
कोण्डागांव. जिले में लगातार सूखे राशन के वितरण एवं महापुरुषों के छायाचित्र के बाजार मूल्य से अधिक दर पर स्कूलों को वितरण किए जाने की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने दोनों ही मामलों हेतु एसडीएम के द्वारा जांच के निर्देश दिए थे। जिसकी जांच रिपोर्ट आने पर कलेक्टर ने जांच प्रतिवेदन के अनुसार प्राथमिक तौर पर कोण्डागांव के बीईओ एवं बीआरसी को उचित कार्यवाही ना करते हुए योजनाबद्ध रूप से वित्तीय अनियमितता हेतु पद से पृथक्कीरण के निर्देश दिए हैं।
जिसके तहत कोण्डागांव में प्रभारी विकास खंड शिक्षा अधिकारी के रूप में पदस्थ व्याख्याता संदीप श्रीवास्तव एवं बीआरसी कोण्डागांव के रूप में पदस्थ प्रधान पाठक अवधेश पांडे को तत्काल प्रभाव से अपने पदों से पृथक करते हुए उनकी मूल स्थापना में पदस्थ कर दिया गया है। जिसके पश्चात संदीप श्रीवास्तव को उनकी मूल स्थापना शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सोनाबाल एवं अवधेश पांडे को शासकीय उच्च माध्यमिक शाला बोलबोला में पदस्थ किया गया है।
ये है पूरा मामला
उल्लेखनीय है कि लिखित शिकायतों के माध्यम से कोण्डागांव के विभिन्न स्कूलों में महापुरुषों के छायाचित्र बाजार मूल्य से अधिक दर पर बिना किसी शासकीय आदेश के प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में भेज कर बिलों के भुगतान हेतु दबाव डाले जाने के संबंध में जानकारी प्राप्त हुई थी। उसकी जांच में पाया गया कि योजनाबद्ध तरीके से इस वित्तीय अनियमितता हेतु कार्य किया गया था। वहीं सूखे राशन के वितरण हेतु भी लिखित शिकायत प्राप्त होने पर कलेक्टर ने जांच हेतु निर्देशित किया था। जिसकी जांच में सुखा राशन वितरण में भी गंभीर अनियमितताओं की शिकायत को सही पाया गया।
निलंबन की लटक रही तलवार
जिस पर कलेक्टर ने पद पृथक्कीरण के पश्चात बस्तर संभाग के आयुक्त को पत्र द्वारा बीईओ एवं बीआरसी को जांच प्रतिवेदन के आधार पर गंभीर आरोपों का दोषी मानते हुए निलंबित करने हेतु प्रस्ताव प्रेषित किया है। इसके अतिरिक्त कलेक्टर ने सभी विकास खंडों में हो रहे खाद्यान्न वितरण की जांच हेतु एसडीएम स्तर पर जांच के निर्देश दिए हैं।
हक छीनने वालों पर हो कार्रवाई
उधर इस कार्रवाई को छत्तीसगढ़ प्रधान पाठक कल्याण संघ ने सही ठहराया है। गरीब बच्चों का हक छीनने वालों पर कार्रवाई होनी ही चाहिए । सी के महिलांगे प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रधान पाठक कल्याण संघ ने कहा कि इस तरह की शिकायतों की सघन जांच करके उक्त प्रकार से दंडित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को सभी सुविधाएं बिना किसी देरी के मिलनी चाहिए।
