लखनऊ, 22 मई , लखनऊ विश्वविद्यालय ने आखिरकार आज ग्रीष्म अवकाश की घोषणा कर दी है. विश्वविद्यालय की कुल सचिव डॉ भावना मिश्रा की ओर से आज इस आशय का आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने ग्रीष्म अवकाश में कुछ शर्ते भी लगा दी हैं . यह अवकाश 1 जून से 11 जुलाई तक घोषित किया गया है . कुल कार्य दिवसों के सापेक्ष दो दिवस पर एक दिवस का अर्जित अवकाश इस प्रतिबंध के साथ प्रदान किया जाएगा कि एक वर्ष में 30 से अधिक अर्जित अवकाश दिए नहीं होंगे. साथ ही आवश्यकता अनुसार किसी भी शिक्षक को अवकाश अवधि में आवश्यक कार्य हेतु बुलाया जा सकता है .
इनमें सबसे अहम शर्त यह है कि ग्रीष्म अवकाश में किसी भी शिक्षक को विश्वविद्यालय प्रशासन बुला सकता है. इस शर्त के कारण विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेज के शिक्षकों को आउटिंग जाने से पहले कई बार सोचना पड़ेगा . ग्रीष्म अवकाश में विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह व्यवस्था दी है कि दो कार्य दिवस के बदले एक अर्जित अवकाश दिया जाएगा, लेकिन यह उन्हीं शिक्षकों को मिलेगा जिनकी विश्वविद्यालय स्तर में विभाग केअध्यक्ष की ओर से सूची विश्वविद्यालय के कुलसचिव को भेजी जाएगी , जबकि डिग्री कॉलेज के प्राचार्यों को संबंधित महाविद्यालय के शिक्षक की सूची तैयार करके विश्वविद्यालय प्रशासन को देने के लिए कहा गया है .
यह अर्जित अवकाश एक वर्ष में 30 दिन से अधिक नहीं होगा. साथ ही विश्वविद्यालय ने ग्रीष्म अवकाश के समय सभी प्रकार के परीक्षा , प्रवेश संबंधी कार्य अनवरत रूप से जारी रखने की बात कही है . उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालय के शिक्षक लगातार ग्रीष्म अवकाश की मांग कर रहे थे, जबकि प्रदेश के कई विश्वविद्यालय में इस अवकाश की घोषणा की जा चुकी है लेकिन लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन जानबूझकर देरी कर रहा था हालांकि अब 22 मई को लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी ग्रीष्म अवकाश की घोषणा कर दी है.

