लखनऊ. ‘उत्तर प्रदेश बिजली इंप्लाइज यूनियन का सम्मेलन जय हिंद चबूतरा उदयगंज में संपन्न हुआ ।सम्मेलन का उद्घाटन इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ़ इंडिया के राष्ट्रीय नेता सुभाष लांबा ने किया उन्होंने सम्मेलन को संबोधित करते हुए बिजली कर्मचारियों की समस्याओं पर प्रकाश डाला ।उन्होंने कहा कि 1948 में आजादी के तुरंत बाद बिजली कानून बनाया गया और तमाम प्रदेशों में बिजली बोर्ड का गठन हुआ जिसका उद्देश्य आम जन तक बिजली पहुंचाना था । अब जब आमजन तक बिजली पहुंच गई है ।बिजली के विस्तार मेंबोर्ड्स ने बड़े काम किया हरित क्रांति में भी बिजली का योगदान रहा । बिजली का इतना विस्तार होने के बाद सरकार अब इसका निजीकरण करना चाहती है ।इसीलिए तमाम प्रदेशों में बिजली बोर्ड का विघटन किया गया और बिजली कानून 2003 बनाया गया ।
अब सरकार इससे भी संतुष्ट नहीं है और बिजली संशोधन बिल 2025 लाई है देश के बिजली के कई संगठन मिलकर सरकार के निजीकरण के खिलाफ लगातार लड़ रहे हैं । इसी कारण सरकार बिजली का निजीकरकरण निजीकरण जिस तेजी से नहीं कर पाई है ।उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर निजीकरण का हिस्सा है । यह पूंजी पत्तियों को मुनाफा कमाने में मदद करेगा । सरकार स्मार्ट मीटर के माध्यम से किसानों और आम उपभोक्ताओं का बिल बढ़ाना चाहती है । सरकार यह प्रावधान करने जा रही है की पिक आवर में जो बिजली सप्लाई की जाएगी वह बहुत महंगी होगी ।क्रॉस सब्सिडी खत्म कर दिया जाएगा ।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण के नाम पर सरकारी ताप परियोजनाओं को बंद करने की योजना बनाई गई है ।वितरण में पूरे देश में किसानों के लिए अलग से वितरण से वितरण कंपनी बनाने की बात का जोर-जोर से प्रचार हो रहा है ।सरकार कह रही है कि वितरण में कई कंपनियों के होने से बिजली सस्ती होगी । यह एक धोखाहै ।उन्होंने टेलीफोन का उदाहरण दिया कि किस तरह से जिओ कंपनी शुरू में डेढ़ साल तक लोगों को निशुल्क डेटा उपलब्ध कराई और आज डाटा की कीमत जिओ बहुत ज्यादा वसूल रहा है और कई निजी कंपनियां खत्म हो गई ।बीएसएनल बर्बाद हो गया ।
सम्मेलन में महामंत्री विशंभर सिंह ने रिपोर्ट रखी रिपोर्ट पर बहस में 11 प्रतिनिधियों ने भाग लिया । महामंत्री के जवाब देने के बाद रिपोर्ट सर्वसम्मत से पारित हुई 55 सदस्यीय नई राज्य समिति का चुनाव किया गया ।जिसके अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह महामंत्री विशंभर सिंह कोषाध्यक्ष शिव शंकर चुने गए ।
