लखनऊ। नाट्य संस्था आकांक्षा थिएटर आर्ट्स, लखनऊ द्वारा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, नई दिल्ली के रिपेट्री ग्रान्ट वर्ष 2026-27 की प्रथम प्रस्तुति के रूप में आयोजित सुप्रसिद्ध मूल नाटककार अलवेयर कामू की नाट्य रचना तथा हिन्दी नाट्य रूपान्तरण शरद जोशी की नाट्य रचना ख्वाहिशें का नाट्य मंचन आज सायंकाल बौद्ध शोध संस्थान, में वरिष्ठ रंग निर्देशक प्रभात कुमार बोस, उ०प्र० संगीत नाटक अकादमी एवार्डी के कुशल निर्देशन में मंचित किया गया। कथानक के अनुसार सुप्रसिद्ध फ्रांसीसी नाटककार अल्वेयर कामू की मूल नाट्यय रचना एवं शरदचन्द्र द्वारा रूपांतरित कथानक के अनुसार मार्था अपनी माँ के साथ एक गेस्ट हाऊस का संचालन करते हैं। गेस्ट हाऊस में जितने भी लोग आकर ठहरते हैं,
इन दोनों माँ-बेटी द्वारा उन्हें जान से मारकर उनकी दौलत को लूट लेते थे। एक दिन उस गेस्ट हाऊस में क जॉन नाम का व्यक्ति जो कि विदेश से आकर वहा ठहरता है, और इसी प्रकार जॉन की पत्नी मारिया भी उसी गेस्ट हाऊस में आकर देखती है कि उसका पति जो कि विदेश से आकर उस गेस्ट हाऊस में ठहरता है, इसी प्रकार जॉन की पत्नी मारिया भी देख लेती है कि उसका पति किस गेस्ट हाऊस में ठहरा है।

जॉन तुरन्त मारिया को वहां से जाने के लिए कह देता है, उसके बाद मार्था द्वारा रजिस्टर में जॉन का नाम व पता दर्जी करते हुए मार्था जॉन से पूछती है कि वह इस गेस्ट हाऊस में अकेला ही रहेगा? वह जल्दी ह अपनी पत्नी मारिया के पास वापस चला जायेगा, जो कि विदेश में रहती है। भार्थी अपनी माँ को यह बताती है कि इस मुसाफिर को भी जल्दी से जल्दी मारकर उसकी लाश को ठिकाने लगाकर उसका सारा पैसा लूट लेगी, लेकिन उसकी माँ उसे रोकने का प्रयास करती है, लेकिन अपनी बेटी की इस जिद के आगे विवश हो जाती है। जब मार्था द्वारा जॉन को कॉफी पिलाती है तो उसमें जहर मिला होता है, जिसे पीते ही जॉन बेहोश होकर गिर पड़ता है, लेकिन जब उसका पासपोर्ट मार्था उठाकर माँ को देती है, उस पासपोर्ट को देखकर मार्था की माँ समझ जाती है कि उसकी बेटी ने जिसको जहर देकर मारा है, वह उसी का बेटा है। तब माँ मार्था को यह बतलाती है कि बचपन में घर छोड़कर तुम्हारा भाई चला गया था, यह वही मेरा बेटा और तुम्हारा भाई है।

इस सदमें को मार्था की माँ बरदाश्त नहीं कर पाती है और वह भी अपने जीवन का अन्त कर देती है। यहीं पर नाटक का समापन होता है। मार्था की माँ की भूमिका में दिव्यजीत गुप्ता, मार्था की भूमिका में आरोही गुप्ता, जॉन एक मुसाफिर की भूमिका में अंकुर सक्सेना एवं मारिया की भूमिका में मुस्कान सोनी द्वारा अपने सशक्त और भावपूर्ण अभिनय से रंग दर्शकों को भाव विभोर कर दिया।
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