लखनऊ, 12 अप्रेल, आर्ट्स,कॉमर्स एंड साइंस महिला महाविद्यालय, नंदुरबार, महाराष्ट्र ( ARTS,COMMERCE & SCIENCE MAHILA MAHAVIDYALAYA, NANDURBAR.) द्वारा आयोजित 12 अप्रैल 2026 को एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के ऑनलाइन आयोजन में डॉ राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की शिक्षिका डॉ अलका सिंह ने संगोष्ठी के विषय “सतत विकास: अवसर, चुनौतियाँ एवं शोध” का समापन संबोधन दिया ।अपने संबोधन में डॉ अलका कहा कि सतत विकास केवल पर्यावरणीय चिंता नहीं, बल्कि सामाजिक समावेशन, आर्थिक संतुलन, सांस्कृतिक संरक्षण और नैतिक उत्तरदायित्व से जुड़ी व्यापक अवधारणा के रूप में पढ़ा और समझा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में जलवायु परिवर्तन, संसाधनों के अंधाधुंध दोहन और बढ़ती असमानताओं जैसी चुनौतियाँ मानवता के सामने गंभीर प्रश्न खड़े कर रही हैं। ऐसे में सतत विकास के लिए केवल नीतियाँ पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सामूहिक इच्छाशक्ति, नैतिक दृष्टि और ठोस कार्यान्वयन की आवश्यकता है।
उन्होंने अंतर्विषयी शोध, तकनीकी नवाचार, युवा सहभागिता और वैश्विक सहयोग को सतत भविष्य की प्रमुख संभावनाओं के रूप में चिन्हित किया। डॉ सिंह ने कहा कि अकादमिक जगत को केवल ज्ञान उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनना चाहिए।
अपने संबोधन में उन्होंने मानवीय मूल्य-आधारित विकास पर विशेष बल देते हुए प्रकृति के प्रति सम्मान, सामाजिक न्याय और भविष्य की पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी को अनिवार्य बताया।
अंत में, उन्होंने सभी प्रतिभागियों, आयोजकों और विशेषज्ञों का आभार व्यक्त करते हुए आह्वान किया कि संगोष्ठी में हुए विचार-विमर्श को व्यावहारिक रूप में लागू कर एक समावेशी, न्यायपूर्ण और सतत भविष्य के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएँ। डॉ अलका सिंह ने कहा कि तकनीकी क्रान्ति का स्वयं एक उदाहरण बन,यह संगोष्ठी ज्ञान-विनिमय, संवाद और वैश्विक सहयोग का एक सशक्त मंच सिद्ध हुई है।
