लखनऊ, 29 जून , लखनऊ विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय के एम.एड. द्वितीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों का तीन दिवसीय शैक्षिक भ्रमण हरिद्वार एवं देहरादून में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, सामाजिक उत्तरदायित्व, योग, सतत विकास तथा उच्च शिक्षा संस्थानों के कार्यकलापों से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना था।

भ्रमण के प्रथम दिवस विद्यार्थियों ने शांतिकुंज, हरिद्वार में दर्शन कर सामाजिक सेवा गतिविधियों में सहभागिता की। तत्पश्चात देव संस्कृति विश्वविद्यालय का भ्रमण किया, जहाँ विद्यार्थियों ने गो-सेवा, वस्त्र निर्माण, पत्तल निर्माण जैसी आत्मनिर्भरता आधारित गतिविधियों का अवलोकन किया तथा विश्वविद्यालय द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) के प्रभावी क्रियान्वयन को समझा। सायंकाल सभी विद्यार्थियों ने हर की पौड़ी पर आयोजित भव्य गंगा आरती में सहभागिता कर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की।
द्वितीय दिवस विद्यार्थियों ने देहरादून विश्वविद्यालय का भ्रमण किया, जहाँ कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल से संवाद कर उच्च शिक्षा, शोध एवं नवाचार के विभिन्न आयामों पर सार्थक चर्चा की। इसके उपरांत विद्यार्थियों ने लेखक गाँव का भ्रमण किया, जहाँ उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ से प्रेरणादायी संवाद का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा, साहित्य, नेतृत्व एवं राष्ट्र निर्माण के संबंध में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया। साथ ही विद्यार्थियों ने लेखक गाँव की अवधारणा एवं उसके सांस्कृतिक महत्व को भी निकट से जाना।

भ्रमण के तृतीय एवं अंतिम दिवस विद्यार्थियों ने पतंजलि विश्वविद्यालय एवं पतंजलि योगपीठ का भ्रमण किया। यहाँ स्वामी परमार्थ जी के मार्गदर्शन में योग के वैज्ञानिक, शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक महत्व की जानकारी प्राप्त की तथा भारतीय जीवन-दर्शन में योग की भूमिका को समझा। भ्रमण उपरांत सभी विद्यार्थी सायंकाल वंदे भारत एक्सप्रेस द्वारा लखनऊ के लिए रवाना हुए।
इस शैक्षिक भ्रमण का नेतृत्व प्रो. किरणलता डंगवाल ने किया। इस अवसर पर शिक्षा विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष एवं अधिष्ठाता प्रो. श्रवण कुमार भी विद्यार्थियों के साथ उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि ऐसे शैक्षिक भ्रमण विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, अनुभवात्मक अधिगम तथा भारतीय ज्ञान परंपरा की व्यवहारिक समझ को समृद्ध करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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