लखनऊ शहर के एक इंटर कॉलेज का भवन जर्जर हो जाने विद्यालय बंद करने का फैसला और उसके बाद वहां के विद्यार्थियों और शिक्षकों के समायोजन को लेकर काफी कुछ हल किया जा चुका है , लेकिन इस पूरे प्रकरण में शुरू से ही नेतागिरी हावी रही है, इसकी वजह यह है कि इस विद्यालय के प्रबंधक एक शिक्षक संघ के बड़े नेता के रिश्तेदार हैं और इसलिए शिक्षक नेता के दबाव में शिक्षा विभाग के अधिकारी चाह कर भी ठोस कार्रवाई नहीं कर सके, परिणाम यह हुआ कि विद्यालय में टीचिंग स्टाफ को परेशान भी किया गया अब प्रबंधक के हाथ से जब पूरा विद्यालय निकल चुका है तो उसे अपने किए पर पश्चाताप भी हो रहा है और सबसे बड़ी पश्चाताप वे कर्मचारी कर रहे हैं जो प्रबंधन की कठपुतली बनकर टीचिंग स्टाफ को परेशान किया करते थे और विद्यालय के बजाय घरेलू कामों को करना ही अपनी पहली ड्यूटी समझते थे.
एक-दो दिन टीचिंग स्टाफ का नए विद्यालय में समायोजन हो जाएगा जबकि विद्यार्थियों के प्रवेश अन्य विद्यालयों में हो चुके हैं, अब देखना यह है महत्वपूर्ण होगा कि इस विद्यालय के टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को नए विद्यालय में किस प्रकार काम करने का माहौल मिलता है और वह क्या अपनी पुरानी आदतों को छोड़कर नई सुबह की तरह अपने उज्जवल भविष्य और विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य के लिए काम करेंगे चर्चा यह भी है कि शिक्षकों के समायोजन का श्रेय लेने के लिए शिक्षक संघ के दो गुटों में काफी होड़ मची हुई है लेकिन कुछ भी हो कम से कम शिक्षकों – विद्यार्थियों का नुकसान तो नहीं हुआ है.
राजधानी लखनऊ में जब से नए जिला विद्यालय निरीक्षक ने कार्यभार संभाला है, तब से उन्हें अपने घेरे में लेने के लिए शिक्षा भवन के कर्मचारी लगातार प्रयास कर रहे हैं , वह सब खास बनने के लिए वे सारे उपाय कर रहे हैं जो अब तक करते हुए जिला विद्यालय निरीक्षकों को अपनी जेब में रखें घूमते थे . विद्यालयों के वेतन भुगतान, एरिया भुगता, न प्रमोशन , वेतनमान सहित कई मामलों की फाइलें अभी जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में रखी हुई है . शिक्षक परेशान होकर आगे पीछे घूम रहे हैं लेकिन बाबू थोड़ा इंतजार करो कि तर्ज पर काम रूके हुए हैं . उन्हें लग रहा है कि जिला विद्यालय निरीक्षक का रुख देखने के बाद ही इन फाइलों को आगे बढ़ाया जाएगा . कर्मचारियों के अलावा शिक्षक नेताओं में भी अपना प्रभाव बनाने की कवायद चल रही है क्योंकि अगर जिला विद्यालय शिक्षक पर दबाव बना तो लखनऊ के सभी विद्यालयों में शिक्षक संगठन का दबाव बनेगा कि फलां शिक्षक नेता ही जिला विद्यालय निरीक्षक से हमारे काम कर सकता है. बहरहाल अभी तो नए जिला विद्यालय निरीक्षक राजधानी की हवा पानी देख रहे हैं और फूंक फूंक कर कदम रख रहे हैं . आने वाले दिनों में देखना महत्वपूर्ण होगा कि कामकाज पूर्ववर्ती की तरह करते हैं या अभी कोई कामकाज की नयी लकीर खींचते हैं
लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि सहित कई मुद्दों को लेकर आंदोलन छात्रों को समर्थन देने के लिए बड़ी संख्या में छात्र नेता , विभिन्न पार्टियों के लोग पहुंच रहे हैं, लंबे समय से आंदोलन चलने के कारण एक छात्रनेता की तबीयत खराब हो गई तो उसे एंबुलेंस की जरूरत पड़ी. छात्र नेता के साथी कहते हैं कि विश्वविद्यालय परिसर में एंबुलेंस मौजूद थी बावजूद इसके के प्रोफेसर साहब के इशारे पर एंबुलेंस नहीं दी गयी. ऐसे में छात्र नेताओं को अपने साथी छात्र नेता को अपने साधनों से ही अस्पताल में ले जाना पड़ा. एक पुराने छात्र नेता ने इस वाक्य में अपनी टिप्पणी की है कि आंदोलन- धरना प्रदर्शन अपनी जगह है लेकिन कम से कम विश्वविद्यालय के गुरु जनों को मानवता के नाते अपने शिष्य के जीवन से इस तरह से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए था, एंबुलेंस और सभी जरूरी मदद देनी ही चाहिए थी लेकिन वक्त ऐसा है कि गुरु शिष्य के रिश्ते भी तो तारतार हो रहे हैं हो सकता है इसका भी असर पड़ा हो और शिक्षक ने खुद अपने हाथ खींच लिए हो.
लखनऊ खंड स्नातक शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी सोशल मीडिया के सहारे ही चुनाव प्रचार में लगे हैं, शिक्षक संघ के पदाधिकारी उम्मीदवार बनाने जाने के बाद से ही सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर सुबह से ही गुड मॉर्निंग से लेकर गुड नाइट तक का शेड्यूल जारी कर रखा है , छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर जितना 5 साल में मुखर नहीं हुए उतना आजकल मुखर होने लगे हैं लेकिन उनके संगठन के लोग ही उनको अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहे हैं . इसकी चर्चा अंदर खाने में भी है लेकिन खुलकर बोलने के लिए कोई तैयार नहीं है. प्रत्याशी तो इसलिए चुप है कि अगर किसी को कुछ कहा तो मामला और बिगड़ जाएगा और फिर रायते को समेटना मुश्किल होगा . इसलिए जैसे भी हो अपना चुनाव निकल जाए उसके बाद ही हिसाब किताब किया जाएगा,
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