लखनऊ , 21 मार्च , विश्व के प्रदूषित वातावरण को शुद्ध करने में वनों के अद्वितीय एवं अप्रतिम योगदान के प्रति अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को मूर्त रूप देने, वनों के संरक्षण व विकास तथा वृक्षारोपण को जन आंदोलन बनाने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 1980 में लिए गए निर्णय के अनुसार प्रत्येक वर्ष 21 मार्च, विश्व् वानिकी दिवस ( International Day of Forests ) मनाया जाता है। वर्ष 2013 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस दिवस को अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस के रूप में मनाये जाने का निर्णय लिया गया।
अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस (International Day of Forests) के अवसर पर उत्तर प्रदेश कैम्पा द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला अरण्य समागम राष्ट्रीय वानिकी संवाद का आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेशआज 21 मार्च.2026 को प्रातः 10:00 बजे इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में कार्यशाला का शुभारम्भ करेंगे।
कार्यशाला (International Day of Forests) के विशिष्ट अतिथि वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पर्यावरण, वन, जन्तु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन, उत्तर प्रदेश, श्री अरुण कुमार सक्सेना तथा वन राज्यमंत्री पर्यावरण, वन, जन्तु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन, उत्तर प्रदेश, के० पी० मलिक, प्रमुख सचिव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, उत्तर प्रदेश शासन, वी. हेकाली झिमोमी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष, सुनील चौधरी है। एक दिवसीय कार्यशाला (International Day of Forests) में सम्पूर्ण देश से आये वरिष्ठ वनाधिकारी प्रतिभाग कर रहे है।
वन एवं अर्थव्यवस्थाएं विषयवस्तु पर आधारित कार्यशाला (International Day of Forests) के तकनीकी सत्रों में देश के विभिन्न प्रदेशों में वानिकी के क्षेत्र में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों व अभिनव प्रयासों, वन प्रबन्ध का आधुनिकीकरण तथा डिजिटलीकरण, वन क्षेत्र के निकटवर्ती क्षेत्रों में मानव वन्यजीव संघर्ष नियंत्रित करने हेतु उपायों तथा वनीकरण व वन्यजीव संरक्षण के लिए कैम्पा से प्राप्त धनराशि का प्रभावी उपयोग विषयों पर विचार विमर्श किया जाएगा।
वन, वन्यप्राणी, वृक्ष, वेटलैण्ड्स सहित समस्त प्राकृतिक संसाधन हमारे जीवन के अभिन्न अंग है। हमारे वन न केवल पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है अपितु अर्थव्यवस्था तथा निर्धन, निर्बल व वंचित वर्गों के लिए आजीविका के साधन, ईंधन प्रकाष्ठ विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चाथ माल तथा ईको-पर्यटन गतिविधियों के प्रमुख केन्द्र भी हैं। इन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभों के कारण वन हमारी अर्थव्यवस्था के सुदृढ आधार भी हैं। इस दृष्टि से अन्तर्राष्ट्रीय वन दिवस 2026 की विषयवस्तु “Forests and economies (वन एवं अर्थव्यवस्थाएँ)” अत्यन्त प्रासंगिक है।
वन आधारित उद्योग प्रदेशवासियों को आजीविका व रोजगार के संसाधन उपलब्ध करवा रहे है। हमारी सरकार द्वारा वनाधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देने हेतु नियमों का सरलीकरण, कानून व्यवस्था सुदृढ कर उद्यमियों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध करवाने तथा वनाधारित उद्योगों को कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के परिणामस्वरूप विगत 09 वर्षों में प्रदेश में 2467 से अधिक वनाधारित उद्योग स्थापित हुए है।
विगत 09 वर्षों में व्यापक जन सहभागिता व अन्तर्विभागीय समन्वतय से 243 करोड़ से अधिक पौधे रोपित किए गए है। वृहद स्तर पर वृक्षारोपण, वन सुरक्षा व वन विस्तार के परिणाम स्वरूप प्रदेश के वनावरण व वृक्षावरण में वृद्धि प्राकृतवास में सुधार तथा राष्ट्रीय पशु बाघ, राष्ट्रीय धरोहर हाथी, राष्ट्रीय/जलीय जीव डॉल्फिन, राज्यपक्षी सारस व गिद्धों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
International Day of Forests : प्रदेश में वृहद वृक्षारोपण के कार्यक्रम के अन्तर्गत 05 जून विश्व पर्यावरण दिवस, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी बलिदान दिवस तथा वन महोत्सव के अवसर पर वृक्षारोपण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण रेन वाटर हारवेस्टिंग, प्लास्टिक मुक्त परिवेश आदि विषयों पर जन जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाता है।
प्रदेश में व्यापक नदी पुनरोद्धार हेतु नदियों के दोनों किनारों पर एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर तथा राष्ट्रीय राज्य राजमार्ग व अन्य मार्गों पर उपयुक्तक प्रजाति के पौधों के रोपण को प्राथमिकता दी गयी। वृक्षारोपण अभियान के अन्तर्गत विशिष्ट वनों यथा अटल वन एकलव्य वन, गोपाल वन, त्रिवेणी वन, ऑक्सी वन, शौर्य वन आदि की स्थापना की गयी।
वृक्षारोपण अभियान में सास्कृतिक कार्यक्रमों नुक्कड़ नाटकों एवं संगोष्ठियों के माध्यम से पूरे प्रदेश में आम जन मानस को जोडकर उत्सव के रूप में मनाते हुए एक जन-आन्दोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। कृषकों को वृक्षारोपण कार्यक्रमों से जोड़कर पौधरोपण व रोपित पौधों को संरक्षित कर व़ृक्ष का रूप धारण करने में सहयोग देने के लिए प्रेरित करने व कृषकों की आय में वृद्धि हेतु कार्बन फाइनेंस प्रोजेक्ट के माध्यम से अर्जित कार्बन क्रेडिट के लिए कृषकों को धनराशि वितरित की जा रही है। ऐसा करने वाला उत्तर प्रदेश देश का प्रथम राज्य है।
