करत-करत अभ्यास से, जड़मति होत सुजान ।
रसरी आवत-जात के, सिल पर परत निशान ।।
✍ किसी भी कार्य या विधा में पारंगत होने के लिए, लगातार अभ्यास/प्रैक्टिस की आवश्यकता होती है ।
✍ पानी निकालने के लिए बार-बार रस्सी के आने जाने से कुएँ के कठोर पत्थर पर भी निशान पड़ जाते हैं ।
✍ उसी प्रकार बार-बार अभ्यास करने पर मूर्ख व्यक्ति भी एक दिन पारंगत/कुशलता प्राप्त कर लेता है ।
✍ अभ्यास की आवश्यकता शारीरिक और मानसिक दोनों कार्यों में समान रूप से पड़ती है।
✍ संसार मे कोई भी कार्य असाध्य नहीं है, जरूरत है अपने ऊपर भरोसे के साथ जोरदार प्रयास किये जाते रहने की।
