- जिस शासनादेश के आधार पर भुगतान किया जा रहा है, वह स्ववित्तपोषित शिक्षकों पर लागू नहीं होता।
- पूर्ण स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ ने परीक्षा नियंत्रक, वित्त अधिकारी को दिया पत्रक
जौनपुर, 03 अप्रेल , पूर्वांचल विवि जौनपुर ( Veer Bahadur Singh Purvanchal University jounpur ) पूर्ण स्ववित्तपोषित महाविद्यालय शिक्षक संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठाते हुए गंभीर आपत्ति जताई है। संघ के अध्यक्ष डॉ. विवेक पांडेय के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनोद कुमार सिंह और वित्त अधिकारी को संयुक्त रूप से ज्ञापन सौंपकर प्रायोगिक और मौखिकी परीक्षाओं में परीक्षक नियुक्ति होने पर यात्रा भत्ता भुगतान में समान नीति लागू करने की मांग की।
संघ के अध्यक्ष डॉ. विवेक पांडेय ने कहा कि प्रायोगिक परीक्षाओं में परीक्षक नियुक्ति को लेकर दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं। वित्तपोषित शिक्षकों के लिए केंद्रीय मूल्यांकन में सहभागिता अनिवार्य कर दी गई है, जबकि अनुदानित और राजकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों को इसकी छूट दे दी गई है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मूल्यांकन में 95 प्रतिशत से अधिक भागीदारी स्ववित्तपोषित शिक्षकों की ही होती है, जिससे विश्वविद्यालय ( Veer Bahadur Singh Purvanchal University jounpur ) समयबद्ध तरीके से परीक्षा परिणाम घोषित कर पाता है। इसके बावजूद प्रायोगिक परीक्षाओं में उन्हें उचित प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। संघ ने यात्रा भत्ता भुगतान में भी भेदभाव का आरोप लगाया। शिक्षकों का कहना है कि जिस शासनादेश के आधार पर भुगतान किया जा रहा है, वह स्ववित्तपोषित शिक्षकों पर लागू नहीं होता।
वहीं केंद्रीय मूल्यांकन के लिए 200 किमी की दूरी तय है, जबकि प्रायोगिक परीक्षाओं में 500 से 700 किलोमीटर दूर के शिक्षकों को नियुक्त किया जा रहा है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और परिणाम घोषित करने में देरी हो रही। प्रतिनिधिमंडल ने परीक्षा नियंत्रक से भेंट कर अपनी मांगें रखीं। परीक्षा नियंत्रक ( Veer Bahadur Singh Purvanchal University jounpur ) ने मामले को उच्च अधिकारियों के समक्ष रखने का आश्वासन दिया।
