यावरण-अनुकूल थैलों का वितरण किया गया तथा प्रसाद वितरित किया गया। यह आयोजन केवल एक स्मृति समारोह नहीं, बल्कि शिक्षा, सेवा, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय मूल्यों के प्रति यशःशेष पं. मनमोहन तिवारी जी के जीवन-दर्शन को जन-जन तक पहुँचाने का एक प्रेरणादायी प्रयास सिद्ध हुआ।
