सेमरताल, शासकीय कन्या पूर्व माध्यमिक शाला सेमरताल में आज छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपरा एवं संस्कृति से जुड़े पारंपरिक भोजली पर्व को हर्षोल्लास एवं श्रद्धा के साथ मनाया गया। विद्यालय में पहली बार भोजली बोकर विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, हरियाली और प्रकृति से जोड़ने का सार्थक प्रयास किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सर्वप्रथम विद्या की देवी मां सरस्वती एवं छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर पर पूजा-अर्चना एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर विद्यालय की प्रधान पाठक श्रीमती शांति तिर्की जी ने विद्यार्थियों को भोजली पर्व के महत्व, इसकी पारंपरिक मान्यताओं तथा छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति में इसके महत्व के बारे में जानकारी दी।
विद्यालय के शैक्षिक समन्वयक श्री ओमप्रकाश वर्मा जी ने विद्यालय में पहली बार भोजली बोए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए “हमारी संस्कृति, हमारी हरियाली” विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भोजली केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं, बल्कि यह हमारी संस्कृति, प्रकृति, हरियाली, आपसी प्रेम एवं भाईचारे का प्रतीक है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों में अपनी लोकपरंपराओं और संस्कृति के प्रति सम्मान एवं जागरूकता विकसित होती है।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रदीप कुमार, मुखर्जी, श्रीमती अनिता बोरकर, श्रीमती क्रांति सिंगरौल, श्रीमती पद्मावती मरावी, श्रीमती राजकुमारी यादव, श्रीमती शाम बाई यादव एवं श्रीमती श्यामा बाई यादव ने विद्यार्थियों के इस सांस्कृतिक आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की तथा विद्यालय द्वारा संस्कृति संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को सराहनीय बताया।
पूजा अर्चना एवं कार्यक्रम के पश्चात विद्यार्थियों ने पारंपरिक भोजली गीत गाते हुए ग्राम भ्रमण किया पूरे वातावरण में छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति और उत्सव का रंग दिखाई दिया विद्यार्थियों ने श्रद्धा एवं उल्लास के साथ भोजली देवी का विसर्जन किया कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों को लड्डू का प्रसाद वितरण किया गया प्रसाद वितरण के साथ ही भोजली पर्व कार्यक्रम का समापन हुआ विद्यालय परिवार ने इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी माटी संस्कृति परंपरा और प्रकृति से जोड़ने का संदेश दिया तथा भविष्य में भी ऐसे लोक संस्कृति आयोजनों की निरंतर आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया।

