
जेहि रहीम तन मन लियो, हिय कियो बेचैन ।
तासों सुख दुख कहन की, रही बात अब कौन ।।
✍ किसी की भक्ति यानि उससे अगाध प्रेम करना है ।
✍ अगाध प्रेम अर्थात उसको अपने अंदर (तन-मन-हृदय में) रचा-बसा लेना है ।
✍ मीरा ने भगवान श्रीकृष्ण से अगाध प्रेम किया था । भगवान मीरा की सुध-बुध का स्वयं ध्यान रखते थे ।
✍ जिसने (भगवान) हमारा तन मन ले लिया है और हमारे हृदय में अपना निवास स्थान बना लिया,अब उससे अपना सुख दुख कहने की क्या कोई जरूरत है ?
✍ तन, मन, धन से ईश्वर शरणागत भक्त, सभी चिन्ताओं से मुक्त हो जाता हैं।
आज तिथि 5124/10-01-04/02, 5124 / पौष – शुक्ल – चतुर्थी / सोमवार “विनायक चतुर्थी” की पावन मंगल बेला में, ईश्वर एवं उसके लोगों से अगाध प्रेम के संकल्प के साथ, नित्य की भाँति, आपको मेरा “राम-राम”।
