लखनऊ, 25 मार्च , डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय (Dr Shakuntala Misra National Rehabilitation University) के अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषा विभाग द्वारा दिनांक 24–25 मार्च 2026 को प्रो. वी. के. सिंह के संयोजन, डॉ. विपिन कुमार पांडे के सह-संयोजन एवं डॉ कविता त्यागी, डॉ प्रज्ञा श्रीवास्तव, डॉ प्रार्थना वर्धन की देख रेख में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला अत्यंत गरिमामय एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस कार्यशाला ने अपने उच्च शैक्षणिक स्तर, सारगर्भित विमर्शों एवं विद्वत् उपस्थिति के माध्यम से विश्वविद्यालय की अकादमिक प्रतिबद्धता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।

कार्यशाला में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से पधारे विद्वानों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए शोध पद्धति एवं अकादमिक लेखन के समकालीन आयामों पर गहन चिंतन-विमर्श किया। यह आयोजन शोध की गुणवत्ता, मौलिकता तथा बौद्धिक अनुशासन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।

Dr Shakuntala Misra National Rehabilitation University: प्रथम दिवस के मुख्य अतिथि प्रो. आर. बी. शर्मा (अंग्रेजी एवं आधुनिक यूरोपीय भाषा विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय) ने अपने उद्बोधन में मानविकी शोध के बदलते परिप्रेक्ष्य, नवोन्मेषी दृष्टिकोण तथा पद्धतिगत कठोरता की अनिवार्यता पर प्रकाश डालते हुए शोध को अधिक प्रासंगिक एवं उत्तरदायी बनाने पर बल दिया। मुख्य वक्ताओं प्रो. ओ. एन. उपाध्याय (भूतपूर्व विभागाध्यक्ष, अंग्रेजी एवं आधुनिक यूरोपियन भाषाएं, लखनऊ विश्वविद्यालय),एवं प्रो. एच. सी. हजेला(जे.एन. एम.पी.जी.कॉलेज, लखनऊ)ने शोध-डिज़ाइन की सूक्ष्मताओं, पाठ-चयन की विवेकशीलता, सैद्धांतिक रूपरेखाओं की उपयुक्तता तथा समालोचनात्मक दृष्टि के विकास पर अत्यंत प्रभावी एवं मार्गदर्शक विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने शोध में मौलिकता एवं बौद्धिक ईमानदारी को सर्वोपरि बताया।

