- यहां पीएम आवास नहीं बन रहा है एटीआर क्षेत्र होने से, सड़क भी जर्जर है,
रायपुर , 04 जुलाई , छत्तीसगढ़ के मुगेली जिले की ग्राम पंचायत लमनी के आश्रित 5 गांव हैं- लमनी ,अतरिया, रंजकी, बिरारपानी और छीरहट्टटा हैं. वैसे जंगल के किनारे बसे इन सभी गाँवों में तमाम तरह की समस्याएं हैं लेकिन गांव बिरारपानी में समस्याओं की भरमार है . यहाँ जीवन बहुत ही मुश्किल है , ये गांव पंचायत मुख्यालय से 13 किमी की दूरी पर चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ है , दुर्गम जगह पर स्थित है , यहां सरकारी सुविधा 108, 112 की गाड़ी नहीं पहुंच सकती है, इस गांव में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगाओं की कुल 26 परिवार निवास करती है, यहां के 2 – 4 लोगों के पास मोटरसाइकल है जिससे वे बड़ी मुश्किल से आना जाना करते हैं .

यहाँ के लोगों के जीवन की दिनचर्या की बात करें तो यहां के लोग गाय, भैंस व बकरी पालते हैं, खेती में मक्का, ज्वार, कुटकी, धान, कोदो की फसल बोते हैं और वनोपज में जंगल से प्राप्त तेंदू, चार, मुसली, तिखूर, महुआ , सराई धूप, से जीवन यापन करते हैं, यहां जंगली जानवरों से भी सामना करना पड़ता है जैसे नकुंजल बाघ, भालू, तेंदुआ, चीता , हाथी और नीलगाय, बारासिंघा, हिरण आदि देखने को मिलते हैं , यह गांव मध्य प्रदेश से लगा हुआ है. मध्य प्रदेश के गांव बंगला दादर,चौरादादर, तरवरटोला एव छत्तीसगढ़ के गांव रंजकी, छीरहट्टा , राजक, लमनी हैं .

CG Tribal Village Lamni News : अनगिनत समस्याएं हैं बिरारपानी ( CG Tribal Village Lamni ) अनगिनत समस्याएं हैं बिरारपानी में , 108 व 112 की गाड़ी नहीं पहुंच सकती में , 108 व 112 की गाड़ी नहीं पहुंच सकती यहां नाग बहरा नामक स्थान पर प्राचीन काल से पत्थर की नाग का सिर भाग हैं और गांव की कुछ दुरी पर मेंडरीसराई हैं जो भारत की पेड़ो में 2या 3 स्थान था इसके बारे में बताया जाता है कि ठेकेदार के द्वारा इस पेड़ को आरा से कटाई किया गया तो पेड़ से खून निकलने लगा और आरा वही चिपक गया उसकी मोटाई के बारे में गांव की भाषा में कहा जाता है कि 12 बइला के फेर तक था, इस गांव में प्रत्येक सावन माह में बोल बम की नारा कुंजता है जहां 1माह तक कावरियो का आना जाना रहता है यहां एक रात विश्राम करते हैं .
लमनी ग्राम पंचायत के सचिव निराज कुमार सप्रे को अपने निवास स्थान से अति प्रेम है. दुर्गम भौगोलिक स्थिति होने के बावजूद बावजूद भी वह अपने जीवको पार्जन और सामाजिक जीवन में प्रसन्न रहते हैं, उनका कहना है कि सरकारी सुविधा वहां विकसित की गई , है किंतु आवागमन की सुविधा अभी भी संतोषजनक नहीं है , जिसके कारण उनका आपातकाल में अस्पताल, स्कूल, न्यायालय, थाना पहुंचने में या रिश्तेदारों के यहां पहुंचने में असुविधा होती है। उन्होंने कहा अगर ये सुविधा मिल जाती हैं तो ग्रामीणों को काफी लाभ होगा ,

अतरिया की विशेषता –
इस गांव में कुछ दूर पर भैरो सांग नामक स्थान है जहां एक मंदिर है और लमनी वाला नाग का पूछ यहां दिखाता है. रंजकि में कचन्दीक्षार झरना है. बिरारपानी में रक्क्षा क्षार झरना है उसके ऊपर 5 km की दुरी में टंगली पठार है जहा से अचानकमार अभियारण्ड के सभी गांव के संपर्क हेतू वायरलेस सेट है. छीरहटा में उड़न गिलहरी देखा गया है, यहां पीएम आवास नहीं बन रहा है एटीआर क्षेत्र होने से सड़क की समस्या है रोड जर्जर हो गया है,
पंडित रवि शंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के एसोसिएट प्रोफेसर और प्रख्यात भूगोलवेत्ता पीएल चंद्राकर ने बताया कि भौगोलिक दृष्टि से कई गांव दुर्गम क्षेत्र में बसे हुए हैं और इस कारण सरकार की योजनाएं धीरे-धीरे पहुंचती हैं. इसलिए लोगों को लाभ कम मिल पाता है. प्रयास यह होना चाहिए कि दुर्गम और पहुंच विहीन क्षेत्र में स्थित गांव में विकास के लिए और कल्याणकारी योजनाओं के लिए एक त्वरित सम्यक और प्रभावी कार्य योजना बनाई जानी चाहिए ताकि वहां कम से कम शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन की सुविधा आवश्यक रूप से पहुंचे . उन्होंने कहा कि सरकारी प्रयास हो रहे हैं लेकिन ऐसे गांव तक पहुंचने में समय लग रहा है इसलिए प्रभावी प्रयास करने जरूरी हैं,

जानिये ग्राम का डिटेल
जनपद पंचायत – लोरमी
ग्राम पंचायत -लमनी
आश्रित ग्राम -बिरारपानी
ग्राम पंचायत की आबादी -1776
ग्राम की जनसंख्या 200
