
बिलासपुर. इतिहास लिखने के लिए सत्यता की दृष्टि रखनी होगी। सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास न करते हुए तथ्यों की जानकारी के साथ इतिहास का लेखन हो। आजादी की लड़ाई समाज के हर वर्ग की लड़ाई थी।
यह विचार मुख्य अतिथि संजय मिश्र राष्ट्रीय सह-संगठन सचिव अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना नई दिल्ली ने गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में आयोजित ंसंगोष्ठी में व्यक्त किए। यह कार्यक्रम गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (केन्द्रीय विश्वविद्यालय) में भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित गुरू घासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर एवं भारतीय इतिहास संकलन समिति छत्तीसगढ़ प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में ”स्वातंत्रय समर और छत्तीसगढ”़ विषय पर आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर आयोजित किया गया था। समापन सत्र में मुख्य अतिथि संजय मिश्र राष्ट्रीय सह-संगठन सचिव अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना नई दिल्ली, विशिष्ट अतिथि डॉ. ओमजी उपाध्याय निदेशक भारतीय इतिहास अनुसंधान नई दिल्ली, अधिष्ठाता सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ प्रो. मनीषा दुबे, संयोजक प्रो. प्रवीन कुमार मिश्र विभागाध्यक्ष इतिहास विभाग एवं डॉ. नितेश कुमार मिश्रा मौजूद रहे।
समापन सत्र में विशिष्ट अतिथि डॉ. ओमजी उपाध्याय निदेशक भारतीय इतिहास अनुसंधान नई दिल्ली ने कहा कि विदेशियों द्वारा प्रचारित यह विचार कि भारत मात्र एक भौगोलिक इकाई है सबसे बड़ा झूठ है। हमें इस झूठ से बाहर निकलना होगा। मैकाले के सिद्धांत से भारतीय शिक्षा का सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। हम देव संस्कृति के लोग हैं। हमारा इतिहास प्राचीनतम है।
समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो. मनीषा दुबे अधिष्ठाता सामाजिक विज्ञान विद्यापीठ ने कहा कि भाषा इतिहास में अहम भूमिका निभाती है। इसलिए हमें अपनी निज भाषा को विकसित करना होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में जो बातें भारतीय ज्ञान परंपरा को दी गई हैं वो अहम जिम्मेदारी इतिहासकारों की है। इस नीति में मानव को संपूणज़् मानव बनाने का प्रयास किया गया है। इस अवसर पर संगोष्ठी के संयोजक प्रो. प्रवीन कुमार मिश्र विभागाध्यक्ष इतिहास विभाग ने दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने संगोष्ठी के सफल आयोजन हेतु सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। अतिथियों का शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में समस्त विद्यापीठों के अधिष्ठातागण, विभागाध्यक्षगण, शिक्षक, शोधार्थी एवं अन्य राज्यों से 60 प्रतिभागी शामिल हुए।
