रायपुर. कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने छोटे बच्चों विशेषकर 5 से 8 वर्ष के बच्चों को उनकी माताओं के माध्यम से शिक्षा-दीक्षा की गतिविधियों से जोड़े रखने की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग ने बीते शिक्षा सत्र में नौनिहालों को शिक्षा से जोड़े रखने के लिए संचालित अंगना म शिक्षा कार्यक्रम (Angana Ma Siksha) की सफलता को देखते हुए इसे निकट भविष्य में और प्रभावी ढंग से संचालित करने में जुट गया है। इसी उद्देश्य को लेकर अंगना म शिक्षा कार्यक्रम की रिसोर्स पर्सन महिलाओं के माध्यम से सभी जिलों के डीएमसी, एपीसी से लेकर बीआरसीसी जिलों एवं ब्लॉकों के स्रोत शिक्षक सहित समस्त शिक्षकों के लिए माता उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित हुआ।
राज्य स्तर की स्रोत महिला शिक्षकों ने दी जानकारी
इस वेबीनार में राज्य स्तर की स्रोत महिला शिक्षकों द्वारा अलग-अलग पहलुओं पर जानकारी दी गई। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. एम. सुधीश ने कार्यक्रम और निपुण भारत कार्यक्रम के अनुसार कक्षा तीसरी तक के बच्चों के लिए लक्ष्य को भी अंगना म शिक्षा कार्यक्रम से जोड़कर उन उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए पहल करने की बात कही। बिलासपुर संभाग से सीमा मिश्रा ने कार्यक्रम की प्रस्तावना, सरगुजा संभाग से प्रमिला कुशवाहा ने निपुण भारत मार्गदर्शिका पर बात रखी, जिसमें कक्षा तीसरी तक के बच्चों की आधारभूत दक्षता के लक्ष्य को बताया।
निपुण भारत कार्यक्रम मे भाषा विकास की गतिविधियों को बस्तर संभाग से आशा कुरैशी द्वारा बताया गया तथा उसमें गणित के विकास पर गतिविधियों की बात दुर्ग संभाग से नीलम कौर द्वारा दी गई। तत्पश्चात रायपुर संभाग से रीता मंडल द्वारा नियोजन व संचालन की विस्तृत जानकारी दी, जिसमें बच्चों की माताओं को 10-10 के समूह में अलग-अलग दिनों में स्कूलों में बुलाकर शिक्षक छोटी-छोटी गतिविधियां करके दिखाएंगे और उन्ही गतिविधियों को माताओं के द्वारा बच्चों के साथ घर पर किया जाएगा।
प्रदीप के द्वारा राज्य से प्राप्त पालक संदर्शिका, हमर लइका हमर जिम्मेदारी जो प्रत्येक स्कूलों को 21-21 प्रतियां दी गयी है, के अलग-अलग मॉडयुल का विश्लेषण कर बताया गया। ताराचंद जयसवाल द्वारा कोरोना से सुरक्षा पर बातें रखी गई तथा आशुतोष पांडे द्वारा टेलीग्राम समूह अंगना म शिक्षा के माध्यम से सभी माताओं को और सभी शिक्षकों को जोडऩे कहा गया।
