
ओमप्रकाश वर्मा जी की चर्चित कविता
हमन छत्तीसगढ़िया किसान
हमन छत्तीसगढ़िया किसान
सबे जीव हमर हे मितान।
धरती दाई के सेवा ल करथन
मेहनत कर अन उप जाथन।
नागर बैईला हमर चिन्हारी
खेती खार हमर जिन्दगानी।
नई मारन हम झुठ लबारी
दया मया के हे कलेजा भारी
पहुना ल हम देवता मानथन
आनी बानी के नेवता करथन
ये भुईयां के हम पुजारी आन
अही म हे हमर परान।
धान चना राहेर उपजाथन
आनी बानी के साग उगाथन।
छोटक कुरीया म रात पहाथन
होत बिहनिया खेत जाथन।
बेरा उतरत घर आथन
अपने अपन म मगन रईथन
ज़िंदगी अपन गढ़त रईथन।
पढ़ाई लिखाई अब सीखत हन
सही ग़लत ल समझत हन।
नवा इतिहास अब गढ़त हन
पहचान अपन बनावत हन
मेहनत करके आगु बढ़बो
धरती मां के सेवा करबो
छत्तीसगढ़ बड़ खान हे
जेकर लईका सब महान हे।
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जय जय हो मोर छत्तीसगढ़ महतारी।
ओमप्रकाश वर्मा
सेमरताल, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
