
- हिंदुत्व में विज्ञान पर जानकारी देते हुए ललित अग्रवाल ने बताया कि हिंदू, धर्म व हिंदुत्व को सही (वास्तविक) परिपेक्ष्य में समझने की आवश्यकता है।
- प्राचार्य श्रीमति गायत्री अवस्थी सहित सभी ने आग्रहव्रत लेते हुए अपने विद्यालय, स्टॉफ व विद्यार्थियों की ओर से श्री ललित हीरालाल गर्ग को तथ्यात्मक जानकारी देने हेतु धन्यवाद देते हुए, इसे जनसामान्य तक ले जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
बिलासपुर, 20 जुलाई , महर्षि विद्या मंदिर, बंधुआ पारा द्वारा महर्षि आध्यात्मिक जनजागरण अभियान के तहत सुंदरकांड पाठ एवं हनुमान चालीसा पाठ के उपरांत उपस्थित जनसमूह को हिंदुत्व में विज्ञान पर जानकारी देते हुए ललित अग्रवाल ने बताया कि हिंदू, धर्म व हिंदुत्व को सही (वास्तविक) परिपेक्ष्य में समझने की आवश्यकता है।
भारत में हिमालय से निकलने वाली बारह मासी नदियों का बाहुल्य होने से इसे सिंधुस्थान कहां जाता था। भाषा मुखसुख खोजती हैं। जैसे सप्ताह का हप्ता हुए वैसे ही कालांतर में यहीं अपभ्रंश होकर हिंदुस्थान हुआ तथा यहाँ रहने वाले हिंदू कहलाये।
धर्म का अभिप्रायः किसी भी पूजा पध्दति से नहीं होता। वरन यह करणीय अकरणीय की कसौटियों का मापदंड होता हैं। जैसे प्यासे को पानी पिलाना, गरीबों की मदद करना, रोगी, असहाय की सेवा करना मानव धर्म हैं। अतः भारत मे रहने वाले प्रत्येक सह्रदय मानव हिंदू हैं। उनके पंथ पूजा पध्दति अलग अलग हो सकती हैं।
अब प्रश्न उठता हैं कि हिंदुत्व क्या हैं। तो हिंदुओ के प्रत्येक सद्गुण यथा नारी का सम्मान, सहअस्तित्व में विश्वास, सर्वे भवंतु सुखिनः, जिओ और जीने दो, सभी को अपने अपने तरीके से ईश पूजा करने देना। बड़ो का आदर करना। भारतीय संस्कृति व संस्कार को अक्षुण रखना आदि ही हिंदुत्व के सद्गुण हैं। शुभमविहार मानस मंडली द्वारा सतत सुंदरकांड की 148वे पाठ में अखिलानंद पांडेय, ललित अग्रवाल, अखिलेश द्विवेदी, सुरेंद्र दुबे, प्रमोद अवस्थी, विजय मिश्रा, भूपेंद्र यादव, प्रमोद तिवारी सहित महर्षि विद्या मंदिर के अनेकों स्टॉफ उपस्थित थे।
अतः में प्राचार्य श्रीमति गायत्री अवस्थी सहित सभी ने आग्रहव्रत लेते हुए अपने विद्यालय, स्टॉफ व विद्यार्थियों की ओर से श्री ललित हीरालाल गर्ग को तथ्यात्मक जानकारी देने हेतु धन्यवाद देते हुए, इसे जनसामान्य तक ले जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
