लखनऊ , 07 मई , उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आज जन भवन के गांधी सभागार में महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय आजमगढ़ से सम्बद्ध शासकीय एवं वित्तपोषित महाविद्यालयों के प्राचार्यों के साथ समीक्षा बैठक संपन्न हुई।
बैठक में सभी महाविद्यालयों द्वारा अपने संस्थानों की शैक्षणिक, सहशैक्षणिक एवं कौशल विकास गतिविधियों से संबंधित प्रस्तुतीकरण भी दिया गया। बैठक को संबोधित करते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि जनगणना 2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में मकान सूचीकरण एवं मकान गणना के लिए स्व-गणना की प्रक्रिया आज से प्रारम्भ हो गई है।
उन्होंने सभी से अपील की कि पोर्टल पर जाकर सही एवं तथ्यात्मक जानकारी भरते हुए इस महत्वपूर्ण अभियान में सहभागिता सुनिश्चित करें तथा कार्यक्रम को सफल बनाएं। राज्यपाल जी ने राजकीय महिला महाविद्यालयों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत सरकार एवं राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही हैं।
महाविद्यालयों को चाहिए कि वे इन योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक छात्राओं तक पहुंचाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु तकनीकी एवं कौशल विकास आधारित पाठ्यक्रम संचालित किए जाएं। कुकिंग, सिलाई, कढ़ाई, मेहंदी, प्रौद्योगिकी, योग, संगीत तथा अन्य व्यावसायिक एवं रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देकर छात्राओं को ऐसी शिक्षा प्रदान की जाए जिससे वे पार्ट टाइम कार्य कर आर्थिक रूप से भी सशक्त बन सकें।
राज्यपाल जी ने कहा कि विश्वविद्यालयों को समय-समय पर राजभवन में आमंत्रित कर उन्हें नैक, एनआईआरएफ तथा अन्य रैंकिंग के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए कहा कि विभिन्न चुनौतियों एवं प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद वहां के कुलपति एवं शिक्षकों के प्रयासों से विश्वविद्यालय को नैक में ए प्लस प्लस ग्रेड प्राप्त हुआ।
उन्होंने महाविद्यालयों को भी प्रेरित किया कि वे इन रैंकिंग प्रक्रियाओं में सक्रिय सहभागिता करें तथा निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य करें। उन्होंने कहा कि निरंतर परिश्रम, टीम भावना एवं योजनाबद्ध प्रयासों से बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। राज्यपाल जी ने कहा कि अध्यापक समय से महाविद्यालय पहुंचकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करें तथा विद्यार्थियों को कौशल विकास एवं विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ें। आसपास के गांवों में सामाजिक एवं जनजागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जाएं, क्योंकि इस प्रकार की गतिविधियों का नैक मूल्यांकन में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
उन्होंने सभी प्राचार्यों से आह्वान किया कि वे अपने महाविद्यालयों में बैठक कर आज प्राप्त मार्गदर्शन को शिक्षकों एवं विद्यार्थियों तक पहुंचाएं तथा टीम बनाकर लक्ष्य आधारित कार्य करें। उन्होंने कहा कि आज के प्रस्तुतीकरण से स्पष्ट है कि विद्यार्थियों में अद्भुत प्रतिभा एवं कौशल मौजूद है। महाविद्यालयों का दायित्व है कि वे इन प्रतिभाओं को उचित मंच प्रदान करें। उन्होंने कहा कि नैक मूल्यांकन के विभिन्न मानकों के अनुसार अलग-अलग शिक्षकों को जिम्मेदारी देकर गंभीरता से कार्य किया जाए। राज्यपाल जी ने विद्यार्थियों को विभिन्न ओलंपियाड परीक्षाओं में सहभागिता के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने अपने गुजरात के शिक्षा मंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां भी विद्यार्थियों में कौशल विकास एवं सहशैक्षणिक गतिविधियों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया गया था। उन्होंने बताया कि जनभवन में 22 बच्चों को बांसुरी वादन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है तथा महाविद्यालयों में भी इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि जो विद्यार्थी योग में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें 21 जून के बाद राजभवन में आमंत्रित किया जाए।
अध्यापकों की कमी के संबंध में उन्होंने कहा कि महाविद्यालय आवश्यक अधियाचन शासन को प्रेषित करें, ताकि रिक्त पदों की पूर्ति की जा सके। उन्होंने विद्यार्थियों को एनसीसी, एनएसएस एवं अग्निवीर प्रशिक्षण से जोड़ने पर भी बल दिया। राज्यपाल जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर तेजी से विकसित हो रहा है, जिसके अंतर्गत लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़ एवं चित्रकूट में रक्षा उत्पादन से संबंधित परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। विद्यार्थियों को इस क्षेत्र की जानकारी दी जाए तथा उन्हें रक्षा एवं तकनीकी क्षेत्र में भविष्य निर्माण के लिए प्रेरित किया जाए।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षण व्यवस्था विकसित करने पर बल देते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों की भांति महाविद्यालयों में भी नामांकन से लेकर परीक्षा तक की समस्त प्रक्रियाएं समर्थ पोर्टल के माध्यम से संचालित की जानी चाहिए, जिससे पारदर्शिता एवं सुगमता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने नामांकन बढ़ाने, ग्रीन कैंपस विकसित करने, नियमित योग अभ्यास कराने तथा वृक्षारोपण अभियान चलाने के भी निर्देश दिए।
