
- सी के महिलांगे ने कहा कि समस्या से रूबरू होने वाले शिक्षक ही हैं ना कि अधिकारी . अधिकारी केवल दिशा निर्देश दे रहे हैं लेकिन इन पर अमल करने वाले शिक्षकों को सामने कई तरह की विसंगतियों और चुनौतियां हैं .
- युक्तियुक्तिकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जमीनी हकीकत कड़वाहट से भरी हुई दिख रही है . न केवल बिलासपुर और रायपुर बल्कि प्रदेश के कई जिलों में विद्यालयों में शिक्षकों की जरूरत के अनुपात में उपलब्धता नहीं हो पाई है .
रायपुर / बिलासपुर , 20 जुलाई , छत्तीसगढ़ में शासकीय शालाओं में शिक्षकों की युक्तियुक्ति करण के दौरान विभिन्न शिक्षक संगठनों द्वारा उठाई गई आपत्तियों को अनदेखा करने वाले अधिकारियों के खिलाफ तो किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं हुई है लेकिन इससे प्राथमिक शिक्षा में पहले से व्याप्त समस्याओं को अब तक दूर नहीं किया जा सका है . शासन स्तर से यह तर्क दिया जा रहा था कि युक्तियुक्तिकरण से न केवल शिक्षकों की बेहतर अनुपात में नियुक्ति हो सकेगी बल्कि विद्यार्थियों को भी शिक्षकों की उपलब्धता आसानी से हो जाएगी और विद्यालयों में पठन-पाठन का माहौल बन सकेगा लेकिन युक्तियुक्तिकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जमीनी हकीकत कड़वाहट से भरी हुई दिख रही है . न केवल बिलासपुर और रायपुर बल्कि प्रदेश के कई जिलों में विद्यालयों में शिक्षकों की जरूरत के अनुपात में उपलब्धता नहीं हो पाई है .
ऐसे में जाहिर सी बात है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और इससे उनका भविष्य अधर में फंस जाएगा . छत्तीसगढ़ प्रधान पाठक कल्याण संघ के संरक्षक एवं पूर्व अध्यक्ष सी के महिलाएं का कहना है कि युक्तियुक्ति कारण प्रक्रिया से पहले सरकार को चाहिए था कि सभी स्तर के शिक्षक संगठनों से वार्तालाप करके एक आदर्श स्थिति तैयार की जाती आदर्श योजना तैयार की जाति और फिर इस योजना पर अमल करके अगर शिक्षकों का युक्तियुक्तिकरण किया जाता तो शायद स्थिति आज के मुकाबले बेहतर होती .
सी के महिलांगे ने कहा कि समस्या से रूबरू होने वाले शिक्षक ही हैं ना कि अधिकारी . अधिकारी केवल दिशा निर्देश दे रहे हैं लेकिन इन पर अमल करने वाले शिक्षकों को सामने कई तरह की विसंगतियों और चुनौतियां हैं . उन्होंने कहा कि आज भी शिक्षकों से जुड़े वेतन , प्रमोशन की तमाम विसंगतिया भरी पड़ी हैं और सरकार का इन विसगतियों की ओर जरा भी ध्यान नहीं है . सी के महिलांगे ने शासन प्रशासन से मांग की है कि शिक्षकों की समस्याओं को समाधान करने का आश्वासन देने की बजाय शिक्षकों की सभी समस्याओं पर समान रूप से विचार कर उनका एकमुश्त समाधान किया जाए ताकि शिक्षक बिना किसी मानसिक तनाव के शिक्षण कार्य करके गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान कर सके.
सी के महिलांगे ने कहा कि पिछले कई दिनों से मीडिया में तरह-तरह की समाचार आ रहे हैं , जिनमें शासकीय शालाओं की स्थिति के बारे में जानकारी दी जा रही है और यह केवल प्रदेश के लिए बल्कि भावी पीढ़ी के लिए भी काफी नुकसानदेह है . उन्होंने उम्मीद जताई है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी अपने बेरूखी रवैया को छोड़कर शिक्षकों के सम्मान के साथ समस्याओं का समाधान निकालने की कोशिश करेंगे.
