
बिलासपुर। गुरू घासीदास विश्वविद्यालय (केन्द्रीय विश्वविद्यालय) छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक लोक कलाओं, गौरवशाली ऐतिहासिक धरोहरों और वैभवशाली इतिहास को संरक्षित करने का कार्य कर रहा है। विश्वविद्यालय में गठित अकादमिक प्लानिंग, डेवेलपमेंट एंड मॉनिटरिंग बोर्ड विश्वविद्यालय को स्वावलंबी समावेशी विकास का केन्द्र के रूप में स्थापित करेगा। यह वक्तव्य विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति महोदय प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल ने अकादमिक प्लानिंग, डेवेलपमेंट एंड मॉनिटरिंग बोर्ड की दिनांक 25 मई, 2022 को सुबह 10 बजे प्रशानिक भवन के सभा कक्ष में आयोजित पहली बैठक में दिया।
बैठक का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्ष अर्पित करने से हुआ। बैठक में स्वागत उद्बोधन पश्चात एपीडीएमबी के सदस्य एवं विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (विकास अनुभाग) प्रो. मनीष श्रीवास्तव ने विषय का प्रवर्तन किया।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय में तीव्र गति से अकादमिक, शोध, अनुसंधान एवं नावाचार क्षेत्र में विकास हो रहा है। पदभार ग्रहण करने के पश्चात से मेरा प्रयास है कि हमारे विद्यार्थी स्वावलंबन के पथ पर अग्रसर होकर छत्तीसगढ़ को सशक्त बनायें। उन्होंने कहा कि अकादमिक प्लानिंग, डेवेलपमेंट एवं मॉनिटरिंग बोर्ड स्वावलंबी छत्तीसगढ़ की योजना पर विस्तार से कार्य कर रहा है जिसमें हर क्षेत्र के विषय विशेषज्ञों के द्वारा सकारात्मक एवं सजृनात्मक सुझाव दिये जा रहे हैं।
अकादमिक प्लानिंग, डेवेलपमेंट एवं मॉनिटरिंग बोर्ड के सदस्य एवं विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (विकास अनुभाग) प्रो. मनीष श्रीवास्तव ने बैठक में विभिन्न बिंदुओं को सदस्यों के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत किया। विभिन्न सस्थाओं से किये गये एमओयू, नये विभागों को खोले जाने, सीएसआर पॉलिसी, बायो रिसर्च डेवेलमेंट एंड ट्रेनिंग सेंटर खोले जाने, सेंट्रल रिसर्च फैसेलिटीज खोले जाने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप अधोसंरचना विकास से संबंधित योजना, महिमा गुरु पीठ की स्थापना एवं स्वावंलंबी छ्तीसगढ़ के विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
अकादमिक प्लानिंग, डेवेलपमेंट एवं मॉनिटरिंग बोर्ड का उद्देश्य समय-समय पर अल्पावधि/दीर्घावधि की योजनाओं की समीक्षा एवं आवश्यक सुझाव प्रस्तुत करना है
