- योगकुलम् के स्थापना दिवस पर “योग तरंग महोत्सव” का आयोजन, 100 से अधिक योग शिक्षकों एवं साधकों का हुआ सम्मान
लखनऊ। योग शिक्षा एवं योग शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान योगकुलम् ने अपने स्थापना दिवस के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ में भव्य “योग तरंग महोत्सव : सिद्ध साधकों का उत्सव” आयोजित किया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न स्थानों से आए योगकुलम् के पूर्व विद्यार्थियों, योग शिक्षकों और साधकों को योग के माध्यम से समाज में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
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कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय रामकथा वाचक एवं मुख्य अतिथि दिलीप शुक्ला भाईश्री, यूनिवर्सल बुकसेलर्स के चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, उत्तम पौरवाल तथा योगकुलम् के शिक्षकगण, टीम सदस्य और विभिन्न स्थानों से आए साधक उपस्थित रहे। शिक्षकगणों में डॉ. आकांक्षा, ऋतिक गुप्ता, योगी ज्वाला, दीपक जी, दिव्यांश जी, डोली देवी जी सहित अन्य शिक्षक एवं टीम सदस्य भी शामिल रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण के साथ हुआ। इसके पश्चात योगकुलम् के साधकों द्वारा योग प्रस्तुतियां दी गईं, जिन्होंने योग, अनुशासन और भारतीय जीवन-मूल्यों का संदेश दिया।

इस अवसर पर 100 से अधिक योग शिक्षकों एवं साधकों को सम्मानित किया गया। इनमें विकास सिंह राजपूत, अमृता गुप्ता, , शिखर मेहरोत्रा, दिशा, राहुल, श्वेता, दिव्या, प्रज्ञा, मीनू, शिखा, नेहा, बीजेंद्र, पुनीत जी सहित अनेक योग शिक्षक और साधक शामिल रहे। योगकुलम् के शिक्षकगणों में दीपक जी, दिव्यांश जी, डोली देवी जी सहित अन्य शिक्षक एवं टीम सदस्य भी उपस्थित रहे।
सम्मानित साधकों में कई लोग अपने योग केंद्र संचालित कर रहे हैं, ऑनलाइन एवं ऑफलाइन योग कक्षाएं चला रहे हैं, गांवों तथा स्थानीय समुदायों तक योग पहुंचा रहे हैं और निःशुल्क योग सत्रों के माध्यम से समाज के जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रहे हैं। समारोह में साधकों के संघर्ष, जीवन में आए बदलाव और समाज-सेवा से जुड़े अनुभवों ने सभागार को अनेक बार भावुक किया।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण “योगसेतु” का आधिकारिक शुभारंभ रहा। योगसेतु का शुभारंभ योगकुलम् के संस्थापक डॉ. मनीष प्रताप सिंह एवं मुख्य अतिथि दिलीप शुक्ला भाईश्री द्वारा किया गया। डॉ. मनीष प्रताप सिंह ने बताया कि योगसेतु एक डिजिटल मंच है, जहां योग सीखने के इच्छुक लोग अपने शहर में सत्यापित योग शिक्षक खोज सकेंगे, अपनी आवश्यकता साझा कर सकेंगे और सीधे उनसे जुड़ सकेंगे। यह पहल योग शिक्षकों को अवसरों से जोड़ने तथा लोगों तक विश्वसनीय योग शिक्षा की पहुंच बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
महोत्सव में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी समां बांधा। मरुत तिवारी एवं उनकी टीम द्वारा वाद्य संगीत और शास्त्रीय गायन की प्रस्तुतियां दी गईं। कथक नृत्य प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को भारतीय सांस्कृतिक रंग प्रदान किया।

योगकुलम् के संस्थापक डॉ. मनीष प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि योग शिक्षा का उद्देश्य केवल प्रमाणपत्र प्राप्त करना नहीं, बल्कि साधक को नियमित अभ्यास, आत्मानुशासन, स्वाध्याय, आत्मनिर्भरता और समाज के प्रति जिम्मेदारी के लिए तैयार करना है। उन्होंने योगकुलम् के मूल सूत्र “जागो, जुड़ो, बदलो” के माध्यम से साधकों को अपनी क्षमता के प्रति सजग होने, परिवार एवं समाज से जुड़े रहने तथा योग के ज्ञान को जीवन और सेवा में उतारने का संदेश दिया।

डॉ. सिंह ने अपनी यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि सफलता के बाद भी परिश्रम, सीखने की इच्छा और साधना का क्रम नहीं रुकना चाहिए। उन्होंने साधकों से आह्वान किया कि वे केवल योग सिखाने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने कार्य के माध्यम से लोगों के जीवन में स्वास्थ्य, संतुलन और सकारात्मक परिवर्तन लाएं।
योगकुलम् ने प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद भी अपने विद्यार्थियों और योग शिक्षकों को मार्गदर्शन, मंच, अवसर एवं सहयोग प्रदान करते रहने की प्रतिबद्धता दोहराई। डॉ. मनीष प्रताप सिंह ने वर्ष 2030 तक एक लाख योग शिक्षकों को तैयार करने तथा योग शिक्षा को भारत के घर-घर तक पहुंचाने के संस्था के संकल्प को भी दोहराया।
भैया
