
वैदिक पंचांग
⛅दिनांक – 17 फरवरी 2024
⛅दिन – शनिवार
⛅विक्रम संवत् – 2080
⛅अयन – उत्तरायण
⛅ऋतु – शिशिर
⛅मास – माघ
⛅पक्ष – शुक्ल
⛅तिथि – अष्टमी सुबह 08:15 तक तत्पश्चात नवमी
⛅नक्षत्र – कृतिका सुबह 08:46 तक तत्पश्चात रोहिणी
⛅चन्द्र राशि:~ वृषभ अहर्निश
⛅योग – इन्द्र दोपहर 01:44 तक तत्पश्चात वैधृति
⛅राहु काल – सुबह 09:49 से 11:15 तक
⛅सूर्योदय – 06:58
⛅सूर्यास्त – 06:24
⛅दिशा शूल – पूर्व
⛅अभिजीत मुहूर्त:~ 12:18 से 01:04
⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:17 से 06:08 तक
⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:15 से 01:06 तक
⛅व्रत पर्व विवरण – गुप्त नवरात्रि-दुर्गाष्टमी
⛅विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है । नवमी को लौकी खाना त्याज्य है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
गुप्त नवरात्रि विशेष
???? नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है । आदिशक्ति श्री दुर्गा का अष्टम रूप श्री महागौरी हैं । श्री महागौरी की आराधना से सोमचक्र जागृत हो जाता है और इस चक्र से संबंधित सभी शक्तियां श्रद्धालु को प्राप्त हो जाती है । मां महागौरी के प्रसन्न होने पर भक्तों को सभी सुख स्वत: ही प्राप्त हो जाते हैं ।
नवरात्रि की अष्टमी यानी आठवें दिन माता दुर्गा को नारियल का भोग लगाएं । इससे घर में सुख समृद्धि आती है ।
शनिवार के दिन विशेष प्रयोग
????शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है । (ब्रह्म पुराण)
????हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है । (पद्म पुराण)
आर्थिक कष्ट निवारण हेतु
????एक लोटे में जल, दूध, गुड़ और काले तिल मिलाकर हर शनिवार को पीपल के मूल में चढ़ाने तथा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र जपते हुए पीपल की 7 बार परिक्रमा करने से आर्थिक कष्ट दूर होता है ।
????अंतःकरण के दोष व उनकी निवृत्ति ????
???? चंचलता : सत्य अथवा स्थिर तत्त्व से योग न होने के कारण मन में चंचलतारूपी दोष है, इसीसे अंदर दुर्बलता रहा करती है ।
????जगत के देहादिक असत् पदार्थों एवं विषय-सुखों से वैराग्य दृढ होने पर जब अभ्यास के द्वारा एक सत्य आधार में मन स्थिर होता है, तभी इस दोष की निवृत्ति होती है ।
???? मलिनता : चित्त में असत् संबंध के कारण असत् चिंतन होते रहने से मलिनतारूपी दोष है, इसीसे खिन्नता रहा करती है ।
????मन के स्थिर होने पर एक ‘सत् पदार्थ के चिंतन में जब चित्त तल्लीन होता है तभी यह दोष दूर होता है ।
???? अज्ञान : बुद्धि में आत्मज्ञानी संतपुरुष का संग (सत्संग) न मिलने के कारण अज्ञानरूपी दोष है, इसीसे मनुष्य में मूढता रहा करती है ।
????मन तथा चित्त के स्थिर और शुद्ध होने पर ही मानव-बुद्धि स्वस्थ एवं शांत होकर संत, सद्गुरुदेव से,सुसंग से सद्ज्ञान-प्रकाशपूर्ण होती है । इसीसे अज्ञानरूपी दोष का नाश होता है ।
???? ममता : अहं में देहादिक पदार्थों के प्रति ममतारूपी दोष है । इसी कारण आसक्ति एवं जड़ता रहा करती है ।
????सद्ज्ञान-प्रकाश में ही अहं का मिथ्या पदार्थों के प्रति अहमन्यता (अहंता-इदंता ) रूपी दोष सत्स्वरूपाभिमान में परिणत हो जाता है, इसी से जड़ता रूपी दोष की निवृत्ति होती है ।#campussamachar.com,
